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Wednesday, 31 August 2016

अनोखी परंपरा: यहाँ पिता के साथ बेड शेयर करती हैं लड़किया

बांग्लादेशमें स्थित है आदिवासी समुदाय मंडी।इस समुदाय की एक अजीबोगरीब परम्परा है जिसमे माँ और बेटी का एक ही आदमी के साथ शादी करना। यानी बेटी का पति उसका पिता ही होता है। यहां बेटियां बचपन से ही पिता को पति के रूप में देखती हैं।महिलाएं ही करती हैं बड़े फैसले..ये कम्युनिटी बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्व स्थित माधोपुर जंगल में रहती है। इस कम्युनिटी में बहुत छोटी उम्र में ही शादी हो जाती है। 90 फीसदी कम्युनिटी ने अब इसाई धर्म अपना लिया है।यहां परिवार पर महिलाओं की हुकूमत चलती है। वे ही परिवार से जुड़े बड़े फैसले करती हैं।बेटी की पति से शादी पर मां को परेशानी..एक शादी कर चुकी ओरोला ने कहा- जब मेरी शादी हुई तो मैं भाग जाना चाहती थी। मेरा अच्छी शादी का सपना चूर-चूर हो चुका था। उन्होंने कहा- पिता कोपति के रूप में देखना खौफनाक था।ओरोला की मां मिटामोनी डालबोट ने कहा कि मुझे इस बात पर कोई पछतावा नहीं।ये शादी हमारे परिवार की जिंदगी के लिए जरूरी थी। ये फैसला मेरा नहीं, बल्कि कम्युनिटी के बुजुर्गों का था।लड़कियां तोड़ रहीं परम्परा।इस कम्युनिटी में 'अचिक-मचिक' (मंडी वुमन यूनिटी) भी है। इसकी मुखिया का कहना है कि हमें अपनों के लिए बहुत सी व्यवस्थाएं करनी होती हैं। हमें अपनों की प्रॉपर्टी भी बचानी है और महिलाओं को भी बचाना है। बेटी की पिता से शादी इसी व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि, कम्युनिटी धीरे-धीरे इस परम्परा को खत्म कर रहीहै। क्योंकि, मॉडर्न लड़कियां इस रिचुअल को नहीं मान रहीं। वे ढाका भाग रही हैं। कोई मेड केरूप में काम कर रही है, तो कोई ब्यूटिशियन बन रही है।

Sunday, 28 August 2016

इस कुंए में ​गिरने वाली चीजें क्यों बन जाती हैं पत्थर

लंदन । इंग्लैंड के न्यर्जबरो शहर में एक ऐसा कुंआ है जो किसी भी चीज को पत्थर में बदल देता है। इस कुंए को स्थानीय लोग दैत्य कुंआ मानते हैं।

इलाके में रहने वाले लोग इस कुंए में जाने से खौफ खाते हैं। उनका मानना है कि अगर वे इसमें गए तो वे भी बाकियों की तरह पत्थर में बदल जाएंगे।

कुंए को देखने के लिए दूर—दूर से पर्यटक आते हैं और कई बार वे अपने साथ लाए गए कुछ सामान को इसमें छोड़ देते हैं ताकि लौटने के बाद उसे पत्थर में तब्दील होते हुए देख सकें

Friday, 12 August 2016

बेटे के हाथ से खाने की चाह ने,इस माँ को कराया 22 साल का फाका।

नई दिल्ली।  पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर गांव मालेचा में एक मां पिछले 22 सालों से अपने बेटे काघर लौटने का इंतजार कर रही है। बेटे के इंतजार में इस मां ने आज तक खाना नहीं खाया है, वह इस उम्मीद में है कि जब उसका बेटा वापस आएगा, तभी वह उसके हाथों से खाना खाएगी।वो अक्सर दरवाजे के बाहर खाने की थाल लेकर अपने बेटे की राह देखती रहती है। लेकिन बेटा इतना बेदर्द है कि मां की ये हालत देखकर भी नहीं उसका दिल नहीं पसीज रहा।  आश्रमपाड़ा में 22 साल पहले पिता से नाराज होकर 85 वर्षीय महिला नंदरानी महंतका बेटा घर छोड़कर चला गया था।फिर खबर मिली कि वो अपने मामा के घर बांग्लादेश गया है। मां ने उसे मनाने की कोशिश की लेकिन बेटा वापस नहीं आया। हार कर नंदरानी ने बेटे के घर आने तक खाना नहीं खाने की जिद पकड़ ली। तब से लेकर अब तक उसने खाना नहीं खाया है।नंदरानी की बेटी छवि महंत बताती है कि 10 साल पहलेउसका बेटा आया था। बेटे ने मां से खाना न खाने की जिद छोड़ने के लिए कहा लेकिन मां नहीं मानीं। फिर बेटा चला गया। छवि कहती है कि कई बार तो नंदरानी घरके द्वार पर खाने की थाल लेकर बैठती है कि बेटा आएगा और वो अपने हाथों से उसे खाना खिलाएगा।बताते हैं कि नंनदरानी दिन में 10-12 कप चाय और करीब 80 पान खाकर जिंदा रहती हैं। परिजनों का कहना है कि वो साल में 1-2 बैंगन या कोई और सब्जी खाती है। जिले के चीफ हेल्थ ऑफिसर की मानें तो 22 सालों तक खाना नहीं खाने से कोई जिंदा नहीं रह सकता। ये सिर्फ चाय और पान खाने से शरीर में कई तरहके रोग जगह बना लेते हैं, जो जानलेवा होते हैं। ऐसे में नंदरानी का जिंदा रहना हैरानी की बात है।

Wednesday, 10 August 2016

गर्मी से परेशान युवक ने सूर्य भगवान पर किया केस

गर्मी और तपन से कोई किस हद तक परेशान हो सकता है इस बात का अंदाजा नीचे वाली तस्वीर को देखकर लगायाजा सकता है। ये एक पत्र है जिसमें भगवान सूर्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें सूरज की तपनसे पीड़ित व्यक्ति ने अपनी व्यथा लिखित रूप में प्रकट की है।शिवपालसिंह नाम के इस शख्स ने मध्यप्रदेश के शाजापुर थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए रिपोर्ट में लिखा है कि मैं विगत एक सप्ताह से आसमान से बरसती आग के कारण मानसिक एवं शारीरिक रूपसे कष्ट सह रहा हूं। इसके जिम्मेदार श्रीमान सूर्नारायण निवासी ब्रह्मांड पर भारतीय संविधान अनुसार आवश्यक कानूनी धाराओं में कार्यवाही कर मुझे एवं जनमानस को राहत प्रदान करने का कष्ट करें।शिवपालसिंह ने आगे लिखा है कि विगत एक सप्ताह से श्रीमान सूर्यनारायण अपनी हदें तोड़कर प्रत्येक जीव का जीना दुश्वार कर रहे हैं। मुकबधीर पशु, पक्षी की दयनीय एवं पेड़-पौधों की जल जाने जैसी हालत साक्ष्य के रूप में आपके सामने है। प्रार्थी के आवेदन पर सद्भावना पूर्वक विचार कर दंड प्रकिया संहिता 1973 की धारा 154 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज करने का कष्ट करें।यह रिपोर्ट 20 मई का है जिसमें शाजापुर पुलिस कोतवाली का स्टैंप लगा हुआ है।

ये था दुनिया का सबसे बदनाम गाना, 62 साल रहा बैन

गानों को लेकर आपका क्या कहना है। जाहिर है कुछ अच्छा ही होगा। गाने दिल के करीब होते ही हैं। क्या आप जानते हैं कुछ गाने ऐसे भी हैं जिसको सुनने के बाद कईयों ने आत्महत्या कर ली।हम बात कर रहे हैं Sad Sunday गाने की जिसे 1933में हंगरी के संगीतकार Rezso Seress ने बनाया था। ये दुनिया के सबसे ज्यादा पॉपुलर और मनहूस गानों में गिना जाता है।इस गाने के बोल दिल को छू लेते हैं। ये गाना एक रोमांटिक साउंड ट्रैक है। इस गाने में प्रेमी मर जाता है पर प्रेमिका बाद में भी उससे मिलने की ख्वाहिश करती है। ये गाना अपने अंदर इतने दर्द को समेटे हुए है कि हर सुनने वाले को अपना दर्द  महसूसहोने लगता है।फेमस होने के नाते 1941 में अमेरिकन जैज म्यूजिक के जादूगर माने जाने वाले Billie Holiday ने इस गाने का रीमेक बनाया। फिर भी इस गाने का नशा बरकरार रहा। लोगों के आत्महत्या करने में कोई कमी आई।यह गाना इतना बदनाम हो चुका था कि 1941 में BBC सहित कई देशों ने इस गाने पर प्रतिबंध लगा दिया और 63 वर्षों बाद 2003 में इससे बैन हटाया गया।ये थी इस गाने की कहानी जो इस दौर से गुजर चुके लोगों को अपनी सी लगती थी।

Tuesday, 9 August 2016

गर्लफ्रेंड पर करा रहा था तंत्र-मंत्र, लेकिन...

प्यार में असफल, व्यापार में परेशानी, शादी न होना, घरेलू झगडे़... यही कुछ कारण हैं जिनसे परेशां लोग अक्सर आमिलों व तांत्रिकों के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई के साथ-साथ अपना चैन-सुकून भी गवां देते हैं। रूहानी इलाज, जादू-टोना, काला जादू... ये कुछ ऐसे नाम हैं जिनके नामपर भोले-भाले व परेशां लोगों की मेहनत की कमाई को सरेआम ठगा जाता है। अशिक्षित नहीं, पढ़े-लिखे व उच्च शिक्षित लोग भी बड़ी आसानी से इस मुसीबत में फंस जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक युवक ने हमसे साझा की अपनी कहानी।देते हैं 100 % गारंटी एमकॉम कर चुका एक युवक विदेश से पैसा कमा कर दो वर्ष बाद अपने देश लौटा। इसी दरमियां उसका अपनी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया। हजार मिन्नतों व समझाने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। एक दिन यूं ही सफर के दौरान बस में उसे एक पंपलेट पड़ा हुआ मिला। जिसपर किसी राजस्थान के बाबा का पता व फोन नम्बर लिखा हुआ था। उस विज्ञापन में जादू-टोना, वशीकरण की 100 प्रतिशत गारंटी दी गई थी। इतना ही नहीं काम न होने पर पैसा वापसी की भी पूरी गारंटी थी। युवक को कुछ गड़बड़ तो लगी, लेकिन उसने फिर भी पंपलेट को जेब में रख लिया। तनाव का शिकार युवक की कुछ दिनों बाद उस पंपलेट पर नज़र पड़ी तो उसने सोचा एक बार संपर्क करने में भला हर्ज ही क्या है? यही सोच कर युवक ने दिए गए नम्बर पर संपर्क साधा। ऐसे देते हैं झांसा युवक ने सामने वाले व्यक्ति को अपने परेशानी बतायी। कथित बाबा ने नाम, गर्लफ्रेंड व उसके  मां-बाप का नाम पूछकर दस मिनट में कॉल करने को कहा।युवक ने दस मिनट बाद जब कॉल किया तो जवाब मिला तुम दोनों को अलग करने के लिए किसी ने काला जादू कराया है। इतना सुनते ही पहले से तनाव से ग्रस्त युवक की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी। उसने हल मालूम किया तो जबाव मिला तीन हजार रूपये का खर्चा है। 100% गारंटी है चंद घंटों में ही तुम्हारी महबूबा तुम्हारी गुलाम बन जाएगी, जो तुम चाहोगे वो होगा। युवक ने सोच विचार कर जवाब देने के बाद कॉल करने कोकहा। रात भर उसने सोचा और सोचा कि वैसे भी अपने प्यार के बिना तो वैसे ही वह जिंदा नहीं रह सकता, फिर तीन हजार रूपये देने में हर्ज ही क्या है? तीन हजार रूपये की अहमियत उसकी जिंदगी से अधिक तो नहींहो सकती।अगली सुबह युवक ने उस नम्बर पर फिर से कॉल किया और पूछा कि पैसे कैसे पहुंचाने हैं। कथित बाबा ने एक बैंक एकाउंट नम्बर एसएमएस किया। युवक ने बैंक जाकर बताए गए एकाउंट में 3000 रूपये जमा कर दिए। इसके बाद युवक ने फिर से कॉल की तो रात आठ बजे कॉल करने को कहा गया। बताए गए समय पर कॉल करने पर इधर-उधर की तमाम बातों के बाद कहा कि बेटा मैंने वशीकरण कर दिया है, तुम्हें सुबह तक असर दिख जाएगा।मांगे जाते हैं और पैसे युवक उत्सुकता में रात भर नहीं सोया। सुबह 11 बजे कथित बाबा का स्वयं कॉल आया। उसने युवक से कहा कि बेटा तुम्हारे काम में कुछ बाधा आ रही है तुम्हे एक पहाड़ी ऊल्लू की भेंट चढ़ानी होगी। युवक ने पूछा कि ऊल्लू कहां मिलेगा तो जवाब मिलेगा हम ऊल्लू खुदखरीद लेंगे तुम उसी एकाउंट में 6000 रूपये और जमाकर दो।युवक को कुछ अजीब लगा तो उसने अपने एक मित्र को पूरा माजरा बताया। उसके मित्र ने अपने सामने उस नम्बर पर कॉल करने को कहा। इस पर युवक ने कॉल करके कहा कि मैं खुद ऊल्लू खरीद लूंगा क्या करना है बताओ? कथित बाबा गुस्सा हो गया और बोला वो ऊल्लू तुम्हें मिल ही नहीं सकता। अगर 6000 नहीं दे सकतेतो भूल जाओ तुम्हारा काम नहीं होगा। युवक ने कहा उसके पास 6000 रूपये नहीं हैं तो जवाब मिला 3000अब दे दो बाकि काम होने के बाद दे देना। इसी तरह मोलभाव करते-करते कथित बाबा 700 रूपये तक आ गया। युवक रूपये जमा करने जाने लगा। लेकिन उसके मित्र ने उसे रोक लिया और स्वयं बात करते हुए कहा कि पहलेरिजल्ट दिखाओ तब ही पैसा मिलेगा। कथित बाबा ने गालियां व धमकियां देनी शुरू कर दीं। 10 मिनट बाद एक एसएमएस मिला जिसमें लिखा था एक घंटे के अंदर देख लेना मैं तुम्हारे ऊपर काला जादू कर रहा हूं। अब तुम ही जिम्मेदार हो। युवक परेशान हो गया और पैसा जमा करने के लिए जाने लगा। लेकिन उसके मित्र ने उसे रोक लिया। और आज चार माह बीत चुके हैं, वक्त कुछ यूं बदला कि युवक अपने ब्रेकअप के दर्द से बाहर आ गया।फोटो: प्रतीकात्मक

क्या मुसलमान पीठ में छुरा घोंपने वाली पार्टी के प्यार में अंधे हो गए हैं? - AIMIM

अफ़ज़ल को फांसी दी गई कांग्रेस पार्टी की सरकार ने, लेकिन मुसलमानों के कठघरे में खड़ी है बीजेपी. अयोध्या में राम मंदिर का ताला खुलवाने में 100 प्रतिशत योगदान और बाबरी मस्जिद का विध्वंस करने में 50 प्रतिशत योगदान कांग्रेस का भी रहा, लेकिन मुसलमानों के कठघरे में खड़ी है अकेली बीजेपी. 1947 के बाद से देश में सैंकड़ों बड़े और हज़ारोंछोटे दंगे हुए… लेकिन देश उन तमाम दंगों को भूल गया. याद रहा तो सिर्फ़ एक दंगा- गुजरात का दंगा. यानी जो दंगे कांग्रेस ने करवाए या उसके शासन मे हुए, वे सभी देवी की उपासना और अल्लाह की इबादत के कार्यक्रम थे और जो दंगे बीजेपी ने करवाए या उसके शासन में हुए, सिर्फ़ वही कत्लेआम और नरसंहार माने गए.ऐसे चमत्कार यह साबित करते हैं कि बीजेपी की सांप्रदायकिता बचकानी है और कांग्रेस की सांप्रदायिकता शातिराना है. कांग्रेस सारे गुनाह करके भी अपना दामन साफ़ रखती है. कांग्रेस ने उजला कुरता, उजली टोपी चुनी. दाग लगेगा भी तो धो लेंगे, दामन फिर उजला हो जाएगा. बीजेपी ने भगवा कपड़ा, भगवा झंडा चुन लिया. कितना भी साफ़ करो, लाल से मिलता-जुलता ही दिखेगा. कांग्रेस ख़ून पीकर कुल्ला कर लेती है और आरएसएस-बीजेपी के वीर बांकुड़े अक्सर पानी में लाल रंग मिलाकर लोगों को डराने में अपनी बहादुरी समझते हैं.कांग्रेस की सियासत कुछ ऐसी रही कि जब उसे मुसलमानों को मारना हुआ, उसने मार दिया, लेकिन सामने आकर कहा कि यह निंदनीय कृत्य है, हम इसकी निंदा करते हैं. कभी बाज़ी उल्टी पड़ गई और लोग खेलसमझ गए, तो उसने बड़ी मासूमियत से माफ़ी मांग ली. दूसरी तरफ़ बीजेपी की सियासत ऐसी रही कि जब उसे मुसलमानों को नहीं भी मारना हुआ, तब भी उसने चीख़-चीख़कर कहा- “पाकिस्तान परस्तो, हम तुम्हें सबक सिखा देंगे. भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा. भारत की खाओ और पाकिस्तान की गाओ, हम नहीं सहेंगे.”मेरी राय में मुसलमानों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी की सियासत में यही फ़र्क़ है. देश में आज जोइतनी सांप्रदायिकता है, उसके लिए अकेले आरएसएस और बीजेपी को ज़िम्मेदार मानने के लिए कम से कम मैं तो तैयार नहीं हूं. मेरी नज़र में आरएसएस और बीजेपी के उद्भव, उत्थान और उत्कर्ष की कहानी में कांग्रेस की दोगली सियासत का सबसे बड़ा रोल है. कांग्रेस अगर सही मायने में धर्मनिरपेक्षता की नीति पर चली होती, तो आज आरएसएस और बीजेपी का कहीं नामोनिशान नहीं होता.जब हमने लोकतंत्र अपनाया, सभी नागरिकों के हक़ और आज़ादी की बात की, धर्मनिरपेक्षता के कॉन्सेप्ट कोस्वीकार किया, तब हमें एक और चीज़ तय करनी चाहिए थी. वह यह कि हर हालत में ग़लत को ग़लत कहेंगे और सही को सही. वोट के लिए ग़लत को सही और सही को ग़लत कहना लोकतंत्र और संविधान की हत्या के बराबर है. और यह काम कांग्रेस पार्टी ने देश की किसी भी दूसरी पार्टी से बढ़-चढ़कर किया. उसने मुसलमानों के ग़लत को भी सही कहने से कभी परहेज नहीं किया. शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला पलटना इसका क्लाइमैक्स था. इससे नुकसान हिन्दुओ को नहीं,हमारी करोड़ों मुस्लिम माताओं और बहनों को ही हुआ.देश की सभी पार्टियां सत्ता के लिए किसी भी हद तक नीचे गिरने को तैयार हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने पिछले 68 साल में साबित किया है कि उससे अधिक नीचे कोई नहीं गिर सकती. दुर्भाग्य से कांग्रेस केपास आज़ादी की लड़ाई की चकाचौंध भरी कहानियां और केश कटाकर कुर्बानी देने के ऐसे-ऐसे किस्से हैं, जिसकी बुनियाद पर उसने ऐसा माहौल बना रखा है, जिससेउसके सारे गुनाह माफ़ हो जाते हैं. जिन लोगों ने आज़ादी की लड़ाई में असली कुर्बानियां दीं, आज़ादीके बाद कांग्रेस ने उन्हें इतिहास के कूड़ेदान में डाल दिया.लोग इस बात की भी अनदेखी कर देते हैं कि कांग्रेस को 1947 में किसी भी कीमत पर देश का विभाजन रोकना था, जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा भी था कि विभाजन मेरी लाश पर होगा. लेकिन विभाजन तो गांधी जी की लाशपर नहीं हुआ… हां, विभाजन की वजह से उनकी लाश ज़रूरगिर गई. जवाहर लाल नेहरू को सत्ता सौपने के लिए देशका विभाजन होने दिया गया. और यह कहने की ज़रूरत नहीं कि उसी एक विभाजन की वजह से पिछले 68 साल से भारत में न सिर्फ़ लगातार तनाव का वातावरण बना हुआहै, बल्कि भारत और पाकिस्तान- एक ही ख़ून- एक दूसरे का ख़ून पीने पर आमादा रहते हैं.हिन्दू और मुसलमान भारत माता की दो आंखें हैं और कांग्रेस पार्टी ने पिछले 68 साल में उन दोनों आंखों को फोड़कर देश को अंधा बनाने का काम किया है.और इस तरह इस कानी पार्टी ने अंधों की रानी बने रहने का नुस्खा ढूँढा ।(लेखक आल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन के दिल्ली कमेटी के नेता हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

अजब बीमारी, इस महिला को 5 साल तक लगातार होते रहे पीरियड्स

पर्थ।  उफ! पीरियड्स के तकलीफदेह दिन! महीने के उन पांच या छह दिनों का जिक्र महिलाएं कुछ इसी अंदाज में करती हैं। सोचिए अगर किसी महिला ने इसे महीने के पांच दिन नहीं लगातार पांच साल तक इसे झेला हो।पीरियड्स के दौरान सैनिट्री नैपकिंस, पेनकिलर पर खर्च होने वाले पैसों के बारे में भूल जाएं। आइसक्रीम, मिठाई या फिर अपनी पसंद की चीजों को नहींखा पाने की मजबूरी भी भूल जाएं, लेकिन इस दौरान होने वाले दर्द की तकलीफ कैसे भूलें? पीरियड्स में दर्द और मानसिक तकलीफ सभी महिलाओं के लिए चुनौती होती है। 27 साल की ऑस्ट्रेलिया के पर्थ की रहने वालीं क्लो क्रिस्टस इस तकलीफ का हर रोज सामना कर रहीं हैं।क्रिस्टस जब 14 साल की थीं, तब उन्हें पहली बार पीरियड्स हुआ था। अगले पांच साल तक लगातार क्रिस्टस को पीरियड्स होते ही रहे। उस तकलीफ को याद करते हुए क्रिस्टस कहती हैं, 'मुझे पता था कि यहनॉर्मल नहीं है, लेकिन मैं इसे लेकर शर्मिंदगी से भरी हुई थी। उस दौरान मैं खुद को बहुत अकेला महसूस करती थी।'क्रिस्टस को इस वजह से हाई स्कूल के दिनों से ही एनीमिया की गंभीर परेशानी हो गई। 19 साल की उम्र में उन्होंने साप्ताहिक स्तर पर आइरन की गोलियां लेनी शुरू कर दी। सात महीने तक आइरन की गोली लेने के बाद भी उनका आइरन लेवल काफी कम था। इसके बाद उन्होंने कई टेस्ट कराए और फिर उन्हें अपनी बीमारी के बारे में पता चला। क्रिस्टस को ब्लीडिंग की आजीवन चलने वाली बीमारी है, जिस विलेब्रैंड डिजीज कहते हैं। ब्लीडिंग डिजीज के तौर हैमोफीलिया का नाम लोगों ने सुना है, लेकिन विलेब्रैंड डिजीज की जानकारी कम लोगों को है।बीमारी की वजह से क्रिस्टस के शरीर से हर रोज आधे लीटर रक्त का स्त्राव होता है। वहीं पीरियड्स के दौरान महिलाओं का औसतन 20 से 60 मिलीलीटर रक्तस्त्राव होता है। इस वजह से उन्हें थकान और कमजोरी की भी शिकायत होती है। मेडिकल प्रफेशन में इस बीमारी को लेकर जानकारी का अभाव है। क्रिस्टस बताती हैं, 'मैं कई ऐसे मेडिकल प्रफेशनल्स से मिली हूं, जिन्हें ब्लीडिंग डिजीज और इससे होने वाली तकलीफ का अंदाजा नहीं है। बतौर आर्ट डायरेक्टर मुझे लगातार यात्रा करनी होती है। आज तक मैंने जितने भी देशों की यात्रा की है, मुझे एक न एक बार मेडिकल इमर्जेंसी रूम जरूर जाना पड़ा है।'डॉक्टरों ने क्रिस्टस को इससे बचने के लिए एक दवाईदी है जिससे 12 घंटे तक ब्लीडिंग बंद रहती है। दवाई का असर खत्म होते ही ब्लीडिंग फिर शुरू हो जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए कुछ डॉक्टरोंने उन्हें गर्भाशय निकालने की सलाह दी, जिसे मानने से क्रिस्टस ने इनकार कर दिया। उनका कहना है, 'मैं नहीं जानती हूं कि मुझे बच्चे चाहिए या नहीं, लेकिनमैं कुछ भी ऐसा नहीं कर सकती जो औरत होने की विशेषता से जुड़ा हो।' फिलहाल क्रिस्टस इस बीमारी के बारे में जागरुकता के लिए कई कैंपेन चला रही हैं।

Sunday, 7 August 2016

हिजाब पहना तो मुस्लिम लड़की को नौकरी से निकाला

अमेरिका में कथित भेदभाव के एक मामले में एक युवा मुस्लिम महिला को डेंटल क्लिनिक से केवल इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया कि वह हिजाब पहनकर आती थी। उसका नियोक्ता कार्यालय में 'तटस्थ माहौल' बनाए रखना चाहता था।वर्जीनिया के फेयरफेक्स काउंटी में फेयर ओक्स डेंटल केयर में डेंटल सहायक के तौर पर नौकरी में रखी गई नजफ खान ने बताया कि उसे नई नौकरी से हटा दिया गया क्योंकि वह कार्यालय में मुस्लिम हिजाब पहनती थी। नजफ ने एनबीसी वॉशिंगटन को बताया, 'मैं वाकई दुखी थी। जिस दिन यह हुआ मैं टूट गई।'उसने इंटरव्यू के दिन या शुरुआती कुछ दिनों में हिजाब नहीं पहना था। तीसरे दिन उसने हिजाब पहनने की सोची क्योंकि नजफ ने महसूस किया कि उसकी नौकरी बनी रहेगी और इसे पहनना उसकी आध्यात्मिकमा से जुड़ा है। उस दिन कार्यालय में डा चक जो ने उससे हिजाब हटाने को कहा। जो ने उससे कहा कि वह कार्यालय में एक तटस्थ माहौल बनाकर रखना चाहते हैं।नियोक्ता ने उससे कहा कि वह हिजाब हटा दे क्योंकि इस्लामी हिजाब से मरीजों को परेशानी होगी और वह अपने कार्यालय से धर्म को अलग रखना चाहते थे। खान ने बताया कि जो ने उसे अल्टिमेटम दे दिया कि यदि उसने हिजाब पहनकर काम किया तो उसकी नौकरी चली जाएगी।खान ने बताया, 'जब मैंने कहा कि मैं अपने धर्म से समझौता नहीं करूंगी तो उन्होंने मुझे बाहर का रास्ता दिखा गया और मैं चली आई।' जो ने कहा कि धर्म के सार्वजनिक प्रदर्शन की उसके कारोबार में अनुमति नहीं है क्योंकि वह इसे तटस्थ रखना चाहता है। यदि उसके कर्मचारी टोपी पहनना चाहते हैं तो स्वच्छता कारणों से यह सर्जिकल टोपी होनी चाहिए।

Saturday, 6 August 2016

बारिश के कारन हुआ जलभराव हालात थे खस्ता,मुन्सी पाल्टी वालो ने निभायी अपनी ज़िम्मेदारी।

बारिश के कारन हुए जलभराव और गंदगी से पार पाने के लिए गफूर बस्ती खनवाडी रामोल रोड अहमदाबाद के लोगो ने इसकी खबर मुन्सी पाल्टी को दी और तुरंत अधिकारियो ने इस बाबत में करवाई करके उस रोड को सुन्दर और सुशिल बना दिया। खबर वह के मूल निवासी और हमारे पत्रकार रेहान रजा ने दी।
लेखक------रेहान रजा


लड़के ने अपने प्राईवेट पार्ट पर बनवाया टैटू, उसके आगे की कहानी प्राईवेट नहीं रही

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके शरीर पर बना टैटू आपके जीवन पर क्या असर डाल सकता है? इसमें हुई गलती के बारे में नहीं, बल्कि अपने शरीर पर बनी जगह के बारे में सोचिए. आज आपको एक ऐसे शख़्स के बारे में हम बताने वाले हैं जिसकी ज़िंदगी सिर्फ़ एक टैटू की वजह से परेशानियों से भर गई है. 21 साल के Lewis Flint ने 16 साल की उम्र में अपने शरीर के निचले हिस्से पर टैटू बनवाया, जिसकी वजह से उसकी कईगर्लफ्रेंड्स ने उसका साथ छोड़ दिया.Lewis Flint की मानें तो जब उसने ये टैटू बनवाया थातब वो अपने दोस्तों के सामने एक हीरो की तरह था. उसके इस टैटू की चर्चा पूरे शहर में थी. लोग उसके टैटू के बारे में बात करते थे. वो अपने इस टैटू से काफ़ी खुश था.लेकिन कुछ समय बाद जब Lewis की गर्लफ्रेंड ने उनका अजीब टैटू को देखा तो वो चौंक गईं और फ़ौरन रिश्ता तोड़ लिया. Lewis Flint बताते हैं कि वो उस लड़की से प्यार करते थे और जिस टैटू ने उसे हीरो बनाया था आज वहीं उनके प्यार को दूर करने की वजह बनगया. Lewis Flint की मां का कहना है कि वो उसकी गर्लफ्रेंड के इस फ़ैसले से हैरान नहीं है. कोई भी लड़की ऐसे टैटू को पसंद नहीं करेगी, और Lewis Flintके साथ ये पहली बार नहीं हुआ है, जब इस टैटू की वजह से किसी लड़की ने उसका साथ छोड़ा हो.Lewis Flint अपने टैटू से इतने परेशान हुए कि उन्होंने इसे हटवाने का फ़ैसला लिया, जिसके लिए वो सर्जन के पास भी गए. लेकिन जब टैटू को हटाने के लिए लेज़र का इस्तेमाल किया गया जो वो काफ़ी दर्द भरा था. Lewis इतना दर्द नहीं सह सकते थे इसलिए उन्होंने यह ट्रीटमेंट बीच में ही रोक दिया. अब वे बेहद दुखी है लेकिन उनके पास अब कोई चारा भी नहीं है. न तो वो ये टैटू हटा सकते हैं और न ही दिखा सकते हैं.

इस मंदिर में नहीं है कोई भी देवी-देवता

पूरे ओडि़शा और उसके बाहर भी बुधवार को भगवान जगन्नाथ के मंदिरों में रथयात्राएं निकाली गयीं लेकिन गंजाम के मरदा में 300 साल पुराने मंदिर में यह अनुष्ठान नहीं हुआ। मरदा के इस मंदिर में कोई देवी-देवता नहीं है।सन् 1733-35 के दौरान जब कलिंग शैली के मंदिरों को मुस्लिम आक्रांता निशाना बना रहे थे तब यह मंदिर पुरी जगन्नाथ मंदिर के देवी-देवताओं की मूर्तियों को छिपाने की जगह थी। बाद में स्थिति शांत होने पर देवी-देवताओं की मूर्तियां वापस पुरी लायी गयीं। चूंकि देवी-देवताओं ने मरदा में शरण ले रखी थी अतएव यह जगह शरण श्रीक्षेत्र के रूप में चर्चित हो गयी। तब से इस मंदिर में कोई देवी-देवता नहीं है, अतएव यहां कार उत्सव का कभी आयोजन नहीं हुआ। आठ साल पहले इस स्थान की यात्रा करने वाले जगन्नाथ संप्रदाय के सेवायतों और शोधकर्ताओं ने दुनिया कोइस मंदिर का महत्व बताने का बीड़ा उठाया और पुरी की यात्रा करने वालों से मरदा भी जाने की अपील की। विधायक (पोलासरा) श्रीकांत साहू ने कहा, यदि सरकार इस स्थान को पर्यटक स्थल घोषित करेगी तब इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व दुनिया के समाने आएगा।

इस बच्चे की आंखों से आंसू नहीं, निकलते हैं कंकड़

राजस्थान के बीकानेर शहर का रहने वाला 12 साल के लड़के की आंख से आंसू नहीं कंकड़ निकलते हैं। छठी क्लास में पढ़ने वाले जोगराज पाणेचा की इस समस्या के कारण उसके परिजन और शिक्षक अधिक हैरान हैं।शुरुआत में उन्हें भी लगता था कि यह जोगराज की कोई शैतानी है। इसके बाद उन्होंने जोगराज को अपने सामने घंटों बिठाए रखा और देखा कि उसकी आंख से वाकई कंकड़ निकल रहा है, तब वे इस बात को मानने लगे।हालांकि, डॉक्टर अभी तक इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं और मनोरोग विशेषज्ञ इसे साइक्लोजिकल डिसऑर्डर बता रहे हैं। बच्चे के परिजन अब आंख में घी डालने से लेकर मंदिरों में मान्यता मान रहे हैं,ताकि उनका बेटा जल्दी ठीक हो जाए।इस मामले में मनोरोग विशेषज्ञ एवं पूर्व मनोरोग विभागाध्यक्ष पीबीएम हॉस्पिटल के डॉक्टर अशोक सिंघल ने बताया कि यह मामाला हिस्टेरिकल डिसऑर्डरका केस लग रहा है। उन्होंने कहा कि जांच-पड़ताल के बाद ही कोई नतीजा निकल सकेगा। वैसे इस तरह के डिसऑर्डर में ध्यान खींचने के लिए व्यक्ति जाने-अनजाने में कई तरह की गतिविधियां करने लगते हैं।

अंधविश्वास या आस्था : यहां भगवान की जगह होती है चमगादड़ों की पूजा !

हाजीपुर।वैसे तो आपने चमगादड़ों को देखा होगा, लेकिन बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड के सरसई (रामपुर रत्नाकर) गांव में चमगादड़ों की पूजा होती है, इतना ही नहीं बल्कि लोग मानते हैं कि चमगादड़ उनकी रक्षा भी करते हैं। इन चमगादड़ों को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। यहां लोगों की मान्यता है कि चमगादड़ समृद्धि की प्रतीक देवी लक्ष्मी के समान हैं।एक न्यूज़ पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक चमगादड़ोंकी पूजा करने वाले सरसई गांव के एक बुजुर्ग गणेश सिंह का मानना है कि चमगादड़ों का जहां वास होता है, वहां कभी धन की कमी नहीं होती। ये चमगादड़ यहां कब से हैं, इसकी सही जानकारी किसी को भी नहीं है। सरसई पंचायत के सरपंच और प्रदेश सरपंच संघ के अध्यक्ष अमोद कुमार निराला बताते हैं कि गांव के एक प्राचीन तालाब (सरोवर) के पास लगे पीपल, सेमर तथा बथुआ के पेड़ों पर ये चमगादड़ बसेरा बना चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस तालाब का निर्माण तिरहुत के राजा शिव सिंह ने वर्ष 1402 में करवायाथा। करीब 50 एकड़ में फैले इस भूभाग में कई मंदिर भी स्थापित हैं।लगातार चमगादड़ों की संख्या बढ़ रही हैउन्होंने बताया कि रात में गांव के बाहर किसी भी व्यक्ति के तालाब के पास जानं के बाद ये चमगादड़ चिल्लाने लगते हैं, जबकि गांव का कोई भी व्यक्ति केजाने के बाद चमगादड़ कुछ नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि यहां कुछ चमगादड़ों का वजन पांच किलोग्राम तक है। सरसई पंचायत के मुखिया चंदन कुमार बताते हैं कि सरसई के पीपलों के पेड़ों पर अपना बसेरा बना चुके इन चमगादड़ों की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है। गांव के लोग न केवल चमगादड़ों की पूजा करते हैं, बल्कि इन चमगादड़ों की सुरक्षा भी करते हैं। यहां के ग्रामीणों का शुभकार्य इन चमगादड़ों की पूजा के बगैर पूरा नहीं माना जाता।चमगादड़ों को देखने के लिए पर्यटक प्रतिदिन आतेजनश्रुतियों के मुताबिक, मध्यकाल में वैशाली में महामारी फैली थी, जिस कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में यहां चमगादड़ आए और फिर ये यहीं के होकर रह गए। इसके बादसे यहां किसी प्रकार की महामारी कभी नहीं आई। स्थानीय आऱ एन. कॉलेज के प्रोफेसर एस़ पी़ श्रीवास्तव का कहना है कि चमगादड़ों के शरीर से जोगंध निकलती है, वह उन विषाणुओं को नष्ट कर देती है जो मनुष्य के शरीर के लिए नुकसानदेह माने जाते हैं। यहां के ग्रामीण इस बात से खफा हैं कि चमगादड़ों को देखने के लिए यहां सैकड़ों पर्यटक प्रतिदिन आते हैं, लेकिन सरकार ने उनकी सुविधा के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।चमगादड़ों का वास अभूतपूर्व हैसरपंच निराला बताते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में चमगादड़ों का वास न केवल अभूतपूर्व है, बल्कि मनमोहक भी है, लेकिन यहां साफ -सफाई और सौंदर्यीकरण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को पर्यटनस्थल के रूप में विकसित कराने के लिए पिछले 15 वर्षो से प्रयास किया जा रहा है, मगर अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि पूर्व पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिंटू और कला संस्कृति मंत्री विनय बिहारी ने इस क्षेत्र का दौरा भी किया था। निराला को आशा है कि वर्तमान समय में राजापाकर के विधायक शिवचंद्र राम कला एवं संस्कृति मंत्री बनाए गए हैं। शायद इस क्षेत्र का कायाकल्प हो जाए।

सेक्स की भूखी एक महारानी की ऐसी कहानी जो आपके होश उड़ा देगी

इतिहास की किताबों में राजा-रानियों को लेकर तरह-तरह के किस्से कहानियां पढ़ने को मिलती हैं लेकिन रूस की महारानी कैथरीन दि ग्रेट ‌द्वितीय के अजीबोगरीब यौन व्यवहार को लेकर बहुत सारी चौंकाने वाली कहानियां हैं।कहा जाता है कि कैथरीन ने अपने पति पीटर से संबंध खत्म करने के बाद अपने महल में सैकड़ों सेक्स गुलाम पाले थे। रानी के हर छोटे-बड़े काम के लिए कुंवारे जवान सेवक तत्पर रहते थे। रानी ने अपने महल के हर कमरे में इन गुलामों को तरह-तरह के काम दे रखे थे। खास बात ये है कि रानी के महल में कोई सेविका नहीं थी। रानी अपने निजी और अंतरंग कामकाज भी गुलामों से करवाना पसंद करती थी।कैथरीन और उनके पति पीटर के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। रानी की बायोग्राफी 'कैथरीन द ग्रेट - लव सेक्सएंड पॉवर' में इस बात का जिक्र है कि आठ साल तक दोनों के कोई संतान नहीं हुई और जनता के बीच पीटर की मर्दानगी को लेकर बातें उठने लगी थी। दोनों के बीच संबंध इस कदर कमजोर हुए कि बेबस पीटर अपने महल में रंगीनियों में डूब गए और कैथरीन अपने सेनापति के साथ विवाहेत्तर संबंधों में रम गई।इसी बीच कैथरीन ने पहले बेटे पॉल को जन्म दिया। अफवाहें उड़ी कि पीटर नामर्द थे और ये बच्चा कैथरीन और सेनापति का था। हालांकि बाद में कैथरीन ने कई प्रेमी बदले और तीन और बच्चों को जन्म दिया और हर बार पीटर की नामर्दी पर सवाल उठे।पीटर और रानी कैथरीन के बीच कैथरीन के प्रेमियों को लेकर कई बार तकरार हुई और ये तकरार महल के बाहर भी सुनाई दी, लेकिन कैथरीन अपने प्रेमियों से दूरी नहीं बना पाई। इतना ही नहीं, कैथरीन अब पूरी तरह से पीटर के किसी भी प्रभाव से आजाद हो चुकी थीं। म्यूजियम सीक्रेट्स डॉट टीवी पर दिखाए गए 'हरमिटेजस्टेट्स सीक्रेट्स' नामक एपिसोड में इस बात का उल्लेख है कि रानी ने महल के पास सेक्स सैलून बनवाया था।जवान लड़कों के साथ इस तरह सेक्स का खेल खेलती थी रानीरानी के अजीबोगरीब शौक थे। वह अपने नौकरों के साथ संबंध बनाती थी। रानी की मौत के बाद शासक बने उसके बेटे पॉल प्रथम ने जब महल की छानबीन कराई तो रानी के महल के ठीक बराबर में एक छिपा हुआ सेलून मिला जहां यौन कलाकृतियों वाली मसाज कुर्सियां मिली। इन कुर्सियों पर संभोगरत महिला और पुरुषों की आकृतियां उकेरी गई थीं।कहा जाता है कि यहां रानी अपनी यौन आकांक्षाओँ को पूरा करने के लिए बैचलर पार्टी करती थी, जहां राज्यके जवान लड़कों को पार्टी करने के लिए बुलाया जाताथा। रानी इन युवकों के साथ सेक्स प्रयोग करती और अपनी यौन आकांक्षाओं को बनाए रखने के हर संभव प्रयास करती। रानी ने इस पैलेस को पेटिट हरमिटेज का नाम दिया था।रूस में स्टेट हरमिटेज म्यूजियम में रखी सैलून की यौन आकृतियों वाली मसाज कुर्सियां इस बात की गवाह हैं कि अपने पति और प्रेमियों के बावजूद रानी कैथरीन में अजीबोगरीब यौन अतृप्तति थी जिसे पूरा करने के लिए वह हर तरह के प्रयोग करती थी।

कयामत का समय बताने वाली घड़ी में बचे हैं 'तीन मिनट'

शिकागो।दुनिया के खात्मे की चेतावनी देने के लिए बनाई गई काल्पनिक घड़ी का समय मध्यरात्रि से तीन मिनट पहले का तय कर दिया गया है। यानी दुनिया बर्बादी की कगार पर काफी करीब पहुंच गई है। परमाणुखतरे, ग्लोबल वॉर्मिंग को देखते हुए बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने यह फैसला किया है।डूम्सडे क्लॉक यानी धरती पर मंडरा रहे खतरों का आकलन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि बीते तीन साल में क्लाइमेट चेंज और परमाणु हथियारों के कारण धरती पर मंडरा रहा खतरा इतना बढ़ गया है कि वहकभी भी अंत के करीब पहुंच सकती है।इसी के मद्देनजर उन्होंने इस काल्पनिक डूम्सडे क्लॉक को रात्रि 12 बजे से तीन मिनट पहले पर सेट कर दिया गया है। इसका मतलब हुआ कि धरती के सफाये काखतरा बहुत ज्यादा है।इस घड़ी को 68 साल पहले शुरू किया गया था। शिकागो के अटॉमिक साइंटिस्ट्स के बुलेटिन को तैयार करने वाले लोग ही इस क्लॉक को सेट करते हैं। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के एक्िजक्यूटिव डायरेक्टररैशल ब्रॉन्सन ने बताया कि पिछले 20 सालों में यह बर्बादी के काफी करीब पहुंच गई है।एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के कॉस्मोलॉजिस्ट और प्रोफेसर लॉरेंस क्रूस ने बताया कि ग्लोबल वॉर्मिंग, आतंकवाद, अमेरिका और रूस के बीच परमाणु तनाव, उत्तर कोरिया के हथियारों की चिंता, पाक-भारतके बीच तनाव अस्थिरता फैलाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से इस घड़ी के समय में बदलाव नहीं करना अच्छी बात नहीं है।क्या है डूम्सडे क्लॉकयह धरती पर मंडरा रहे खतरों का आकलन करने वाली एक काल्पनिक घड़ी है। इसे 1947 में बनाया गया था, जिसमें शुरुआती टाइम 7 से 12 मिनट रखा गया था। तब हिरोशिमा और नागासाकी पर एटमी हमले हुए थे। इसके बाद से 18 बार मिनट सुई को आगे या पीछे किया जा चुका है।इससे पहले 2012 में भी मिनट सूई बढ़ाई गई थी और तबभी परमाणु बम और क्लाइमेट चेंज का खतरा बताया गया था। इसे सेट करने वाली टीम में 16 नोबेल पुरस्कार विजेता हैं और इस क्लॉक को काफी गंभीरता से लिया जाता है।जब धरती के अस्तित्व को लेकर खतरे की स्थिति बनती है, तो मिनट की सुई को रात्रि 12 बजे के करीब कर दिया जाता है। जब संपन्नता होती है, तो इसके समय को बढ़ा दिया जाता है। 1953 में इसे 12 बजने में दो मिनट पहले तय किया गया था और 1991 में 17 मिनट पहले तय किया गया था।

हल्द्वानी नारी निकेतन पहुंची लावारिस महिला, शेयर कर करें मदद

हल्द्वानी।खटीमा में लावारिस मिली महिला को नारीनिकेतन हल्द्वानी भेजा गया है। महिला नवादा बिहारकी बताई जा रही है। खटीमा में ग्राम प्रधान ऊंची महुवट प्रकाश चन्द्र जुकरिया ने थाने में अज्ञात महिला के घूमने की सूचना दी थी। महिला अपना नाम नहीं बता पा रही थी। एसआई जीसी भट्ट महिला को थाने ले गए थे। महिला ने अपना नाम आशा बताया था और पति का नाम किशनु बताया था। महिला को परगना मजिस्ट्रेट खटीमाके समक्ष पेश किया गया था। मजिस्ट्रेट के आदेश पर 29 जुलाई को महिला को नारी निकेतन हल्द्वानी भेज दिया था। नारी निकेतन की अधीक्षिका ज्योति पटवाल ने बताया कि महिला का नाम आशा देवी पत्नी कृष्ण चैधरी उर्फ किशनु है। महिला ने अपना पता नवादा बिहार बताया है। महिला केबारे में जानकारी रहने वाला कोई भी व्यक्ति 9899557990 पर सम्पर्क कर सकता है।

आठ किलो सोने के बिस्कुटों के साथ सलमान खान गिरफ्तार

नई दिल्ली।  सलमान खान गिरफ्तार हो गया है। अरे आप बैठे बैठे ओ तेरी ना कहो ये वो वाला सलमान नहीं है।कोयम्बटूर एयरपोर्ट के अधिकारियों को सूचना मिली के एक तस्कर शारजहां से सोना तस्करी करके विमान केजरिए भारत आ रहा है। कस्टम ने एहतियात बरती और सभी यात्रियों की पुख्ता तलाशी ली गई, लेकिन इस पर भी उन्हें कुछ भी सफलता नहीं मिली। तलाशी के दौरान मशीन के सिग्नल से अधिकारियों को एक व्यक्ति पर शक भी हुआ और उसे खोपचे में ले जाके तसल्ली से तलाशी भी ली लेकिन पुलिस को कुछ नहीं मिला।ऐसे में सब हताश हो गए के सोना आखिर गया कहां लेकिनतभी एक अधिकारी का ध्यान उसी व्यक्ति की चाल पर गया जिस पर उन्हें पूरा शक था। उसे फिर से केबिन में ले जाया गया और इस बार जाँच कुछ गन्दी भी हुई।पुलिस उस समय हैरान हो गई जब इस व्यक्ति के पिछवाड़े से आठ शुद्ध सोने के बिस्कुट निकले पुलिस ने इन बिस्कुट का वजन किया तो वो एक किलो के करीब था!  इनकी कीमत 2500000 बताई जा रही है।

अल्लाह कहने पर मुस्लिम दंपती को प्लेन से उतारा

नई दिल्ली।  पाकिस्तानी मूल के एक अमेरिकी दंपती को विमान से उतारने का मामला सामने आया है। इस मुस्लिम दंपती ने दावा किया कि उन्हें विमान से महज इसलिए उतार दिया गया क्योंकि उनके अल्लाह कहने, पसीने निकलने और फोन पर एसएमएस करने से विमानमें सवार क्रू की एक सदस्य असहज महसूस कर रही थी। यह घटना 26 जुलाई की है और यह कपल अपनी शादी की दसवीं सालगिरह मनाकर अमेरिका लौट रहा था।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नाजिया और फैसल अली ने डेल्टा एयरलाइंस पर आरोप लगाया कि पैरिस से ओहायो के सिनसिनाटी जाने के दौरान इस्लामोफोबिया के कारण उन्हें विमान से उतार दिया गया। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि डेल्टा एयरलाइंस के विमान में पैरिस से सिनसिनाटी जाने के लिए मुस्लिम दंपती अपनी सीट पर बैठ चुका था। सीट पर बैठने के बाद महिला ने अपने जूते उतार दिए और इसी दौरान उसने अपने अभिभावकों को एसएमएस भेजा। वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही थी और उसने हेडफोन लगा रखा था।द सिनसिनाटी इन्क्वायरर की खबर के अनुसार, विमान के एक क्रू सदस्य ने पायलट से शिकायत की थी कि वह मुस्लिम दंपती से असहज महसूस कर रही है। उसने पायलट से कहा कि महिला सिर पर स्कार्फ बांधे हुए है और फोन का इस्तेमाल कर रही है और व्यक्ति को पसीना आ रहा है। विमान एयरहोस्टेस ने यह भी दावा किया कि फैसल ने अपना फोन छिपाने का प्रयास किया और उसने दंपती को अल्लाह शब्द का इस्तेमाल करते सुना।

तीन साल के नन्हे फ़रिश्ते नें सिर्फ सुन कर ही कियापूरा क़ुरआन हिफ्ज़

तीन साल की उम्र में बच्चा ना सही से लिख सकता है और ना पढ़ सकता है भला इस उम्र में कोई किसी किताब को कैसे पूरी से याद कर सकता है। लेकिन अल्जीरिया के एक तीन साल से भी कम उम्र अब्दुल रहमान ने ये कारनामा कर दिया है। ताज्जुब करने वाली बात कि वो भी बच्चे ने सुन सुन के पुरे क़ुरआन का याद किया है अब्दुल रेहमान ने क़ुरआन को इतनी कम उम्र में हिफ़्ज़ करके पूरी दुनियामें एक रिकार्ड बनाया है। बच्चे का नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने जा रहा है।

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