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Tuesday, 6 September 2016

मुस्लिम नौजवानों ने किया एक हिन्दू का अंतिम संस्कार

ठाणे : महाराष्ट्र के मुम्ब्रा में कुछ मुस्लिम नौजवानों के एक ग्रुप ने ठाणे के नजदीक कौसा इलाके में सोमवार देर रात एक हिन्दू का अंतिम संस्कार किया.जानकारी के मुताबिक, वमन कदम (65 साल) का सोमवार को मौत हो गयी थी. उसके घर में बीवी कोछोड़ कर उसका अंतिम संस्कार करने के लिए कोई और सदस्य या रिश्तेदार मौजूद नहीं था. काफी देर इंतजार करने के बावजूद जब कोई नहीं आया तो ऐसे में आठ मुकामी नौजवानों ने खुद पहल करते हुए उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां की.इन नौजवानों ने अंतिम संस्कार के लिए जरूरी पारम्परिक सामान जैसे बांस, रस्सी, मटका, अगरबत्तियों के साथ-साथ कपड़ा और एक फूंस का आसान खरीदा. इसके बाद ये नौजवान लाश को सुबह तीन बजे एक श्मशान घाट ले गए और मृतक वमन कदम का अंतिम संस्कार कर दिया. अंतिम संस्कार करने वाले नौजवानों के नाम खलील पवने, फहद दबीर, नवाज दबीर, राहील दबीर, शबान खान, मकसूदखान, फारूख खान, मोहम्मद कसम शेख बताए गए हैं.जैसे ही मुकामी लोगों को इस काम की जानकारी मिली तो मुम्ब्रा कलवा के विधायक जितेन्द्र अवहाद ने एक फेसबुक पोस्ट पर उन्हें सैल्यूटकिया. इन नौजवानों के मानवता से पूर्ण इस कामकी मुस्लिम बहुल मुम्ब्रा के निवासियों ने भी तारीफ की है.

Sunday, 4 September 2016

हिन्दू लड़को ने मुस्लिम लड़कियो के हिजाब पहनने पर बेन लगाने के लिए अभियान चलाया।

मंगलुरु-शहर के डोक्टर शिवराम कारंथ सरकार स्कूल में 492 छात्र है जिसमे से सिर्फ चार मुस्लिम छात्र है और वही 15 मुस्लिम छात्राए हैलेकिन कॉलेज में आरएसएस से जुड़े 50 छात्रों ने कैंपस में हिजाब को बैन करने के लियें अभियान चलाया है जिसमे ये लड़के कॉलेज में भगवा शाल पहन के आते हैकॉलेज में चल रहे इस तरह के विरोध प्रदर्शन पर प्रिंसिपल चन्द्रशेखर ने कहा ये लड़के मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहन के कैंपस मेंआने पर बैन लगाने की मांग कर रहे है जिसके लियें इन्होने इस तरह का विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया हैउन्होंने कहा इन लडको ने और भी हिन्दू लडको से भगवा शाल पहने के आने को प्रेरित किया था लेकिन ज़्यादातर छात्रों ने अपने को इनके प्रदर्शन से अलग कर रखा हैकॉलेज प्रशासन का कहना है शाल कॉलेज यूनिफार्म का हिस्सा है कुछ मुस्लिम छात्राए इस शाल को हिजाब के तराह पहनती है अबये मामले सोसल मीडिया पे भी चर्चा का विषय बनगया है कुछ ने इन लडको की हिमायत की है वही ज्यादातर ने आरएसएस से जुड़े इन लडको की निंदा की ह

Friday, 2 September 2016

दहेज़ के खिलाफ खड़ी हुई एक ही परिवार की हिंदू और मुस्लिम बहुए

बिहार के समस्तीपुर में दो नवविवाहिताओं ने पुलिस के समक्ष आमरण अनशन शुरू कर दिया है। जिनका आरोप है कि उनके ससुराल वाले ने उन्हें दहेज न देने के कारण प्रताड़ित कर रहे थे और अब उन्हें घर से निकाल दिया। दोनों पीड़ित बहुयों जिनमें से एक हिंदू जिसका नाम सुरामला जोकि उजियारपुर की रहने वाली हैं औरदूसरी नाजमीन परवीन जोकि ताजपुर की रहने वाली हैं का कहना है इन दोनों की शादियां उनके बेटों के साथ पूरे रीति-रिवाजों से हुई थी लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ससुराल वालों ने इन्हें शादियों में दहेज़ न देने के कारण प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और आखिर में घर से बाहर निकल दिया। दोनों पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई है लेकिन जब थाने में एफआईआर दर्ज कराने के बाद भी इन्साफ नहीं मिला। उ वे दोनों पुलिस अधीक्षक के कार्यालयके सामने आमरण अनशन पर बैठ गई कि जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक हमलोग अनशन पर ही रहेंगे।

Thursday, 1 September 2016

मुसलमान है सबसे बेवकूफ कौम,आज के हालात इसी पागलपन का नतीजा है।

इस पोस्ट को करने का लेखक का साफ़ नाज़िरिया है,के वो मुस्लिम धर्म से फिरकापरस्तों को जड़ से मिटाने की इक कोशिश कर रहा है अगर आपको इस लेखक की बात समझ आती है तो कृपया करके इसपर अमल करे और अमन शांति को बढ़ावा दे।
हिंदुओं में सिर्फ़ 73 नहीं बल्कि हज़ारों फ़िरके मौजूद हैं मगर धर्म के आधार पर वो कभी नहीं लड़ते । सिखों में अकाली व निरंकारी कभीएक दूसरे के मतभेद के बावजूद नहीं लड़ते । दिगम्बर जैन और श्वेतामबर जैन दोनों समुदायों में बहुत ज़बरदस्त मतभेद है कि दिगम्बर मुनि नंगे रहते हैं और श्वेताम्बर सिर से पैर तक श्वेत वस्त्र धारण करते हैं, मगर क्या मजाल है कि अपने प्रवचनों के दौरानएक दूसरे की आलोचना करें या गालियों से नवाज़ें ।ईसाइयों में रोमन कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट फ़िरकों के बीच प्रारम्भ में कड़वाहट रही मगर जल्द ही दोनों को अक्ल आ गयी और उन्होंने लड़ना बंद कर दिया ।पूरी दुनियाँ  में सिर्फ़ मुसलमान ही ऐसी बेवकूफ कौम है जिसने अपने दीन की छोटी छोटी बातों पर बड़े बड़े विवाद खड़े किये और बेशुमारफ़िरके बना डाले। हर फ़िरका अपने आप में एक दीन बन गया और उसने सिर्फ़ खुद को मुसलमान और दूसरे फ़िरकों को काफ़िर समझना शुरू कर दिया।फेसबुक पर हमारा पेज लाइक करने की लिये, यहाँ क्लिक करे…जिस कौम का दीन एक रब  एक रसूल एक कुरआन एक  किबला एक हो फिर  भी हज़ारों तरह के मज़हबी झगड़े ? आखिर अल्लाह इन पागलों पर अपनी रहमतें क्यों नाज़िल फ़रमाये और क्यों न मुसीबत में डाले आज जो हालात पूरी दुनियाँ में मुसलमानों के हैं वो इसी पागलपन का नतीजा है ।अभी भी वक्त है कि मुसलमान सुधर जायें इस्लाम को मज़बूती से थाम लें और एक ठोस उम्मत बन जायें एंव पिछली बेवकूफ़ियाँ न दोहरायें।फेसबुक पर हमारा पेज लाइक करने की लिये, यहाँ क्लिक करे…


(ये लेखक के निजी विचार हैं ) DELHI UP LIVE की सहमति इसमें कोई मायने नहीं रखती।
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अयोध्या में मस्जिद बनवाने में हम करेंगे मुस्लिमो की मदद: महंत ज्ञानदास

अयोध्यामें दशकों से चले आ रहे विवाद के अब लगता है कि शान्ति से सुलझने के आसार लग रहे है। अयोध्या के हनुमानगढ़ी ट्रस्ट ने जर्जर मस्जिद की जमीन पर नई मस्जिद बनाने और वहां नमाज अदा करने की इजाजत दे दी है और बल्कि उसका खर्च भी ट्रस्ट ही करेगा भले ही मस्जिद वाले हिस्से पर अभी भी हनुमानगढ़ी का अधिकारहै।गौरतलब है कि बीते दिनों अयोध्या नगर पालिकाने आलमगिरी मस्जिद को जर्जर बताते हुए नोटिसलगा दिया था कि वहां जाना खतरे से खाली नहीं है। जिसके बाद मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि हनुमानगढ़ी मंदिर ट्रस्ट से मिले और महंत ज्ञान दास से मस्जिद की मरम्मत की गुजारिश की तो उन्होंने मस्जिद की मरम्मत और इसका पूरा खर्चा उठाने की बात कही और  प्रशासन को भी अनापत्ति प्रमाण-पत्र दे दिया है। महंत ज्ञान दास ने कहा है कि यह भी खुदा का घर है और यहां मुस्लिम भाइयों को नमाज अदा करने की सुविधा मिलनी ही चाहिए।

मध्यप्रदेश में बारिश से बेहाल लोग, कहीं पानी में जनाजा तो कहीं साइकिल पर जननी

मध्यप्रदेश में हो रही भारी बारिश से जनजीवनकुछ यूं अस्त-व्यस्त हुआ है कि कहीं जन्म तो कहीं मौत के चलते लोगों को बढ़ रहे पानी से आई मुसीबतों से दो-चार होना पड़ रहा है जिसके चलते कहीं पानी में तैरकर जनाजा ले जाया जाता है तो कहीं प्रसव के लिए जननी को साइकिलपर। कर्रापुर गांव के ईशाक अली की बेटी का बीमारी के चलते मौत होना और उसपर भारी बारिश के चलते सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि बांकरई नदी के पर बने कब्रिस्तान तक बेटी का जनाजा कैसे ले जाया जाए। इस गांव नदी पर करने के लिए पुल के न होने से कब्रिस्तान का रास्ता जोखिम भरा रहता है। जिस कारण जनाजे को नदी में तैरकर उस पार बने कब्रिस्तान में ले जाया जाता है। इस बार भी ईशाक अली की बेटी को लोग तैरकर कब्रिस्तान तक ले गए। बावजूद इसकेवहां के विधायक लारिया का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है, जबकि वे 8 साल से विधायक हैं। नाराजगांववालों ने जब लारिया से मुलाकात की तो विधायक ने गांव और मुस्लिम समाज के लोगों को आश्वासन दिया कि इस परेशानी का हल जल्दी ही किया जाएगा।दूसरा मामला है छतरपुर के बक्सवाहा का। जहांएक नई जान को दुनिया में लाने के लिए जननी को अपनी जान को दांव पर लगाने की नौबत आई। दरअसल, यहां जननी वाहन को ठेकेदार ने बंद कर दिया है। जिससे पिछले महीने से ही यह हालात बने हुए है। पार्वती जो अपने मायके शहपुरा आई थी। अचानक प्रसव पीड़ा बढ़ने पर उसके पिता नन्हेभाई आदिवासी ने जब जननी एक्सप्रेस पर फोन लगाया तो पाया कि पिछले एक महीने से जननीठेकेदार द्वारा बंद करने के कारण सेवा में नहीं है और 108 पर फोन लगाने पर पता चला कि वो कहीं कॉल पर गई है। बेटी को तड़पता देख नन्हेभाई उसे साइकिल पर पीछे बैठाकर पैदल हीचल पड़े। साइकिल के सहारे पिता 6 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले आया, जहां पार्वती ने एक बेटे को जन्म दिया और पिता की सूझबूझ से जच्चा और बच्चा दोनों की जान बच गई।

हिन्दू धर्म के लोगों को छोड़ बाकी सब बच्चे पैदा करने में लगे हैं: गिरीराजसिंह

झारखंड के दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम में पूजा करने पहुंचे बीजेपी मंत्री गिरीराज सिंह ने हिंदुओं पर टिप्पणी करते हुए पार्टीकी मुसीबतें बढ़ा दी हैं। गिरीराज ने ब्यान दिया है कि देश में रह रहे हिंदुओं की जनसंख्या लगातार घटती जा रही है वहीं दूसरे समुदाय अपनी जनसंख्या बढाने में लगे हुए हैं। अगर ये सिलसिला यूं ही चलता रहा तो मंदिरों में भगवान की पूजा करने कौन आएगा। हिंदुओं के लगातार कम हो जनसँख्या पर हमें एक कड़ा कानून बनाने की जरूरत है। इस कानून में सभी समुदाय के लोगों के लिए दो बच्चों कोही रखने की आजादी होनी चाहिए क्योंकि देश के विकास और सामाजिक समरसता के लिए जनसंख्या कोकंट्रोल करना बहुत जरूरी है।मुस्लिम समुदाय पर निशाना साधते हुए गिरिराज बोले कि मस्जिदों से जब भारत विरोधीनारे लगते हैं तब असहिष्णुता की बात करने वाले कहां चले जाते हैं। जब देश में आतंकी हमले होते हैं, कश्मीर में पत्थरबाजी होती है तब कोई क्यों नहीं बोल रहा।

विवादित बयान:पवित्र गाय सिर्फ हिन्दू की माँ नहीं बल्कि मुस्लिम की भी माँ है:शंकराचार्य

हरिद्वार -द्वारकाशारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने एक विवादित बयान दिया है उन्होंने कहा है कि पवित्र गाय सिर्फ हिन्दू की माँ ही नही है बल्कि मुस्लिमो की भी माँ है उन्होंने कहा कि गाय का दूध किसी और जानवर के मुकाबले ज्यादा लाभदायक हैउनका कहना है हिन्दू और मुस्लिम दोनों गाय से प्रोटीन लेते है इसलियें ये दोनों की माँ हुयी .उन्होंने कहा कि गौ हत्या के खिलाफ बनेकानून सही है कई बार कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याची गये लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हर बार ऐसी याचिका को रद्द कर दिया, कहा गाय के दूध के अलावा इसका मूत्र स्किन और हड्डी की बिमारी का अचूक इलाज़ है उन्होंने कहा कि गौ हत्या के ऊपर सज़ाके साथ इसके मॉस को बेचने वालो को भी सज़ा होनी चाहिए .https://m.facebook.com/Raziyaparveen7290/

Saturday, 27 August 2016

गुजरात के दोगलेपन को जड़ से खत्म करेगी दलित मुस्लिम एकता।

भूमि अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई इस देश की लड़ाई – जिग्नेश मेवाणीयूपी में गूंजा ‘गाय की पूंछ तुम रखो, हमको हमारी जमीन दो’लखनऊ 26 अगस्त 2016। ऊना, गुजरात में गौरक्षकों द्वारा दलितों की पिटाई के बाद ‘गाय की पूंछ तुम रखो, हमको हमारी जमीन दो’ के नारे के साथ पूरे देश में दलित अत्याचारों के खिलाफ आवाज बने जिग्नेश मेवाणी ने यूपी प्रेस क्लब में ऐलान किया कि भूमि अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई इस देश की लड़ाई होगी।गुजरात से आए ऊना दलित अत्याचार लड़त समिति के संयोजक जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि पूरे देश में एक संघर्ष का मंच बनाना चाहते हैं जोगुजरात, यूपी ही नहीं पूरे देश में दलितों केलिए जमीन के सवाल पर आंदोलन खड़ा कर सके। जो दलित आंदोलन सिर्फ अस्मिता की राजनीति में फस गया है उसको अपने अस्तित्व बोध के साथ खड़ाहोना होगा। उन्होंने ऊना से शुरु हुए आंदोलनका जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से ऊना में जिलाधिकारी कार्यालय पर मृत पशुओं को ले जाकर छोड़ दिया गया उसने साफ किया कि दलित अब पिटेगा नहीं वह अपने अधिकारों के लिए लड़ेगा।सिर्फ रोटी, कपड़ा, मकान की राजनीति नहीं बल्कि अब स्वाभिमान की राजनीति भी होगी। यह लड़ाई हम तभी जीत पाएंगे जब जाति व्यवस्था द्वारा थोपे गए अमानवीय कार्यों को छोड़ देंगे। इसलिए हमनें अहमदबाद में ‘गाय की पूंछ तुम रखो, हमको हमारी जमीन दो’ का नारा देते हुए बीस हजार दलितों के साथ शपथ की कि वे हम ऐसे घृणित कार्य नहीं करेंगे। यह दलित आंदोलन की ऐतिहासिक घटना है, जिसका सपना बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने देखा था। इस आंदोलन को हम पूरे देश में गैर बराबरी को स्थापित करने वाले जमीन के मालिकाना हक के मुद्दे से जोड़ना चाहते हैं। हमने गुजरात मेंमांग की है कि हर दलित परिवार को पांच-पांच एकड़ जमीन दी जाए। इसको गुजरात समेत पूरे देश में ले जाना है। यदि 15 सितंबर तक जमीन वितरण, आरक्षण सवाल पर गुजरात सरकार कार्रवाई करती नहीं नजर आएगी तो हम दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों, मजदूरों के यूनियन के साथ या तो जेल भरेंगे या तो रेल रोको आंदोलन करेंगे। इसी संदर्भ में हम पूरे देश में समर्थन मांग रहे हैं। ‘गाय की पूंछ तुम रखो, हमको हमारी जमीन दो’ का नारा पूरे देश में ले जाकर भूमि के सवाल को दलित राजनीति कोकेन्द्र में लाना है जो आपके यूपी में भी दलितों का प्रमुख एजेण्डा है। जिग्नेश ने कहा कि यूपी भी जिस तरह दलित-मुसलमान उत्पीड़न का अड्डा है यहां भी हम हक-हुकूक और इंसाफ के लिए संघर्षरत जमात के साथ खड़े होकर सांप्रदायिक-सामंती मंसूबों को ध्वस्त करेंगे।संघ पोषित बीएचयू के कुलपति द्वारा आईआईटी से निकाले गए मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित सोशलिस्ट पार्टी के उपाध्यक्ष संदीप पाण्डेय ने कहा कि ऊना में जो दलित अस्मिता यात्रा निकली थी उसमें यह मांग उठी थी कि मृतक गायों को अब दलित नहीं उठाएंगे। जब रोटी बनाने की मशीन बना ली गई है, रोबोट से आपरेशन हो रहा है और हर मुश्किल काम हो रहा है तो मृतक गायों को हटाने के लिए मशीन क्योंनहीं। गुजरात में एक विज्ञापन निकला था जिसमें सीवर की सफाई के लिए सवर्ण की आरक्षित सीट लिख दिए जाने पर लोग नाराज हो गएइससे समझा जा सकता है कि सीवर में घुसकर काम करना कितना मुश्किल व अपमानजनक है। जिग्नेश और इनके साथी जो आंदोलन चला रहे हैं उसमें दलितों को ही नहीं समूचे उत्पीड़ित समाज को मजबूती से भाग लेना चाहिए और अपने बच्चों की शिक्षा के लिए लड़ना चाहिए।कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि आज गुजरात का बेटा जिग्नेश मेवाणी हमारे बीच में हैं जिसने मोदी के गुजरात माॅडल को पूरे दुनिया में बेनकाब कर दिया जहां दलितों को इंसान नहीं समझा जाता। पूरी दुनिया ने 2002में गुजरात की माओं के गर्भ को चीरकर नवजातों को त्रिशूल में टंगा हुआ देखा और आज उसी गुजरात के दलित भाइयों के साथ लगातार हो रही नाइंसाफियों के खिलाफ दलित-मुस्लिम एकता का जो नया गुजरात माॅडल विकसित हो रहा है वह पूरे देश की राजनीति को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि कोई औपनिवेशिक उदारीकरण के विकास का माॅडल इस देश में शोषितों-वंचितों को मुक्ति नहीं देगा बल्कि इंसाफ के सवाल पर जिग्नेश मेवाणी जैसे नौजवानों का नेतृत्व ही एक नए भारत का निर्माण करेगा।कार्यक्रम के शुरुआत में आधार वक्तव्य देते हुए रिहाई मंच नेता अनिल यादव ने सामाजिक न्याय की नई धारा के इस नेतृत्व पर बात रखी तो वहीं सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता अजय शर्मा ने यूपी में दलितों के भूमि व लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन पर अपनी बात रखी।जिग्नेश मेवाणी को अमित अंबेडकर, लवलेश चैधरी, गुफरान सिद्दीकी, लक्ष्मण प्रसाद, शकील कुरैशी, राॅबिन, शबरोज मोहम्मदी, शम्स तबरेज, महेश चन्द्र देवा, मौलाना अबू अशरफ, आरिफ मासूमी आदि ने माल्यार्पण कर यूपी आगमनपर स्वागत किया।कार्यक्रम का संचालन रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने किया। कार्यक्रम में सृजन योगी आदियोग, एहसानुल हक मलिक, बलवंत यादव, कल्पनापाण्डेय, शरद पटेल, हफीज किद्वई, इन्द्र प्रकाश बौद्ध, लाल प्रकाश राही, विनोद यादव, रफत फातिमा, हफीज उल्लाह, हादी खान, रफीउद्दीन, सत्यम वर्मा, सद्दाम अहमद, कमर सीतापुरी, रुपेश, इनायत उल्लाह खान, यावर अब्बास, वीरेन्द्र गुप्ता आदि ने शिरकत की।

Wednesday, 24 August 2016

यहाँ देखिये पंडित आचार्य संजय दिवेदी का इस्लाम अपनाने की वजह

नई दिल्ली।  कभी भी छिपाया नहीं जा सकता, कभी भी मिटाया नहीं जा सकता, अल्लाह ने अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सअव के ज़रिये तमाम कायनात की कामयाबी के लिए दीन-ए-इस्लाम को कायम किया और अपना कलाम क़ुरआन भेजा ताकि इन्सान हिदायत पा सकें और उससे क़यामत तक फायदा उठा सकें। इस्लाम मज़हब हक़ है, लोगों के गुमान और इलज़ाम कि इस्लाम तलवार या ताक़त से फैला है उनकी ही तरह झूठ और सरासर झूठ है। भारत में सबसे ज़्यादा ऊँची ज़ात के लोगों ने इस्लाम क़ुबूल किया अगर ताकत से फैला होता तो कमज़ोर, ग़रीब और पिछड़े समाज के लोगों की संख्या अधिक होना चाहिए थी।

यहाँ देखिये पंडित आचार्य संजय दिवेदी का इस्लाम अपनाने
का किस्सा
http://www.upuklive.com/2016/08/acharya-sanjay-dwiwedi-accept-islam.html

Monday, 15 August 2016

KFC का चिकन है मुसलमानो के लिए हराम:दरगाह आला हज़रत।

बरेली।  दरगाह आला हजरत बरेली ने KFC रेस्टोरेंट के चिकन को हराम करार दिया है. दरगाह के प्रवक्ता और मुफ्ती ने मुसलमानों को केएफसी का नॉनवेज खाने से बचने की हिदायत दी है। कंपनी के रेस्टोरेंटों में हलाल नॉनवेज न देने का मामला सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद उलेमा नेयह फतवा जारी किया है।  दरगाह आला हजरत के मुफ्ती सलीम नूरी ने बताया कि जानकारी मिली है कि केएफसी में नॉनवेज के नाम पर मुसलमानों को बिना हलाल का चिकन दिया जा रहा है. शरीयत के हिसाब से ऐसे नॉनवेज खाना हराम है. इसलिए मुसलमानों को ऐसे नॉनवेज से बचना चाहिए।

मस्जिदों से भी नहीं अछूता रही योमे आज़ादी,लाऊड स्पीकर पर दी गयी मुबारकबाद।

आगरा।तंजीम उलेमा अहले सुन्नत की पहल के बाद शहर की सभी मस्जिदों से यौमे आजादी (स्वतंत्रता दिवस) की मुबारकबाद दी गई। फज्र की नमाज के बाद मस्जिदोंसे लाउडस्पीकर्स से यौमे आज़ादी की सभी को मुबारकबाद पेश की गई। मुफ्ती मुदस्सिर खान, मौलानामसरूर रज़ा कादरी, हाफिज आलम, मौलाना अब्दुल रहमान कादरी, हाफिज रियासत इस मुहिम में शामिल रहे। शहर की तमाम मस्जिदों व मदरसों में तिरंगा फहराया गया।  कई मदरसों की ओर से रैली भी निकाली गयी।

बुरखा पेहेन कर मुस्लिम महिलाओ ने उठाई कावर, नारे भी लगाये।

इंदौर।मध्यप्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में श्रावण मास के मौके पर रविवार को निकली साझा संस्कृति कांवड़ यात्रा में सांप्रदायिक सद्भाव की झलक देखने को मिली। इस कांवड़ यात्रा में हिंदूपुरुष-महिलाओं के साथ जयकारों में बुर्का पहने मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुईं।इंदौर में साझा संस्कृति कांवड़ यात्रा रविवार कोलगातार दूसरी बार निकाली गई, यहां कांवड़ यात्रा रविवार की दोपहर को गांधी हॉल क्षेत्र से पूरे धार्मिक पूजन पाठ के बाद शुरू हुई। इस कांवड़ यात्रा के दौरान गीतों पर लोग थिरक भी रहे थे। इस यात्रा में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बुर्के पहने और कंधे पर कांवड़ रखकर चल रही महिलाएं थीं।

Saturday, 13 August 2016

जबरदस्ती होती है हिन्दू लड़कियो की शादी,कराया जाता है इस्लाम कबुल।

नई दिल्ली।  पाकिस्तान की 20 करोड़ की आबादी में सिर्फ 10 फीसदी गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं. जिसमें से ज्यादातर हिंदू हैं. पाकिस्तान सरकार और फौज के लिए वहां के हिंदू किसी जानवर की तरह हैं. जिन पर जुल्म ढाने में पाकिस्तान अपनी शान समझता है। आजतक की एक खबर के मुताबिक गुरुवार को पाकिस्तान में अल्पसंख्यक दिवस मनाया गया. तो पाकिस्तान के हर शहर में हिंदू आबादी सड़कों पर उतर आई. और खुद पर हो रहीं ज्यादतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने लगी. प्रदर्शनों में हिंदू आबादी का दर्द फूट पड़ा,पाकिस्तान की गली-गली और शहर शहर में इन दिनों हिंदुओं का गुस्सा उबाल पर है. इस गुस्से के केंद्र बिंदु में हैं पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के पूर्व सांसद पीर अब्दुल हक. जिन्हें पाकिस्तान में मियां मिट्ठू के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक माना जाता है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के धर्म परिवर्तन का ठेका इन्ही मियां मिट्ठू ने उठाया हुआ है. मियां मिट्ठू को हिंदुओं और खासकर हिंदू लड़कियों का अपहरण करवाकरउनका जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाने में महारत हासिल है. उनके खिलाफ 117 मामले दर्ज हैं। मियां मिट्ठू जैसे लोग कैसे पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं. उसकी असलियत खुद वहां की मीडिया दुनिया के सामने लाती आई है. पाकिस्तान में हिंदू होना और उसपर भी हिंदू लड़की होना कितना बड़ा खतरा है, ये किसी से छिपा नहीं है. पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी ने एक निजी चैनल से बात करते हुए बताया की अगर मुल्ला का बस चले तो ये जानवरों को भीइस्लाम कुबूल करवा दें. इनकी कट्टरता की वजह से ही पाकिस्तान पूरी दुनिया में बदनाम हो रहा है।

Friday, 12 August 2016

प्यार के खुमार में अपनाया इस्लाम, इस तरह हुई घर वापसी

दरअसल पीड़ित लड़की युवती पश्चिम बंगाल के अलीपुर की रहने वाली है.  पूनम अरहा है. प्रदेश १८ की रिपोर्ट के अनुसार युवती पूनम को अलीगढ़ के युवक शादाब से फेसबुक से दोस्ती हुई. उसके बाद शादाब ने अपनापन दिखाकर उसे अलीगढ़ बुला लिया. शादाब के दबाव में आकर उसने इस्लाम अपना लिया और शादी कर ली.इतना ही नहीं शादाब ने पूनम का नाम बदल कर जरीन कर दिया. लेकिन शादी के बाद पूनम को पता चला कि उससे क्या गलती हुई है. शादाब उस पर तरह-तरह के अत्याचारकरने लगा. जब पूनम ने साथ छोड़ना चाहा तो कमरे में बंद कर बंधक बना लिया.पूनम की जिंदगी नरक बन चुकी थी. इज्जत आबरू के साथ-साथ उसकी पहचान भी खो गई थी. किसी तरह पूनम शादाब के चुंगुल से छूटी तो आर्य समाज मंदिर पहुंचकर अखिल भारत हिन्दू महासभा के संपर्क में आई. हिन्दू महासभा के लोगों ने अचल ताल स्थित आर्य समाज मंदिर में हवन यज्ञ कराकर पूनम का शुद्धिकरण कराया और यज्ञोपवित जनेऊ धारण कराया.घर वापसी कार्यक्रम कराने के बाद पुलिस और एलआईयू के लोग पहुंच गए. पूनम और हिन्दू महासभा को रोक कर पूछताछ की. आर्य समाज मंदिर में थाना गांधी पार्क पुलिस फोर्स ने पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया. वहीं पूनम ने अपनी जान को खतरा बताया है और कहा है कि उसके साथ धोखा किया गया विश्वासघात किया गया. उसे जबरन इस्लाम ग्रहण कराया गया था.

अब भगवान पर नही रहा भरोसा, घर से हटाई देवी-देवताओं की मूर्तिया

तीन साल पहले उत्तराखंड में आई तबाही में लापता हुए इलाहाबाद के विपिन भारती भी उन बदनसीबों में शामिल हैं, जिनका आज तक कोई पता नहीं चल सका है। बचपन में ही माँ- बाप की मौत के बाद छोटे भाई- बहनोंके लिए दिन- रात पसीना बहाने वाले विपिन के लापता होते ही उसके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। पैसों के अभाव में पहले एक बहन की शादी टूटी, फिर छोटे भाई की पढ़ाई बंद हुई और अब तो बीमार बहन का इलाज भी नहीं हो पा रहा है। तीन साल बीत गए हैं, लेकिन सरकारी मदद के तौर पर विपिन के परिवार वालोंको अब तक फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई है। क़ौमी रिपोर्टर के अनुसार इस हादसे के बाद विपिन के छोटेभाई – बहनों को अपनी तकदीर से इस कदर शिकायत हो गई है कि इन्होने भगवान की पूजा- अर्चना बंद कर घर मेंरखी देवी- देवताओं की मूर्तियों को भी हटा दिया है।इलाहाबाद के इस परिवार के आंसू पिछले तीन साल से थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक तरफ लापता भाई की जुदाई का ग़म है तो दूसरी तरफ पेट भरने और आगे की ज़िंदगी बसर करने की फ़िक्र। टैक्सी चलाकर परिवार का पेट पालने वाला विपिन अपने छोटे भाई और दोनों बहनों के लिए भगवान की तरह था। विपिन इन तीनों का बड़ा भाई तो था ही, पर उसने अपने लाड- प्यार और परवरिश से इन्हे कभी माँ- बाप की कमी नहीं महसूस होने दी। भाई- बहनो की परवरिश में कोई कमी न रह जाए,इसके लिए विपिन ने अपनी शादी नहीं की थी।उत्तराखंड की तबाही में गुम होने से पहले विपिन नेछोटी बहन मोनी का ब्याह तय कर दिया था, भाई मनीष का बीएससी में एडमिशन करा दिया था और लखनऊ के एक अस्पताल में दूसरी बहन सोनी का इलाज शुरू कर दिया था। बहन की शादी वह खूब धूमधाम से करना चाहता था, इसीलिये उसने कई महीने पहले ही गेस्ट हाउस बुक कर शादी का कार्ड भी खरीद लिया था। उत्तराखंड के टूर से लौटते ही उसे बहन की शादी का लाल जोड़ा खरीदना था।बहन की शादी और उसका इलाज है चुनौती: विपिन की याद में बहन सोनी की तबीयत और खराब होने लगी, लेकिन पैसों की कमी के चलते फेफड़ों का इलाज बीच में ही बंद करना पड़ा। उत्तराखंड से लेकर यूपी और तत्कालीन केंद्र सरकार ने पीड़ित परिवारों को लाखों रूपये की मदद करने का एलान किया था, लेकिन विपिन के परिवार को अभी फूटी कौड़ी भी नहीं नसीब हुई है। परिवार एक – एक पैसे को तरस रहा है। महीने भर पहले रिश्तेदारों ने किसी तरह मोनी की शादी कर दी है, लेकिन छोटी बहन सोनी का इलाज और उसकी शादी कैसे होगी, यह अब भी सवाल बना हुआ है।पूजा – पाठ बंद, घर से हटाई देवी – देवताओं की मूर्तियां: तीनो भाई- बहन के आंसू थमने का नाम नहीं लेते, लेकिन तीनो इस मुश्किल घड़ी में एक – दूसरे का सहारा बने रहते हैं। सोनी- मोनी और मनीष तीनों को ही अपनी तकदीर से बड़ी शिकायत है। उनका मानना है कि भगवान ने उनके भाई और परिवार पर कोई कृपा क्यों नहीं की। विपिन को भगवान की तरह मानने वाले तीनो भाई- बहन का इस कदर कुदरत से भरोसा उठ गया है कि उन्होंने अब न सिर्फ पूजा- अर्चना और ईश्वर की आराधना बंद कर दी है, बल्कि घर में रखी देवी – देवताओं की मूर्ति को भी हटा दिया है।

Wednesday, 10 August 2016

इक पंडित ने लिख डाली अपने खून से कुरआन शरीफ।

हरियाणा के रोहतक जिले के निंदाना गांव के रहने वाले पंडित कर्मवीर कौशिक ने अपने खून से कुरान और गीता लिखी हैं. लगभग 7 साल में 369 पन्नोंमें कुरान और लगभग तीन साल में 186 पन्नों की श्रीमद्भगवत गीता लिख कर देश को एकता का सन्देश दिया हैं.कर्मवीर ने बताया कि उन्होंने एक मोरपंख से दोनों ग्रंथ को लिखा है. सुई चुभाकर अंगुली से खून निकालकर पीपल के पत्ते पर खून एकत्रित करके मोरपंख से कागज पर लिखकर दोनों ग्रंथ को पूरे किए. उन्होंने 30 दिसंबर 2015 को अपने जन्मदिन पर कुरान-ए-शरीफ को पूरा किया.पंडित कर्मवीर बताते हैं कि बीते वर्ष हरिद्वार में उन्हें एक अंग्रेजने उनकी पांडुलिपियों के लिए 5 करोड़ रुपए देने का ऑफर किया था, मगर वह किसीभी कीमत पर ऐसा नहीं कर सकते.उनका कहना है कि वे पैसे के लिए यह काम नहीं कर रहे हैं। समाज और धार्मिकसद्भावना के लिए उनका यह प्रयास है.  हालांकि कर्मवीर आर्थिक रुप से बहुत कमजोर है, लेकिन इसके बाद भी उन्होंनेयह पांडुलिपि नहीं बेची.

Tuesday, 9 August 2016

ताजमहल या तेजोमहालय... क्या है हकीकत?

सोशल मीडिया पर ताजमहल के हिन्दू इमारत होने संबंधी पोस्ट काफी शेयर की जा रही हैं। दरअसल यह मामला उस वक्त उठा जब ‘ताजमहल- सत्यकथा’ नामक पुस्तक का प्रकाशन हुआ। आइये आपको बताते हैं किसने लिखी यह किताब और ताजमहल को हिन्दू इमारत बताने के लिए क्या तर्क दिए गए हैं।ओक ने लिखी थी किताबपुरूषोत्तम नागेश ओक का जन्म उन्हीं की एक पुस्तक में दिए परिचय अनुसार इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था। श्री ओक ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय इंडियननेशनल आर्मी में प्रविष्टि ली, जिसके द्वारा इन्होंने जापानियों के संग अंग्रेज़ों से लड़ाई कीथी। इन्होंने कला में स्नातकोत्तर (एम०ए०) एवं विधि स्नातक (एलएल०बी०) की डिग्रियाँ मुंबई विश्वविद्यालय से ली थीं। सन 1947 से 1953 तक वेहिंदुस्तान टाइम्स एवं द स्टेट्समैन जैसे समाचार पत्रों के रिपोर्टर रहे। 1953 से 1957 तक इन्होंने भारतीय केन्द्रीय रेडियो एवं जन मंत्रालय में कार्य किया। 1957 से 1959 तक उन्होंने भारत के अमरीकी दूतावास में कार्य किया।2007 में हो चुकी है मृत्युश्री ओक की मृत्यु 7 दिसम्बर 2007 को हो गयी। उन्हें पीएन ओक के नाम से भी जाना जाता है।शाहजहां ने किया कब्जा, ताजमहल था शिव मंदिरअपनी पुस्तक ताजमहल: सत्य कथा में, ओक ने यह दावा किया है, कि ताजमहल, मूलत: एक शिव मन्दिर या एक राजपूताना महल था, जिसे शाहजहां ने कब्ज़ा करके एक मकबरे में बदल दिया।ओक कहते हैं, कि कैसे सभी (अधिकांश) हिन्दू मूल की कश्मीर से कन्याकुमारी पर्यन्त इमारतों को किसी ना किसी मुस्लिम शासक या उसके दरबारियों के साथ, फेर-बदल करके या बिना फेरबदल के, जोड़ दिया गया है। उन्होंने हुमायुं का मकबरा, अकबर का मकबरा एवं एतमादुद्दौला के मकबरे, तथा अधिकांश भारतीय हिन्दू ऐतिहासिक इमारतों, यहाँ तक कि काबा, स्टोनहेन्ज व वैटिकन शहर तक हिन्दू मूल के बताये हैं। ओक का भारत में मुस्लिम स्थापत्य को नकारना, मराठी जग-प्रसिद्ध संस्कृति का अत्यन्त मुस्लिम विरोधी अंगों में से एक बताया गया है। के०एन०पणिक्कर ने ओक के भारतीय राष्ट्रवाद में कार्य को भारतीय इतिहास की साम्प्रदायिक समझ बताया है। तपन रायचौधरी के अनुसार, उन्हें संघ परिवार द्वारा आदरणीय इतिहासविद कहा गया है।ओक ने दावा किया है, कि ताज से हिन्दू अलंकरण एवं चिह्न हटा दिये गये हैं और जिन कक्षों में उन वस्तुओं एवं मूल मन्दिर के शिव लिंग को छुपाया गयाहै, उन्हें सील कर दिया गया है। साथ ही यह भी कि मुमताज महल को उसकी कब्र में दफनाया ही नहीं गया था।ताजमहल के हिन्दू शिवमन्दिर होने के पक्ष में ओक के तर्क*.पी०एन० ओक अपनी पुस्तक "ताजमहल ए हिन्दू टेम्पल" में सौ से भी अधिक कथित प्रमाण एवं तर्क देकर दावा करते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मन्दिर था जिसका असली नाम 'तेजोमहालय' हुआ करता था। ओक साहब यह भी मानते हैं कि इस मन्दिर को जयपुर के राजा मानसिंह (प्रथम) ने बनवाया था जिसे तोड़ कर ताजमहल बनवाया गया। इस सम्बन्ध में उनके निम्न तर्क विचारणीय हैं:*.किसी भी मुस्लिम इमारत के नाम के साथकभी महल शब्द प्रयोग नहीं हुआ है।*.'ताज' और 'महल' दोनों ही संस्कृत मूल के शब्द हैं।*.संगमरमर की सीढ़ियाँ चढ़ने के पहले जूते उतारने की परम्परा चली आ रही हैजैसी मन्दिरों में प्रवेश पर होती है जब कि सामान्यत: किसी मक़बरे में जाने के लिये जूता उतारना अनिवार्य नहीं होता।*.संगमरमर की जाली में 108 कलश चित्रित हैं तथा उसके ऊपर 108 कलश आरूढ़ हैं, हिंदू मन्दिर परम्परा में (भी) 108 की संख्या को पवित्र माना जाता है।*.ताजमहल शिव मन्दिर को इंगित करने वाले शब्द 'तेजोमहालय' शब्द का अपभ्रंश है। तेजोमहालय मन्दिर में अग्रेश्वर महादेव प्रतिष्ठित थे।*.ताज के दक्षिण में एक पुरानी पशुशाला है। वहाँ तेजोमहालय के पालतू गायों को बाँधा जाता था। मुस्लिम कब्र में गौशाला होना एक असंगत बात है।*.ताज के पश्चिमी छोर में लाल पत्थरों के अनेक उपभवन हैं जो कब्र की तामीर के सन्दर्भ में अनावश्यक हैं।*.संपूर्ण ताज परिसर में 400 से 500 कमरे तथा दीवारें हैं। कब्र जैसे स्थान में इतने सारे रिहाइशी कमरों का होना समझ से बाहर की बात है।कोर्ट में रद्द हो गयी थी याचिकाओक ने याचिका भी दायर की थी। जिसमें उन्होंने ताज को एक हिन्दू स्मारक घोषित करतने एवं कब्रों तथा सील्ड कक्षों को खोलने व देखने कि उनमें शिव लिंग या अन्य मंदिर के अवशेष हैं या नहीं की अपील की। सन 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने ओक की इस याचिका को रद्द कर दिया और साथ ही झिड़की भी दी थी कि उनके दिमाग में ताज के लिए कोई कीड़ा है।

जहाँ मुसलमान नही वहां हिन्दुओं की लड़ाई दलितों से ह

हिमांशु कुमारहिन्दु की लड़ाई मुसलमानों से है, जिस गांव में मुसलमान नहीं हैं वहां हिन्दुओं की लड़ाई दलितों से है, इसाई कैथोलिक कि लड़ाई प्रोटेस्टेंट से है, सुन्नी मुसलमान की लड़ाई शिया, अहमदिया से हैसूडान , अफ्रीकी देशों में कबीलों में लड़ाई है, जहाँ धर्म की लड़ाई नहीं है, वहां फुटबाल की टीमों के समर्थकों के बीच खूनी लड़ाई है.असल में गड़बड़ आपके अपने भीतर है. खुद को दूसरों से श्रेष्ठ और ऊँचा दिखाने का घमण्ड. आपके दिमाग में घुसा हुआ है. इसालिये आप को एक दुश्मन चाहिये. जिससे आप खुद को बेहतर ,श्रेष्ठ , ऊँचा और सही साबितकर सकेंआपकी इस बीमारी की वजह से दुनिया में खून खराबा है, युद्ध हिंसा दुख तबाही सब आपका पैदा किया हुआ है, जब आप अपने बच्चों को सिखाते हैं, दूसरों को पीछे कर के आगे निकलोतो आप यही सिखा रहे होते है कि तुम्हारे आस पास केलोग तुम्हारे साथी नही बल्कि दुश्मन हैंखुद ही समझिये आपने अपने जीवन को खुद ही कितना हिंसक और दुखी बना लिया हैहिमांशु कुमार की फेसबुक वाल से -सांकेतिक तस्वीर (क्रेडिट - गूगल डॉट कॉम)

अल-अज़हर विश्वविद्यालय में शिया और सुन्नी एकता केन्द्र की स्थापना

काहिरा।मिस्र के अल-अज़हर विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर शेख़ अहमद करीमा ने कहा है कि जारी महीने के अंत तक विश्वविद्यालय में शिया और सुन्नी मुसलमानों को निकट लाने के केन्द्र का औपचारिक रूप से उद्घाटन हो जाएगा।अल-अज़हर में धर्मशास्त्र के प्रोफ़ेसर करीमा ने बताया कि यह केन्द्र समस्त इस्लामी मतों के अनुयाईयों को निकट लाने विशेष रूप से शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच मतभेदों को दूर करने के प्रयास करेगा।उन्होंने कहा कि इस केन्द्र द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में न केवल मुसलमानों को आपस में निकट लाने का प्रयास किया जाएगा, बल्कि मुसलमानों और ईसाईयों के बीच एकता एवं आपसी समझ को बढ़ावा दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विश्व और इलाक़े में आले सऊद द्वारा प्रायोजित वहाबी एवं तकफ़ीरी विचारधारा के फैलने से मुसलमानों के बीच आपस में और अन्य धर्म के अनुयाईयों के साथ सौहार्द को बड़ाझटका लगा है और हिंसात्मक विचारों को बल मिला है। इस प्रकार के कट्टरपंथी विचारों का मुक़ाबला करनेके लिए ईरान और मिस्र जैसे देशों ने पहल की है।

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