इऩदिनों हिंदुस्तान में गोहत्या औऱ गौरक्षकों पर काफी बड़ी बहस और आंदोलन चल रहें हैं। गुजरात का ऊना हो या फिर राजस्थान, मध्यप्रदेश औऱ उत्तर प्रदेश जैसे राज्य जहाँ गोहत्या जैसे मामलों में सिर्फ शक के बिना पर गौरक्षकों का आंतक देखा जा रहा है।इतना ही नहीं केंद्र सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी को बाकायदा बिगड़ते माहौल को देखकर यह तक कहना पड़ा कि ,” गौरक्षक नहीं ये गुंडे है ! इसके अलावा दलितों को न मारों, मारना है तो मुझे मारों !इतना सब होते हुए भी लोकसभा में मंत्री साध्वी निरंजना ज्योति ने एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहाकि, ” सरकार देश के सामान्य क्षेत्र में 50 प्रतिशत औऱ दुर्गम क्षेत्र में 75 प्रतिशत की दर से पशुवधशाला की स्थापना औऱ आधुनिकीकरण के लिए अधिकतम 15 करोड़ की मदद करती है. पशुवधशाला यानि बूचड़खाना जहाँ से गोश्त दुनियाभर में भेजा जाता है। हिंदुस्तान में भी कई राज्य ऐसे है जहाँ गायों का कत्ल कर उनका मीट बाहर भेजा जाता है। इस जवाब से केंद्र सरकार औऱ उनके कई संगठनों की नीयत पर सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ सरकार गौरक्षकों के साथ खड़ी नजर आती है वहीँ दूसरी ओर बीफ निर्यात में अव्वल होने की दौ़ड़ मेंबूचड़खाना खोलने के लिए लोगों को प्रोत्साहित और बढ़ावा देती है।


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