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Thursday, 4 August 2016

इस देश में क्रांति की शुरुवात है दलित विध मुस्लिम का महमिलाप।


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लगता है जैसे इस मुद्दे को उठाने के बाद अब मुस्लिम दलित इक साथ इक मंच पर नज़र आने वाले है अगर ऐसा हुआ तो पहले उत्तर परदेश फिर पुरे भारत वर्ष में इक नए युग की क्रांति का अनावरण होने जा रहा है।
मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ के राष्ट्रीय महासचिव शुजात अली क़ादरी ने बहुत क्रांतिकारी आइडिया रखते हुए बताया कि एमएसओ‘वॉटर विद दलित’अभियान की आजसे शुरूआत करने जा रही है जिसमें हम दलितों के पास जाकर उनका जूठा पानी पिएंगे। क़ादरी ने कहाकि दरअसल दलितों और मुसलमानों पर अत्याचार की जिस नीति पर सरकार और उनके समर्थक कर रहे हैं उसका प्रतिरोध एकता से ही किया जा सकता है। इसके तहत एमएसओ हर शहर-गाँव में दलित बस्तियों में जाकर दलितों का जूठा पानी पीने का अभियान शुरू कर रहे हैं। इस अभियान की वीडियोभी बनाए जाएंगे जिन्हें सोशल मीडिया पर‘वॉटर विद दलित’के नाम पर प्रसारितकर हम ना सिर्फ़ दलितों के प्रति भाईचारे और इस्लाम के‘एक आदम की संतान’के संदेश को मज़बूत करेंगे बल्कि हम गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और देश के दूसरे राज्यों में दलितों पर संघपरस्त हिन्दू दक्षिणपंथियों के मंसूबों को मुँहतोड़ जवाब देंगे। शुजात अली क़ादरी ने विश्वास जताया कि पूरे भारत में क़रीब 10 हज़ार एमएसओ के सूफ़ी मुस्लिम विद्यार्थी दलितों को जूठा पानी पीकर‘वॉटर विद दलित’अभियान को कामयाब करेंगे और यह क्रम उत्तर प्रदेश में चुनाव तक चलता रहेगा ताकि जिस प्रकार आज़मगढ़ में मुसलमानों और दलितों के बीच ग़लतफ़हमी पैदा की गई, ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।बहुत क्रांतिकारी होगा‘वॉटर विद दलित’–इमरान रजवीपश्चिम बंगाल यूनिट के इमरान रजवी ने संगठन के महासचिव शुजात अली क़ादरी के‘वॉटर विद दलित’अभियान को शानदार और क्रांतिकारी आइडिया बताते हुए इस पर फ़ौरन अमल करने की सलाह दी। उन्होंने कहाकि इस्लामी मान्यता अनुसार सब बाबा आदम की संतान है और इसआधार पर जाति और धर्म के आधार पर मानवके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता लेकिन यह भी सत्य है कि समाज में यह भावना है। इसे समाप्त कर दलितों के साथ भाईचारा जताने के लिए शुजात अली क़ादरी ने जिस‘वॉटर विद दलित’अभियान का आइडिया दिया है वह भारत, मुसलमान, दलित, इस्लाम और समाज के हित में है।बाबासाहेब अंबेडकर ने दी धार्मिक स्वतंत्रता- हमदानीगुजरात प्रदेश की एमएसओ कार्यकर्ता अब्दुल कादिर हमदानी ने कहाकि बेशक भारत और पाकिस्तान के बँटवारे के बाद जो मुसलमान भारत में रुक गए उन्हें नहीं मालूम था कि भारत का संविधान कैसा होगा। लेकिन चूँकि मुसलमान जानते थे कि जिस संविधान की ज़िम्मेदारी बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के हाथों में है, वहाँ उन्हेंधार्मिक स्वतंत्रता अवश्य मिलेगी। मुसलमानों की उम्मीद को ही नहीं बल्कि देश के सभी अल्पसंख्यकों की उम्मीदों को बाबासाहेब ने पूरा किया।उन्होंने कहाकि पाकिस्तान साम्प्रदायिक आधार पर बना एक देश था जो फेल हो गया लेकिन बाबासाहेब के आइडिया पर भारत धर्म निरपेक्ष राज्य बना जिसमें दी गई धार्मिक स्वतंत्रतापर हमें गर्व है।इन मुद्दों पर भी हुई चर्चामुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे, दलित के साथ मिलकर कार्य करने के अलावा नौकरियो में आरक्षण, बढ़ता हुआ कट्टरवाद और जाकिर नाईक और वहाबी संस्थाओ पर प्रतिबंध लगाने आदि मुद्दों पर भी चर्चा की।



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