Header

Saturday, 6 August 2016

हजरत अली के हाथ से लिखी कुरआन का हुआ प्रदर्शन मोरेकको में।

रामपुर/नई दिल्ली।फेस्टीवल आॅफ इण्डिया 2016 केअन्तर्गत मोरक्को में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और भारतीय उच्चायोग, मोरक्को के सहयोग से चल रही रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की 41 दुर्लभ एवं प्राचीन कैलीग्राफियों के चित्रों की रबात में लगी प्रदर्शनी का समापन 1 अगस्त, 2016 को हो गया। अब यह प्रदर्शनी मोरोक्को के शहर कैसाब्लांका मेंदुनिया की सातवीं सबसे बड़ी मस्जिद हसन-प्प् में 4 अगस्त 2016 से प्रदर्शित की गई है, जिसका उद्घाटन मिस बाॅचरा जौहरी, लाइब्रेरियन, किंग हसन-प्प् मस्जिद पुस्तकालय, मोरक्को के कर-कमलों द्वारा किया गया। यह प्रदर्शनी 4 से 8 अगस्त 2016 तक प्रदर्शित की जायेगी। इस अवसर पर मिस बाॅचरा जौहरी, लाइब्रेरियन, किंग हसन-II मस्जिद पुस्तकालय, मोरक्को ने कहा कि पूरे विश्व भर में भारतीय संस्कृति बहुत प्रसिद्ध है। विश्व के बहुत रोचक और प्राचीन संस्कृति के रुप में इसको देखा जाता है। अलग-अलग धर्मों, परंपराओं, भोजन, वस्त्र इत्यादि से संबंधित लोग यहाँ रहते हैं। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोग यहाँ सामाजिक रुप से स्वतंत्र हैं। इसी वजह से धर्मों की विविधता में एकता के मजबूत संबंधों का यहाँ अस्तित्व है। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोगों के बीच की घनिष्ठता ने एक अनोखा देश “भारत“ बनाया है। साथ ही कहा कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की कैलीग्राफियाँ विश्व में एक अद्वितीय स्थान रखती हैं। उन्होंने रज़ा लाइब्रेरी का गुणगान करते हुए कहा कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी इण्डो-इस्लामिक शिक्षा और कला का ख़जाना है।इस अवसर पर रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की ओर से श्री सैयद तारिक़ अज़हर, वरिष्ठ तकनीकी रेस्टोरर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस्लामी समाज में उच्च कलाकारों के बीच में सुलेखकों का अपना एक स्थान है और यह स्थान उनकी कला-कुशलता एवं निपुणताकी श्रेष्ठता के आधार पर प्राप्त होता है। भारत में जीवन, इतिहास, कला और संस्कृति के स्वरूप को हमेशा मिश्रित और युग के आधार पर समग्र किया गया है। भारत की रचनात्मक प्रतिभा के इस अनूठे पहलू ने विश्व के विभिन्न देशों को प्रभावित किया है तथा भारत ने विश्व संस्कृति और अतीत में सभ्यता में काफी योगदान दिया है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। कहा कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी गौरवान्वित महसूस करती है कि लाइब्रेरी के संग्रह में लगभग 3000 दुर्लभ एवं प्राचीन कैलीग्राफियों के नमूने हैं। इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण सातवीं सदी में हज़रत अली (रजि0) के हाथ से लिखी कुरान शरीफ की प्रतिलिपि है। कैलीग्राफियों के चित्रों में 9वीं सदी के इमाम रज़ा द्वारा हाथ से कूफ़ी लिपि में लिखित कुरान का एक पेज का चित्र, 16वीं सदी के कुरान का पेज जिसे अकबर बादशाह ने सोने से सजवाया था और जिस पर अकबर के मंत्री फै़जी के हस्ताक्षर और मुहर है, 1887 ई0 की गुलाम रसूल की कैलीग्राफी,1871 ई0 की मिर्ज़ा मुहम्मद गुलाम खान की तोते, कबूतर और हंस के आकार के रुप मे सुन्दर कैलीग्राफी,1888 ई0 की मुहम्मद हसन कश्मीरी की कैलीग्राफी, 1878 ई0 की गुलाम रसूल की कैलीग्राफी, 18वीं सदी की मुहम्मद हसन की कैलीग्राफी जिसके बीच में बिस्मिलाह-अल-रहमान-निर-रहीम और दायीं और बायीं तरफ फ़ारसी भाषा की पंक्तियां लिखी हुई हैं, 1936 ई0 की दुल्लाह ख़ान ख़ुशरक़म रामपुरी की कैलीग्राफी, 18वीं सदी की मुहम्मद फजल-उर-रहमान खां की कैलीग्राफी, 18वीं सदी की मोहम्मद हसन की कैलीग्राफी और कुछ अरबी कैलीग्राफियों में पैगम्बर साहब (र0अ0व0) के रूप और सुन्दरता का वर्णन है इत्यादि को प्रदर्शित किया जा रहा है।  इस अवसर पर श्री हिमांशु सिंह, मीडिया प्रभारी, रामपुर रज़ा लाइब्रेरी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कैसाब्लांका शहर के विद्वान, शोधकर्ता एवं गणमान्य व्यक्ति और विभिन्न देशों के दूत भी उपस्थित रहे।

No comments:

Post a Comment

Comments system

Disqus Shortname

My site