लखनऊ। हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास जी महाराज ने कहा कि प्रभु राम जब चाहेंगे, अयोध्या में उनका मंदिर बन जाएगा। हमें खून के दाग से बना राम मंदिर नहीं चाहिए।उन्होंने खुलासा किया कि बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी और हम आपसी बातचीत से अयोध्या विवाद के हल के लिए तैयार हो गए लेकिन दुकान बंद हो जाने के डर से विश्व हिंदू परिषद ने इसे परवान नहीं चढ़ने दिया।अयोध्या में भजन संध्या स्थल के शिलान्यास समारोहमें लखनऊ के कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री निवास आए महंत ज्ञान दास ने विहिप पर जमकर निशाना साधा। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि राम मंदिर के नाम पर कुछ लोग देश भर में दुकान चला रहे हैं, राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। साधु समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।हमें ऐसा राम मंदिर नहीं चाहिए जो खून के दाग से बने, हम दूध से बनने वाला मंदिर चाहिए। कुछ लोग कहते हैं अयोध्या में राम मंदिर नहीं बन पाएगा।
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Saturday, 6 August 2016
ए सियासत वालो जान हमने भी गंवाई है वतन की ख़ातिर...
लखनऊ। 'कुछ लोगों' की वजह से पूरी मुस्लिम क़ौम को शक की नज़र से देखा जाने लगा है... इसके लिए जागरूक मुसलमानों को आगे आना होगा... और उन बातों से परहेज़ करना होगा जो मुसलमानों के प्रति 'संदेह' पैदा करती हैं... कोई कितना ही झुठला ले, लेकिन यह हक़ीक़त है कि हिन्दुस्तान के मुसलमानों ने भी देश के लिए अपना खू़न और पसीना बहाया है. हिन्दुस्तान मुसलमानों को भी उतना ही अज़ीज़ है, जितना किसी और को... यही पहला और आख़िरी सच है... अब यह मुसलमानों का फ़र्ज़ है कि वो इस सच को 'सच' रहने देते हैं... या फिर 'झूठा' साबित करते हैं...इस देश के लिए मुसलमानों ने अपना जो योगदान दिया है, उसे किसी भी हालत में नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता. कितने ही शहीद ऐसे हैं, जिन्होंने देश के लिएअपनी जान तक कु़र्बान कर दी, लेकिन उन्हें कोई याद तक नहीं करता. हैरत की बात यह है कि सरकार भी उनका नाम तक नहीं लेती. इस हालात के लिए मुस्लिम संगठन भी कम ज़िम्मेदार नहीं हैं. वे भी अपनी क़ौम और वतनसे शहीदों को याद नहीं करते.हमारा इतिहास मुसलमान शहीदों की कु़र्बानियों से भरा पड़ा है. मसलन, बाबर और राणा सांगा की लड़ाई में हसन मेवाती ने राणा की ओर से अपने अनेक सैनिकों के साथ युध्द में हिस्सा लिया था. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की दो मुस्लिम सहेलियों मोतीबाई और जूही ने आख़िरी सांस तक उनका साथ निभाया था. रानी के तोपची कुंवर गु़लाम गोंसाई ख़ान ने झांसी की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहूति दी थी. कश्मीर के राजा जैनुल आबदीन ने अपने राज्य से पलायन कर गए हिन्दुओं को वापस बुलाया और उपनिषदों के कुछ भाग का फ़ारसी में अनुवाद कराया. दक्षिण भारत के शासक इब्राहिम आदिल शाह द्वितीय ने सरस्वती वंदना के गीत लिखे. सुल्तान नाज़िर शाहऔर सुल्तान हुसैन शाह ने महाभारत और भागवत पुराण का बंगाली में अनुवाद कराया. शाहजहां के बड़े बेटेदारा शिकोह ने श्रीमद्भागवत और गीता का फ़ारसी में अनुवाद कराया और गीता के संदेश को दुनियाभर में फैलाया.गोस्वामी तुलसीदास को रामचरित् मानस लिखने की प्रेरणा कृष्णभक्त अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना से मिली. तुलसीदास रात को मस्जिद में ही सोते थे. 'जय हिन्द' का नारा सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फ़ौज के कप्तान आबिद हसन ने 1942 में दिया था, जो आज तक भारतीयों के लिए एक मंत्र के समान है. यह नारा नेताजी को फ़ौज में सर्वअभिनंदन भी था.छत्रपति शिवाजी की सेना और नौसेना के बेड़े में एडमिरल दौलत ख़ान और उनके निजी सचिव भी मुसलमान थे. शिवाजी को आगरे के क़िले से कांवड़ के ज़रिये क़ैद से आज़ाद कराने वाला व्यक्ति भी मुसलमान ही था. भारत की आज़ादी के लिए 1857 में हुए प्रथम गृहयुध्द में रानी लक्ष्मीबाई की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उनके पठान सेनापतियों जनरल गुलाम ग़ौस ख़ान और ख़ुदादा ख़ान की थी. इन दोनों ही शूरवीरों ने झांसी के क़िले की हिफ़ाज़त करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. गुरु गोबिन्द सिंह केगहरे दोस्त सूफ़ी बाबा बदरुद्दीन थे, जिन्होंने अपने बेटों और 700 शिष्यों की जान गुरु गोबिन्द सिंह की रक्षा करने के लिए औरंगंज़ेब के साथ हुए युध्दों में कु़र्बान कर दी थी, लेकिन कोई उनकी क़ुर्बानी को याद नहीं करता. बाबा बदरुद्दीन का कहना था कि अधर्म को मिटाने के लिए यही सच्चे इस्लाम की लड़ाई है.अवध के नवाब तेरह दिन होली का उत्सव मनाते थे. नवाबवाजिद अली शाह के दरबार में श्रीकृष्ण के सम्मान में रासलीला का आयोजन किया जाता था. नवाब वाजिद शाह अली ने ही अवध में कत्थक की शुरुआत की थी, जो राधा और कृष्ण के प्रेम पर आधारित है. प्रख्यात नाटक 'इंद्र सभा' का सृजन भी नवाब के दरबार के एक मुस्लिम लेखक ने किया था. भारत में सूफ़ी पिछले आठ सौ बरसों से बसंत पंचमी पर 'सरस्वती वंदना' को श्रध्दापूर्वक गाते आए हैं. इसमें सरसों के फूल औरपीली चादर होली पर चढ़ाते हैं, जो उनका प्रिय पर्व है. महान कवि अमीर ख़ुसरो ने सौ से भी ज़्यादा गीत राधा और कृष्ण को समर्पित किए थे. अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की बुनियाद मियां मीर ने रखी थी. इसी तरह गुरु नानकदेव के प्रिय शिष्य व साथी मियां मरदाना थे, जो हमेशा उनके साथ रहा करते थे. वह रबाब के संगीतकार थे. उन्हें गुरुबानी का प्रथम गायक होने का श्रेय हासिल है. बाबा मियां मीर गुरु रामदास के परम मित्र थे. उन्होंने बचपन में रामदासकी जान बचाई थी. वह दारा शिकोह के उस्ताद थे. रसखान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्तों में से एक थे जैसे भिकान, मलिक मोहम्मद जायसी आदि. रसखान अपना सब कुछ त्याग कर श्रीकृष्ण के प्रेम में लीन हो गए. श्रीकृष्ण की अति सुंदर रासलीला रसखान ने ही लिखी.श्रीकृष्ण के हज़ारों भजन सूफ़ियों ने ही लिखे, जिनमें भिकान, मलिक मोहम्मद जायसी, अमीर ख़ुसरो, रहीम, हज़रत सरमाद, दादू और बाबा फरीद शामिल हैं. बाबा फ़रीद की लिखी रचनाएं बाद में गुरु ग्रंथ साहिब का हिस्सा बनीं.बहरहाल, मुसलमानों को ऐसी बातों से परहेज़ करना चाहिए, जो उनकी पूरी क़ौम को कठघरे में खड़ा करती हैं...जान हमने भी गंवाई है वतन की ख़ातिरफूल सिर्फ़ अपने शहीदों पे चढ़ाते क्यों हो...
नाकामी सरकार की,गिरफ्तार होंगे मुस्लिम धियान भटकाने को।
हैदराबाद। ये अक्सर देखा गया है कि जैसे ही कोई त्यौहार नज़दीक आता है, मुसलमान युवकों की गिरफ़्तारी शुरू हो जाती है. बहाना दिया जाता है कि ये लोग आतंकवाद की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं और अक्सर जब जांच होती है तो मालूम होता है कि ज़्यादातर युवक बेगुनाह थे. अब जबकि स्वतंत्रता दिवस नज़दीक आ रहा है तो ऐसा अंदेशा है कि फिर ऐसा होगा। सिआसत की एक खबर के मुताबिक क्रांतिकारी कवि वरा वरा राव का मानना है कि सरकार जो कि हर तरह से नाकामयाब दिखाई पड़ती है अपनी नाकामियों को छुपानेके लिए ये सब करती है.नाकामी को छुपाने के इस तरीक़ेकी वजह से समाज में एक कटाव की स्थिति पैदा हो रही है और हिन्दू-मुस्लिम द्वेष की भावना बढ़ रही है.उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए एक मज़बूत प्रतिरोध की ज़रुरत है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों,दलितों और आदिवासियों को एक साथ आ जाना चाहिए ताकिकेन्द्र सरकार अपने इस मक़सद में कामयाब ना हो पाए. उन्होंने कहा कि सरकार ना तो काला धन ही भारत में वापिस ला पायी और ना ही “अच्छे दिन” के वादे पूरे हुए.
सऊदी सरकार भेजेगी अपने खर्च पर भारत के लालो को भेजेगी वापस!
सऊदी अरब में फंसे 10,000 भारतीयों के लिए राहत देने वाली खबर आई है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा और राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान एक समान वक्तव्य देते हुए कहा कि सऊदी अरब में फंसे भारतीय मजदूरों की समस्याओं को वहां के शासकों के संज्ञान में लाया गया है और उन्होंने समस्याओं के तत्काल समाधान का भरोसा दिया है। सऊदी सरकार वहां फंसे बेरोजगार भारतीय श्रमिकों को दूसरी नौकरियां उपलब्ध कराने तथा बकाए वेतन के भुगतान के लिए ठोस कदम उठा रही है।न्यूज़ २४ की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि विदेश राज्यमंत्री वी के सिंह परसों रात को ही सऊदी अरब पहुंच गए थे और वहां के मंत्रियों तथा अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो श्रमिक स्वदेश लौटना चाहते हैं, उन्हें एक्जिट वीजा उपलब्ध कराया जाएगा तथा सऊदी सरकार अपने खर्चे पर उन्हें भारत भेजेगी। इसके साथ ही जोश्रमिक दूसरी कम्पनियों में काम करना चाहते हैं, उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार दूसरी कम्पनियों में रोजगार उपलब्ध कराये जाएंगे।विदेश मंत्री ने कहा कि जो श्रमिक वापस भारत लौटेंगे, वे सऊदी अरब के श्रमिक कार्यालय में कFम्पनियों पर बकाये राशि का दावा भी करेंगे ताकि घर लौटने के बाद उनकी बकाया राशि का भुगतान किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारतीय श्रमिक सऊदी अरब के जिन शिविरों में रह रहे हैं, उन्हें वहां की सरकार आज से भोजन भी उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही सऊदी सरकार ने शिविरों की साफ सफाई और चिकित्सा सुविधा भी प्रदान करने का वादा किया है।
हजरत अली के हाथ से लिखी कुरआन का हुआ प्रदर्शन मोरेकको में।
रामपुर/नई दिल्ली।फेस्टीवल आॅफ इण्डिया 2016 केअन्तर्गत मोरक्को में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और भारतीय उच्चायोग, मोरक्को के सहयोग से चल रही रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की 41 दुर्लभ एवं प्राचीन कैलीग्राफियों के चित्रों की रबात में लगी प्रदर्शनी का समापन 1 अगस्त, 2016 को हो गया। अब यह प्रदर्शनी मोरोक्को के शहर कैसाब्लांका मेंदुनिया की सातवीं सबसे बड़ी मस्जिद हसन-प्प् में 4 अगस्त 2016 से प्रदर्शित की गई है, जिसका उद्घाटन मिस बाॅचरा जौहरी, लाइब्रेरियन, किंग हसन-प्प् मस्जिद पुस्तकालय, मोरक्को के कर-कमलों द्वारा किया गया। यह प्रदर्शनी 4 से 8 अगस्त 2016 तक प्रदर्शित की जायेगी। इस अवसर पर मिस बाॅचरा जौहरी, लाइब्रेरियन, किंग हसन-II मस्जिद पुस्तकालय, मोरक्को ने कहा कि पूरे विश्व भर में भारतीय संस्कृति बहुत प्रसिद्ध है। विश्व के बहुत रोचक और प्राचीन संस्कृति के रुप में इसको देखा जाता है। अलग-अलग धर्मों, परंपराओं, भोजन, वस्त्र इत्यादि से संबंधित लोग यहाँ रहते हैं। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोग यहाँ सामाजिक रुप से स्वतंत्र हैं। इसी वजह से धर्मों की विविधता में एकता के मजबूत संबंधों का यहाँ अस्तित्व है। विभिन्न संस्कृति और परंपरा के लोगों के बीच की घनिष्ठता ने एक अनोखा देश “भारत“ बनाया है। साथ ही कहा कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की कैलीग्राफियाँ विश्व में एक अद्वितीय स्थान रखती हैं। उन्होंने रज़ा लाइब्रेरी का गुणगान करते हुए कहा कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी इण्डो-इस्लामिक शिक्षा और कला का ख़जाना है।इस अवसर पर रामपुर रज़ा लाइब्रेरी की ओर से श्री सैयद तारिक़ अज़हर, वरिष्ठ तकनीकी रेस्टोरर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस्लामी समाज में उच्च कलाकारों के बीच में सुलेखकों का अपना एक स्थान है और यह स्थान उनकी कला-कुशलता एवं निपुणताकी श्रेष्ठता के आधार पर प्राप्त होता है। भारत में जीवन, इतिहास, कला और संस्कृति के स्वरूप को हमेशा मिश्रित और युग के आधार पर समग्र किया गया है। भारत की रचनात्मक प्रतिभा के इस अनूठे पहलू ने विश्व के विभिन्न देशों को प्रभावित किया है तथा भारत ने विश्व संस्कृति और अतीत में सभ्यता में काफी योगदान दिया है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। कहा कि रामपुर रज़ा लाइब्रेरी गौरवान्वित महसूस करती है कि लाइब्रेरी के संग्रह में लगभग 3000 दुर्लभ एवं प्राचीन कैलीग्राफियों के नमूने हैं। इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण सातवीं सदी में हज़रत अली (रजि0) के हाथ से लिखी कुरान शरीफ की प्रतिलिपि है। कैलीग्राफियों के चित्रों में 9वीं सदी के इमाम रज़ा द्वारा हाथ से कूफ़ी लिपि में लिखित कुरान का एक पेज का चित्र, 16वीं सदी के कुरान का पेज जिसे अकबर बादशाह ने सोने से सजवाया था और जिस पर अकबर के मंत्री फै़जी के हस्ताक्षर और मुहर है, 1887 ई0 की गुलाम रसूल की कैलीग्राफी,1871 ई0 की मिर्ज़ा मुहम्मद गुलाम खान की तोते, कबूतर और हंस के आकार के रुप मे सुन्दर कैलीग्राफी,1888 ई0 की मुहम्मद हसन कश्मीरी की कैलीग्राफी, 1878 ई0 की गुलाम रसूल की कैलीग्राफी, 18वीं सदी की मुहम्मद हसन की कैलीग्राफी जिसके बीच में बिस्मिलाह-अल-रहमान-निर-रहीम और दायीं और बायीं तरफ फ़ारसी भाषा की पंक्तियां लिखी हुई हैं, 1936 ई0 की दुल्लाह ख़ान ख़ुशरक़म रामपुरी की कैलीग्राफी, 18वीं सदी की मुहम्मद फजल-उर-रहमान खां की कैलीग्राफी, 18वीं सदी की मोहम्मद हसन की कैलीग्राफी और कुछ अरबी कैलीग्राफियों में पैगम्बर साहब (र0अ0व0) के रूप और सुन्दरता का वर्णन है इत्यादि को प्रदर्शित किया जा रहा है। इस अवसर पर श्री हिमांशु सिंह, मीडिया प्रभारी, रामपुर रज़ा लाइब्रेरी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कैसाब्लांका शहर के विद्वान, शोधकर्ता एवं गणमान्य व्यक्ति और विभिन्न देशों के दूत भी उपस्थित रहे।
अल्लाह कहने पर मुस्लिम दंपती को प्लेन से उतारा
नई दिल्ली। पाकिस्तानी मूल के एक अमेरिकी दंपती को विमान से उतारने का मामला सामने आया है। इस मुस्लिम दंपती ने दावा किया कि उन्हें विमान से महज इसलिए उतार दिया गया क्योंकि उनके अल्लाह कहने, पसीने निकलने और फोन पर एसएमएस करने से विमानमें सवार क्रू की एक सदस्य असहज महसूस कर रही थी। यह घटना 26 जुलाई की है और यह कपल अपनी शादी की दसवीं सालगिरह मनाकर अमेरिका लौट रहा था।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नाजिया और फैसल अली ने डेल्टा एयरलाइंस पर आरोप लगाया कि पैरिस से ओहायो के सिनसिनाटी जाने के दौरान इस्लामोफोबिया के कारण उन्हें विमान से उतार दिया गया। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि डेल्टा एयरलाइंस के विमान में पैरिस से सिनसिनाटी जाने के लिए मुस्लिम दंपती अपनी सीट पर बैठ चुका था। सीट पर बैठने के बाद महिला ने अपने जूते उतार दिए और इसी दौरान उसने अपने अभिभावकों को एसएमएस भेजा। वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही थी और उसने हेडफोन लगा रखा था।द सिनसिनाटी इन्क्वायरर की खबर के अनुसार, विमान के एक क्रू सदस्य ने पायलट से शिकायत की थी कि वह मुस्लिम दंपती से असहज महसूस कर रही है। उसने पायलट से कहा कि महिला सिर पर स्कार्फ बांधे हुए है और फोन का इस्तेमाल कर रही है और व्यक्ति को पसीना आ रहा है। विमान एयरहोस्टेस ने यह भी दावा किया कि फैसल ने अपना फोन छिपाने का प्रयास किया और उसने दंपती को अल्लाह शब्द का इस्तेमाल करते सुना।
सबसे ज्यादा मशहूर वैज्ञानिक मुस्लिम दुनिया से थे।परवेज़ अमिरालि
7 जनवरी 2016 को नाभिकीय भौतिक विज्ञानी , मशहूर दूरदर्शन शख्सियत व लेखक परवेज अमिराली हुडभोय हैदराबाद साहित्य समारोह में शिरकत करने आये थे . परवेज अमीराली भारतीय व विश्व विज्ञान पर ख़िताब करते हुवे कहा कि " मुसलमानों को तरक्की व याफ्ता के लिए विज्ञान से अवश्य जुड़ना चाहिए . आज भारत , पाकिस्तान , बांग्लादेश , इंडोनेशिया व विभिन्न देशों के मुसलमानों की बदहाली की वजह यह है कि वह साइंसी उलूम के साथ मजबूती से नही जुड़ रहे हैं । अपने ख़िताब में मुसलमानों की बदहाली व तररकी अक़ीदे व इतिहास पर भी रौशनी डाला ."मैंने साइंस और टेक्नोलॉजी से सम्बंधित बहुत से किताबों का अध्यन किया और पाया की साइंस वह इल्म है जो धर्म व कौमियत , रंग व नस्ल और इलाके के नज़रये से ऊपर है ।चार से पांच सौ साल पहले साइंसी उलूम की तरक़्क़ी के छेत्र - इल्मे रियाजी ( गणित - Mathematics ), इल्मे नबातात ( Botony ) , इल्मे तबिआत ( भौतिकी - Physics ), इल्मे कीमिया ( रासायनिक शास्त्र - Chemistry ) व मेडिकल साइंस में मुस्लिम वैज्ञानिक का दबदबा था जो आज धीरे धीरे काम होते गया । इल्मे रियाजी ( गणित ) अरब वालों का पसंदीदा विषय रहा है । मुहम्मद बिन मूसा ख्वारिज़्मी , जिसे यूरोप में अल्गोरिज़्म के नाम से जाना जाता है . आप ने रियाजी ( हिसाब ) , फल्कीयात ( आसमानी चीजो से संबंधित चीज ) , जुगराफिया ( भूगोल- Geography ) और इतिहास में असाधारण कारनामे सर - अंजाम दिये । ख्वारिज़्मी दुनिया के पहले इल्मे रियाज ( गणित ) के जानकार थे जिन्होंने शून्य का इज़ाद ( आविष्कार) किया ।
क़ुरआन की तासीर ने मुझे बना दिया मुस्लिम।
मोहतरमा मरयम जमीला न्यूयार्क (अमेरिका) के एक यहूदी परिवार में पैदा हुई। इस्लाम कबूल करने से पहले ही वे आम अमेरिकी व यहूदी औरतों से हटकर शिष्ट ढंग से जिन्दगी गुजार रही थीं। मुसलमान होने के बाद उन्होंने इस्लाम पर अनेक पुस्तकों की रचनाएं की हैं। अब तक उनकी एक दर्जन से अधिक अंग्रेजी रचनाएं लोगों के सामने आ चुकी हैं। अपने बारे में वे कहती हैं कि कुरआन से मेरा परिचय अजीब तरीके से हुआ। मैं बहुत छोटी थी जब मुझे संगीत से बहुत लगाव हो गया। बहुत -से गीतों और क्लासिकल रिकार्ड बहुत देर-देर त· मेरे कानों को लोरियां देते रहते। मेरी उम्र लगभग 11 वर्ष की थी, जब एक दिन सिर्फ इत्तिफाक से मैंने रेडियो पर अरबीसंगीत सुन लिया, जिसने दिल व दिमाग को खुशी के एक अजीब एहसास से भर दिया। नतीजा यह हुआ कि मैं खाली समय में बड़े शौक से अरबी संगीत सुनती, यहां तक कि एक समय आया कि मेरी अभिरुचि ही बदल गयी। मैं अपने पिता के साथ न्यूयार्क के सीरियाई दूतावास में गयी और अरबी संगीत के बहुत- से रिकार्ड ले आयी। उन्हीं में सूरह मरयम की चित्ताकर्ष· तिलावत भी थी, जो उम्मे कुलसुम की निहायत सुरीली आवाज में रिकार्ड की गयी थी। हालांकि मैं उन गीतों को समझ नहीं सकती थी मगर अरबी जुबान की आवाजों और सुरों से मुझे बेहद मुहब्बत हो गयी थी। सूरह मरयम ·ी तिलावत तो मेरे ऊपर जादू ·र देती थी। अरबी जुबान सेइस गहरे लगाव ही का नतीजा था कि मैंने अरबों के बारे में किताबें पढऩी शुरू की। खास तौर से अरबों और यहूदियों के संबंध पर ढूंढ-ढूंढ कर किताबें हासिल की और यह देखकर बहुत हैरान हुई कि यद्यपि धारणा की दृष्टि से यहूदी और अरब एक दूसरे के बहुत करीब हैं मगर यहूदी इबादतखानों में फिलिस्तीनी अरबों के विरूद्ध बहुत जबरदस्त जहर उगला जाता है। साथ ही ईसाइयों के व्यवहार ने मुझे बहुत निराश किया। मैंने ईसाइयत को गोरखधंधे के अलावा कुछ न पाया। चर्च ने बहुत-से अखलाकी, सियासी, आर्थिक और सभ्यतागत खराबियों का सिलसिला शुरू कर रखा था, इससे खास तौर से मैं परेशान हुई। मैंने यहूदी और ईसाई इबादतखानों को बहुत करीब से देखा और दोनों कोमुनाफिकत (कपटाचार) और बुराई की दलदल में डूबे हुएपाया। मैं यहूदी थी, इसलिए यहूदियत का अध्ययन करते हुए जब मैंने महसूस किया कि इस्लाम तारीखी एतबार से यहूदियत के बहुत करीब है तो फितरी तौर पर इस्लाम और अरबों के बारे में जानने का शौक पैदा हुआ। 1953 ई। के गर्मी के मौसम में मैं बहुत ज्यादा बीमार पड़ गयी।मैं बिस्तर पर लेटी थी जब एक शाम मेरी मां ने पब्लिक लाइब्रेरी जाते हुए मुझसे पूछा कि मैं कोई किताब तो नही मंगाना चाहती तो मैंने कुरआन के एक नुस्खे की फरमाइश की और वे आती हुई जार्ज सैल का अनुवाद किया हुआ कुरआन ले आयीं और इस तरह कुरआन से मेरे संबंध की शुरूआत हुई। जार्ज सैल 18वीं शताब्दी का ईसाई विद्वान और प्रचारक थे, मगर थे बहुत कट्टर धार्मिक और तंगनजर। उनके अनुवाद की भाषा कठिन है और टिप्पणियों में अनावश्यक विषयों से हटकर हवाले दिये गये हैं, ताकि ईसाई दृष्टिकोण से उसे गलत साबित किया जा सके। एक बार तो मैं उन्हें बिल्कुल न समझ सकी मगर मैंने उसका अध्ययन करना न छोड़ा और उसे तीन दिन और रात बराबर पढ़ती रही यहां तक कि थक गयी। उन्हीं दिनों किस्मत ने साथ दिया और पुस्तकों की एक दुकान पर मैंने मुहम्मद मार्माडियूक पिकथॉल का अनुवाद देखा। ज्यों ही मैंने उस कुरआन को खोला, मुझे एक जबरदस्त चीज मालूम हुई। जुबान का हुस्न और बयान की सादगी मुझे अपने साथ बहा ले गयी। भूमिका के पहले ही अनुच्छेद में अनुवादक ने बहुत खूबसूरत तरीके से स्पष्ट किया है कि यह कुरआनी अर्थों को जैसा कि आम मुसलमान इसे समझते हैं, अंग्रेजी भाषा में पेश करने की एक कोशिश है और जो शख्स कुरआन पर यकीन नहींरखता उसके लिए अनुवाद का हक अदा नहीं कर सकता। दुनिया में कोई भी अनुवाद अरबी कुरआन की जगह नहीं ले सकता आदि। मैं तुरन्त समझ गयी कि जार्ज सैल का अनुवाद नागवार क्यों था? अल्लाह तआला पिकथॉल को बहुत-सी रहमतों से नवाजे।उन्होंने ब्रिटेन और अमेरिका में कुरआन को समझना आसान बना दिया और मेरे सामने भी रोशनियों के दरवाजे खोल दिये। मैंने इस्लाम में हर वह अच्छी, सच्ची और हसीन चीज पाई जो जिन्दगी और मौत को मकसद देती है जबकि दूसरे धर्मों में हक मिटकर रह गया है, उसको टुकड़ों में बांट दिया गया है, उसके आस-पास कईतरह के घेरे खींच दिये गये हैं। कुरआन और उसके बाद मुसलमानों की तारीख के अध्ययन से मुझे यकीन हो गयाकि अरबों ने इस्लाम को महान नहीं बनाया बल्कि यह इस्लाम है जिसकी वजह से अरब दुनिया भर में कामयाब हुए। मेरी बीमारी बरसों तक रही, यहां तक कि 1959 ई। में पूरी तरह से स्वस्थ होकर मैंने अपना अधिक समय पब्लिक लाइब्रेरी न्यूयार्क में गुजाराना शुरू किया। यहीं पर मुझे पहली बार हदीस की मशहूर किताब मिशकातुल-मसाहीब के अंग्रेजी अनुवाद की चारमोटी जिल्दों से परिचय हुआ। यह कलकत्ता के मौलाना फजलुर्रहमान की कोशिशों का नतीजा थी। तब मुझे अंदाजा हुआ कि हदीस के संबंधित हिस्सों से परिचय के बगैर कुरआन पाक को मुनासिब और विस्तृत ढंग से समझना मुमकिन नहीं। जाहिर है पैगम्बर अलैहिस्सलाम जिन पर प्रकाशना होती थी, की रहनुमाई और व्याख्या के बगैर खुदा के कलाम को कैसे समझा जा सकता है। इसीलिए इस बात में कोई शक नहीं कि जो लोग हदीस को नहीं मानते, असल में वे कुरआन के भी इन्कार करने वाले हैं।मिशकात के विस्तृत अध्ययन के बाद मुझे इस हकीकत में कुछ भी शक न रहा कि कुरआन अल्लाह का उतारा हुआ है। इस बात ने इस चीज को मजबूती दी कि कुरआन अल्लाहतआला का कलाम है और यह हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की दिमागी मेहनतों का नतीजा नहीं। यह एक हकीकत है कि कुरआन जिन्दगी के बारे में तमाम बुनियादी सवालात का ऐसा ठोस और संतुष्ट करने वाला जवाब देता है जिसकी मिसाल कहीं और नहीं मिलती। मेरे पिता ने एक बार मुझे बताया कि दुनिया में कोई पद हमेशा रहने वाला नहीं है, इसलिए हमें बदलते हुए हालात के साथ खुद को बदल लेना चाहिए, तो मेरे दिल नेउसे कबूल करने से इन्कार कर दिया और मेरी यह प्यास बढ़ती ही चली गयी कि मुझे वह चीज मिले जो हमेशा बाकी रहने वाली हो। खुदा का शुक्र है कि जब मैंने कुरआन पाक को पढ़ा तो मेरी प्यास बुझ गयी और मुझे मेरी पसन्द की चीज मिल गयी। मुझे पता चल गया कि अल्लाह की खुशी के लिए जो भी नेक काम किया जाए वह·भी बेकार नहीं जाएगा और दुनिया में उसका कोई बदला न मिले, तो आखिरत में उसका पुरस्कार जरूर मिलेगा। इसके मुकाबिले में कुरआन ने बताया कि जो लोग किसी अखलाकी कानून के बगैर जिन्दगी गुजारते हैं और खुदा की खुशी को सामने नहीं रखते, दुनियावी जिन्दगी में चाहे वे कितने ही कामयाब हों मगर आखिरत में बहुत ही घाटे में रहेंगे।इस्लाम की शिक्षा यह हैकि हमें हर वह बेकार और बेफायदा काम छोड़ देना चाहिए, जो अल्लाह के हकों औरबन्दों के हकों के रास्ते में रुकावट बनाता हो। कुरआन की इन शिक्षाओं को मेरे सामने हदीस और रसूलेपाक सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पवित्र जीवन ने और ज्यादा स्पष्ट और रोशन किया जैसा कि हजरत आइशा सिद्दीका (रजि.) ने एक बार फरमाया ''आप (सल्ल.) के अखलाक कुरआन के बिल्कुल मुताबिक थे। और वे कुरआनी शिक्षाओं का पूरे तौर से नमूना थे। मैंने देखा कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पवित्र जीवनका एक-एक पहलू मिसाली है। एक बच्चे की हैसियत से, एक बाप की हैसियत से, एक पड़ोसी, एक व्यापारी, एक प्रचारक, एक दोस्त, एक सिपाही और एक फौजी जनरल के एतबार से, एक विजेता, एक विधि-निर्माता, एक शासक और सबसे बढ़कर अल्लाह के एक सच्चे आशिक के लिहाज से वह खुदा की किताब कुरआन की हूबहू मिसाल थे। फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की दिनभर की मशगूलियात के बारे में जानकर मैं बहुत प्रभावित हुई। आप दिन का एक लम्हा भी बेकार न करते और आपका सारा समय अल्लाह और उसकी मानवजाति के लिए समर्पित था। उनका अपनी बीवियों से सुलूक निहायत न्याय वाला और मिसली था। इन्साफ, न्याय और तकवा (अल्लाह से डरने) का यह हाल था कि उनकी प्यारी बेटी हजरत फातिमा (रजि.) ने जायज जरूरत के तहत एक गुलाम के लिए निवेदन किया तो उन्हें तकवा अपनाने को कहा और अपने घरवालों पर दूसरे मुसलमानों की जरूरतों को प्रधानता दी। इस्लाम के पैगम्बर (सल्ल.) ने जिन्दगी का मकसद ऐशपसंदी नहीं बल्कि 'कामयाबी' करार दिया। आपकी शिक्षा के अनुसार जो शख्स आखिरत की कामयाबी के लिए संकल्प के साथ अल्लाह तआला की बन्दगी करता है, उसे जज्बाती सुकून के नतीजे में खुशी और प्रसन्नता खुद बखुद हासिल हो जाती है। इसका यह मतलब नहीं कि आप(सल्ल.) दुनियावी जिन्दगी से बिल्कुल अलग थे। आप रोजाना की जिन्दगी की जरूरियात का खास लिहाज करते थे, खुश मिजाज और खुश बयान थे, बच्चों के साथ खेल भी लेते थे, मगर असल तवज्जो के काबिल उन्होंने आखिरत ही की जिन्दगी को समझा और प्राकृतिक व रूहानी जिन्दगी में काफी संतुलन पैदा कर लिया।अब मैंने फैसला कर लिया कि इस्लाम के प्रभाव अपनी जिन्दगी पर गालिब करूंगी। शुरू में मैंने अपने तौर पर न्यूयार्क के इस्लामी मर्कज में मुसलमानोंसे मुलाकात की राहें पैदा कर लीं और बड़ी खुशी हुई कि जिन लोगों से मेरा संबंध हुआ है, वे अच्छे लोग थे। इस्लामी मर्कज की मस्जिद में मैंने मुसलमानोंको नमाज पढ़ते हुए देखा और इस बात ने मेरे इस यकीन को मजबूत कर दिया कि सिर्फ इस्लाम ही पूरे तौर से आसमानी धर्म है, बाकी धर्मो में सिर्फ नाम की सच्चाई मौजूद है। अब मैं इस फैसले पर पहुंच गयी थी कि इस्लाम ही सच्चा धर्म है और इस्लाम ही में मौजूदा जमाने की बुराइयों का मुकाबला करने और उन पर विजयी होने की क्षमता मौजूद है। अतएव मैंने इस्लाम का अध्ययन करने के बाद इसे कबूल कर लिया। इस्लाम कबूल करने से पहले मेरा मौलाना अबुल आला मौदूदी से काफी पत्राचार हुआ। इस्लाम कबूल करने के बाद मेरी मंजिल कराची थी, जहां मैं मौलाना मौदूदी की दावत पर गयी। जब मैं कराची पहुंची तो वहां मौलाना मौदूदी के चाहने वालों ने मुझे हाथों हाथ लिया और बेहद सेवा और आवभगत की। कुछ दिन बाद मैं जहाज के द्वारा लाहौर आ गयी और मौलाना के घर ठहरी। मैं मौलाना की बच्चियों की उम्र की थी इसलिएमुझे इस घर में कोई अजनबीपन का एहसास न हुआ। कुछ दिनों के बाद मेरा निकाह जमाअत इस्लामी पाकिस्तानके एक मुख़लिस सदस्य मुहम्मद यूसुफ खां से हो गया।मैंने इस रिश्ते को खुशी के साथ कबूल कर लिया और यहफैसला कर लिया कि अज्ञानता की तमाम रस्मों का इन्कार और नबी (सल्ल.) के तरीके की पैरवी करना मेरीजिन्दगी का मकसद है। अल्लाह का शुक्र है कि मैं अपने नये घर में खुशी व सुकून के साथ जिन्दगी गुजार रही हूं।
इंग्लैंड की होनहार महिला पुलिस अफसर ने अपनाया इस्लाम
अट्ठाइस वर्षीय पुलिस अधिकारी जेने केम्प ने घरेलू हिंसा से पीडि़त एक मुस्लिम महिला की मदद केदौरान इस्लामिक आस्था और विश्वास के बारे में जानने का निश्चय किया। उन्होंने इस्लाम का अध्ययन किया और फिर इस्लाम अपनाकर मुसलमान बन गईं।दो बच्चों की मां जेने केम्प ने बताया कि पुलिस अधिकारी के रूप में घरेलू हिंसा से पीडि़त एक मुस्लिम महिला की मदद के दौरान उसने इस्लाम को जाना और फिर इस्लाम से प्रभावित होकर इस्लाम कुबूल कर लिया।इस्लाम के अध्ययन के दौरान केम्प ट्विटर पर कई मुस्लिमों के सम्पर्क में आईं, उनसे कई बातें जानीं और इस सबके बाद उन्होंने अपना कैथोलिक धर्म छोड़कर एक साल पहले इस्लाम धर्म अपना लिया और अब वे पूरी तरह इस्लाम के मुताबिक अपनी जिंदगी गुजार रही हैं। वे एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में गश्त पर निकलती हैं लेकिन वे पूरी तरह इस्लामीहिजाब में होती हैं और अपनी ड्यूटी के समय को एडजेस्ट करके वे नमाज पढऩा नहीं भूलती हैं।सात वर्षीय बेटी और नौ वर्षीय बेटे की सिंगल मदर जेने ने पिछले साल आधिकारिक रूप से इस्लाम अपना लिया और अपना नाम जेने केम्प से अमीना रख लिया। वे अपना खाना खुद बनाती हैं ताकि वह पूरी तरह हलाल खाना हो।जेने दक्षिण मेनचेस्टर में रहती हैं। वे कहती हैं, जहां मैं रहती हूं वहां एक बड़ी मस्जिद है और काफी तादाद में मुस्लिम रहते हैं। इस्लाम के प्रति दिलचस्पी के दौरान मैंने तय किया कि मुझे इन लोगोंऔर इनके मजहब के बारे में ज्यादा से ज्यादा अध्ययनकरना चाहिए।जेने कहती हैं- 'पहले मैं सोचती थी कि इस्लाम तो महिलाओं को चूल्हा-चौका करने और घर में कैद रहने के लिए मजबूर करता होगा लेकिन मैंने इसमें ऐसा नहीं पाया बल्कि ये तो अपने समय से ही दूसरों के प्रति उदार और सम्मानपूर्ण व्यवहार की सीख देता है। मैंने पाया कि इस्लाम अपने पड़ोसियों का खयालरखने और उनके साथ अच्छे ताल्लुकात रखने को तरजीह देता है, वहीं बच्चों को माता-पिता को पूरा सम्मान देने और उन्हें उफ् तक न कहने की हिदायत देता है। मैंने आज के अन्य धर्मों को इस्लाम जैसा नहीं पाया। इस्लाम में मुझे अपने हर एक सवाल का जवाब मिला। दरअसल अब तो मुझे इस्लाम से बेहद लगाव हो गया।'जेने बताती हैं, 'जब मैंने अपने सहकर्मियों को बताया कि मैंने इस्लाम अपना लिया और अब मैं कार्यस्थल पर हिजाब पहनना शुरू करना चाहती हूं तो मेरे सहकर्मियों ने मेरा सहयोग किया। पहले मैं चिंतित थी कि मेरे सहकर्मी मेरे इस फैसले पर न जाने क्या सोचेंगे और किस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे लेकिन उन्होंने मेरे फैसले का सम्मान किया।'जेने कहती हैं- 'मेरे दोनों बच्चे मेरे पर्दा करने और इस्लाम के बारे में बहुत से सवाल करते हैं लेकिन मैं उन पर जबरदस्ती इस्लाम नहीं थोपूंगी। मैं लोगों को बता रही हूं कि एक मुस्लिम महिला भी पुलिस फोर्स में काम कर सकती है और मुझे उम्मीद है कि इस तरह मैं इस्लाम की नकारात्मक छवि को बदलने की कोशिश करूं गी।'मेनचैस्टर के दक्षिण स्थित जिले विथेनशेवे में पली-बढ़ी जेने बताती हैं,' मेरे इस्लाम अपनाने के फैसले का मेरे घर वालों ने मौटे तौर पर स्वागत ही किया। मेरे इस फैसले से मुझे खुश देखकर वे खुश हैं। एक दिन मेरी बहन ने मुझे इस रूप में देखकर उसने भी खुशी व्यक्त की।'वे कहती हैं, 'मैंने खुले दिलो-दिमाग के साथ इस्लाम का अध्ययन किया।'जैने को इस्लाम की राह दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की मुहम्मद मंजूर ने जो स्थानीय मस्जिद से मुस्लिम ट्विट्र अकांउट चलाते हैं।मुहम्मद मंजूर कहते हैं, 'मैं जेने का अहसानमंद हूंकि उसने मुझे इस्लाम से जुड़े ऐसे सवाल पूछे जिसकीवजह से मैंने इस्लाम का और अधिक अध्ययन किया और मेरी इस्लामिक नॉलेज में बढ़ोतरी हुई। जैने ने अपने स्तर पर अध्ययन करके सच्चाई रूपी इस्लाम को तलाशा। इससे यह भी जाहिर होता है कि मुस्लिम इंग्लैंड जैसे समाज में भी बिना अपने मजहब के उसूलों से समझौता किए घुलमिलकर रह सकते हैं।'बशुक्रिया इस्लामिक वेब दुनिया
तीन साल के नन्हे फ़रिश्ते नें सिर्फ सुन कर ही कियापूरा क़ुरआन हिफ्ज़
तीन साल की उम्र में बच्चा ना सही से लिख सकता है और ना पढ़ सकता है भला इस उम्र में कोई किसी किताब को कैसे पूरी से याद कर सकता है। लेकिन अल्जीरिया के एक तीन साल से भी कम उम्र अब्दुल रहमान ने ये कारनामा कर दिया है। ताज्जुब करने वाली बात कि वो भी बच्चे ने सुन सुन के पुरे क़ुरआन का याद किया है अब्दुल रेहमान ने क़ुरआन को इतनी कम उम्र में हिफ़्ज़ करके पूरी दुनियामें एक रिकार्ड बनाया है। बच्चे का नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने जा रहा है।
महान मुस्लिम वैज्ञानिक अहमद ज़ेबेल का आज हुआ निधन
दुनिया के एकमात्र महान रसायन वैज्ञानिक जिन्हें रसायन विज्ञान का पितामह कहा जाता है, वैज्ञानिक डॉक्टर अहमद जेवेल का कैलिफोर्निया में निधन हो गया है, मिस्र के रहने वाले हैं. इस दुनिया से जाना वैज्ञानिक और फाइन दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी हानि है। अहमद ज़ेबेल अमेरिकी नागरिक थे बताया जाता है यह 70 वर्षीय डॉक्टर अहमद ज़ेबेल पिछले काफी दिनों सेअस्वस्थ चल रहे थे लंबी बीमारी के चलते हैं 70 सालकी उम्र में उनका निधन हो गया। डॉ अहमद जेवेल नेम रसायन विज्ञान में ट्रेडिशनल स्टेट ऑफ केमिकल स्टेटस पर अध्ययन के लिए 1999 में नोबेल प्राइज जीतने वाले अहमद कैलिफोर्निया सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में केमिस्ट्री और फिजिक्स केप्रोफ़ेसर थे। इनके निधन पर इस्लामी शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि रसायन विज्ञान में उन्होंने जो योगदान दिया है उसको कभी भी नहीं भुलाया जा सकता उनका इस दुनिया से जाना वैज्ञानिक और फाइन दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी हानि है।
कैंसर से बचने के लिए इस एक ड्रिंक को पीनाहै फायदेमंद...
हाल में हुए एक शोध में पता चला है कि कोल्ड कॉफी पीने से कैंसर से बचाव होता है, इस बारे में WHO की कैंसर शोध इकाई से जानकारी मिली हैनई दिल्ली।कॉफी पीने के शौकीन लोगों को इसका हर स्वाद अच्छा लगता है फिर चाहे कॉफीकोल्ड हो या हॉट। लेकिन अगर आपको कोल्ड कॉफी ज्यादा पसंद है तो ये आपके लिए फायदे की बात हो सकती है। हाल में हुए एक शोध में पता चला है कि कोल्ड कॉफी पीने से कैंसर सेबचाव होता है। इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की कैंसर शोध इकाई से जानकारी मिली है।डब्ल्यूएचओ ने 1991 में कॉफी को ब्लैडर कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया था। लेकिन 1,000 से ज्यादा अध्ययनों की समीक्षा के बाद इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी), जो कि डब्ल्यूएचओ की इकाई है, नेकहा कि कॉफी को कैंसर उत्पन्न करने वाले खाद्य पदार्थों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।द वर्ज की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने हालांकि आगाह किया है कि अगर बहुत गर्म कॉफी पी जाए तो उससे कैंसर का खतरा हो सकताहै। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएआरसी ने 23 वैज्ञानिकों से कॉफी और हर्बल चाय से जुड़े कैंसर के खतरे की समीक्षा करवाई, जिन्होंने काफी को कैंसर का कारक नहीं बताया। डब्ल्यूएचओ की कैंसर रिसर्च इकाई का कहना है कि 65 डिग्री सेल्सियस से अधिकगर्म कॉफी पीने से ग्रासनली के कैंसर का खतरा हो सकता है।
44 वर्षों से जाग रहा है यह शख्स, मेडिकल साइंस के लिए बना चुनौती
बगैर नींद के जीवन की परिकल्पना नहीं की जासकती है लेकिन पूर्व सयुंक्त कलेक्टर मोहनलाल द्विवेदी ऐसे शख्स हैं जो 44 सालों में एक पल भी नहीं सोए हैं।रीवा।बगैर नींद के जीवन की परिकल्पना नहीं की जा सकती है लेकिन पूर्व सयुंक्त कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी ऐसे शख्स हैं जो 44 सालों में एक पल भी नहीं सोए हैं। एकसामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जी रहे हैं। किसी भी मनुष्य के लिए यह स्वीकार कर पाना मुश्किल है। पर हकीकत यही है। उन्हें नींद क्यों नहीं आती, यह मेडिकल साइंस के बड़े से बड़े डॉक्टर भी पता नहीं लगा पाए हैं। वह चलते-फिरते अजूबा हैं। पत्रिका से उन्होंने अपने जीवन को साझा किया।द्विवेदी कहते हैं कि वर्ष 1973 जुलाई कामहीना था। तारीख उन्हें याद नहीं। अचानक एक रात नींद गायब हो गई। इसके बाद से उन्हें नींद नहीं आई। उस दौर में वह स्वामीविवेकानंद महाविद्यालय त्योंथर में व्याख्याता थे। कई दिनों तक अपनी समस्या को छिपाए रहे। घरवालों और दोस्तों तक से शेयर नहीं किया। रात-रात चुपचाप बिस्तर में पड़े रहते थे। आंखों में न जलन होती थीऔर न ही शरीर की अन्य क्रियाओं में फर्क आया।1977 में प्रशासनिक सेवा में चयनवर्ष 1977 में राज्य प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए। इसके बाद उन्होंने खामोशी तोड़ी और पहले झाड़-फूंक करवाया। घर के लोगभूत की आशंका करते थे। फिर भी नींद नहीं आईतो डॉक्टरों से इलाज कराना शुरू किया। द्विवेदी बताते हैं कि दो साल तक बाम्बे हॉस्पिटल, मुंबई के डॉक्टरों को दिखाया। मानसिक रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन के डॉक्टरोंने कई प्रकार की जांचे कराई। लेकिन रिपोर्ट शून्य रही।बाम्बे हॉस्पिटल भी हाराआखिर में बाम्बे हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कहा कि जब कोई तकलीफ शरीर में नहीं है तो फिर क्यों इलाज करा रहे हो। इसके बाद से आजतक कोई दवा नहीं ली। यहां तक कि नींद की गोली भी कभी नहीं खाई। द्विवेदी ने बताया कि मूलरूप से जनकहाई त्योंथर के रहने वाले हैं। बचपन से पढ़ाई में अव्वल रहे। अर्थशास्त्र में स्नाकोत्तर की उपाधि ली है। पिता रामनाथ द्विवेदी के बारे में बोले कि वे भी रात में तीन से चार घंटे ही सोते थे। वर्तमान मेंं जेपी रोड पडऱा में रहते हैं।पन्ना में होती थी मेरी जासूसीपूर्व संयुक्त कलेक्टर मोहनलाल द्विवेदी कहते हैं कि जब वे पन्ना में पदस्थ थे लोग रात में उनकी जासूसी करते थे। कि संयुक्त कलेक्टर सोते हैं कि नहीं। क्योंकि लोगों को विश्वास नहीं होता था। पन्ना के बाद सीधी जिले में रहे। यहां भी लोग जासूसी करते थे। उनका कहना है नींद न आने से वे प्रशासनिक सेवा को बखूबी अंजाम देते थे। समय पर आफिस पहुंचना और रात 8 बजे तक काम निपटाना उनकी दिनचर्या थी।परिवार पर पड़ रहा असरनींद न आने का असर उनके परिवार पर पड़ रहा है। इसे लेकर अब वे चिंतित हैं। उनके एक बेटी प्रतिभा है। साथ में दो भतीजे रहते हैं। पत्नी नर्मदा द्विवेदी उनके इस जीवन की साक्षी हैं। देर रात तक जगना इनकी भी आदत बनती जा रही है। एक ही छत के नीचे दो तरह का जीवन जीना चुनौती है। द्विवेदी बताते हैं कि उनकी रात, दिन से बेहतर होती है। क्योंकि वे दिन से ज्यादा रात में अपनेको स्फूर्त मानते हैं। 4-5 घंटे वे धर्म से जुड़ी किताबें पढ़ते हैं। भोर मे योग शुरू कर देते हैं।
आखिर क्यों यहां एक युवती को बनना पड़ता है सभी भाइयों की दुल्हन
भारत एक ऐसा देश है जिसमें विविधता में एकता है, यहां कई संस्कृति एक साथ देखने को मिलती है. देखा जाएं तो विविधता में एकता, भारत के संदर्भ में सिर्फ मुहावरा नहीं है बल्कि यह यहां की सच्चाई है. भारत की संस्कृति और परम्पराओं के बारे कुछ शब्दों में समझाना मुश्किल है. यहां कई राज्य, भाषा, संस्कृति, पाक कला, परम्परा, पहनावा और अन्य बोलियां हैजिनमें से कई तो अनगिनत है. भारत एक ऐसा भूमि है जहां सब कुछ देखने को मिलता है. लेकिन जहां एक ओर भारत इतनी विविधताओं से भरा हुआ है, वहीं यहां के लोगों के बीच अजीबोगरीब प्रथाएं भी पनप चुकी है. यहां हर क्षेत्र की कुछ ख़ास परम्पराएं है जो उस क्षेत्र की पहचान बनी हुई है. इसी तरह विवाह को लेकर भी कई प्रथाएं चली आ रही हैं.हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में आज भी बहु पति विवाह किए जाते हैं. यहां रहने वाले परिवारों में महिलाओं के कई पति होते हैं. ऐसा नहीं है कि ये पति अलग-अलग परिवारों के हो, महिला के पति एक ही घर के होते हैं.घर की एक ही छत के नीचे रहने वाले परिवार के सभी भाई एक ही युवती से परंपरा के अनुसार शादी करते हैं और विवाहित जीवन जीते हैं. अगरकिसी महिला के कई पतियों में से किसी एक की मौत भी हो जाए तो भी महिला को दुख नहीं मनाने दिया जाता है.किन्नौर में विवाह की परंपरा भी अजीब ढंग से निभाई जाती है. जब किसी युवती की शादी होती है तो परिवार वाले उस परिवार के लड़कों के बारे में पूरी जानकारी आदि ले लेते हैं. विवाह में सभी भाई दूल्हे के रूप में सम्मलित होते हैं. शादी के बाद निभाई जाने वाली कई परंपराएं और बाद का विवाहित जीवन एक टोपी पर निर्भर करता है.जैसे किसी परिवार में चार भाई है. सभी की विवाह एक ही महिला से हुआ है. अगर कोई भाई अपनी पत्नी के साथ है तो वह कमरे दरबाजे पर अपनी टोपी रख देता है. भाइयों में मान मर्यादा इतनी रहती है कि जब तक टोपी दरवाजे पर रखी है कोई दूसरा भाई उस स्थान पर नहीं जा सकता.यहां लोगों का कहना है कि यह प्रथा इसलिए चलीआ रही है क्योंकि अज्ञातवास के दौरान पांचोंपांडवों ने यही समय बिताया था. सर्दी में बर्फबारी की वजह से यहां की महिलाएं और पुरुष घर में ही रहते हैं. बर्फबारी की वजह से कोई काम नहीं रहता है. इन दिनों इन लोगों के पास बस मौज मस्ती में दिन व रात गुजारने होते हैं. महिलाएं सारा दिन पुरुषों के साथ गप्पें मारती हैं.
सपा सरकार में बेखौफ हो गए हैं अपराधी- मायावती
नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुलंदशहरजिले के नेशनल हाइवे पर एक परिवार के मां-बेटी के साथ हैवानियत के बाद बरेली, शामली व कानपुर जिले में भी लगभग उसी प्रकार की दरिंदगी के मामले में गहरी चिंता व्यक्त की। मायावती ने कहा कि वास्तव में इस सपा सरकार में सरकारी व्यवस्था इतनी ज्यादा लचर व बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गयी है कि अपराधियों को कानून का खौफ थोड़ा भी नहीं रहा है। वे जानते हैं कि सपा सरकार दिखावे के लिए सख्ती कर रही है और अन्तत: उनका कुछ ज्यादा नहीं बिगड़ने वाला है।संसद के भीतर राज्यसभा व बाहर परिसर में पत्रकारों से बातचीत में मायावती ने देशभर में महिला उत्पीड़न व अत्याचार का मामला उठाया। परंतु संसद परिसर में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में मायावती ने कहा कि महिलाओं के साथ वैसे तो देशभर में शोषण, अत्याचार व बलात्कार आदि की घटनाएं काफी हो रही हैं परंतु उत्तर प्रदेश में इसकी अति हो रही है। बुलंदशहर की घटना के बाद बरेली, शामली व कानपुर आदि में दिन के समय महिलाओं को सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनाया गया है।इस सबसे उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार की देशभर में वैसी ही भारी किरकिरी व फजीहत हो रही जैसा ऊना कांड के बाद भाजपा की हुई है और अभी तक भी जारी है। उसी सबसे लोगों का ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक साजिश के तहत बीएसपी के तीन वरिष्ठ लोगों रामअचल राजभर, नौशाद अली व अतर सिंह राव पर अब इतने दिनों के बाद पास्को कानून की धारा लगाई गई हैं तथा अन्य और भी लोगों के खिलाफ पास्को कानून लगाने की साजिश जारी है।मायावती ने कहा कि इन सभी लोगों ने धरना-प्रदर्शन के दौरान कुछ भी गलत नहीं कहा है और केवल राजनीतिक षड़यंत्र के तहत इन सभी लोगोंपर नया-नया मुकदमा कायम किया जा रहा है और अब उसमें नई-नई धाराएं जोड़ी जा रही हैं, जिसकी हमारी पार्टी कड़े शब्दों में निंदा करती है।FACEBOOK पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए यहां क्लिक करें-मायावती ने कहा कि बुलंदशहर की अत्यंत ही दुखद घटना के सभी आरोपियों के अब तक भी गिरफ्तार नहीं होना यह साबित करता है कि उनको जरुर उच्च स्तर पर कोई संरक्षण प्रदान कर रहा है। पीड़ित परिवार के लोगों के दुख और पीड़ा को समझा जा सकता है और उनकी भावना का सम्मान करते हुए प्रदेश की सपा सरकार को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर तीन महीने के अंदर अंदर दोषियों को सजा सुनिश्चित करनी चाहिए।बुलंदशहर मामले में ही खासकर भाजपा व सपा द्वारा आरोप-प्रत्यारोप की तीव्र निंदा करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि पीड़ित परिवार जल्द से ज्लद न्याय चाहता है और इस मामले में दलगत राजनीति बंद करके सभी राजनीतिक पार्टियों को मामले के शीघ्र निपटारे में मदद करनी चाहिए और इसके लिए सीबीआई जांच से बेहतर यही होगा कि पहचाने गए आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में इसकी सुनवाई करके दोषी को जल्द सजा दी जाए।मायावती ने कहा कि वर्तमान सपा सरकार में अपराधियों की धर-पकड़ करके उन्हें कानून के कठघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति के अभाव के कारण भी अपराधियों की हिम्मत प्रदेश में काफी ज्यादा बढ़ गई है। लोगों ने देखा है कि किस प्रकार महिला विरोधी व अभद्रतापूर्ण बयान देनेवाले भाजपा नेता दयाशंकर सिंह के खिलाफ यह सपा सरकार पहले घटना के प्रति उदासीन व मूकदर्शक बनी रही और उसकी गिरफ्तारी तब तक नहीं की गयी जबतक कि माननीय न्यायालय ने उसकी गिरफ्तारी पर रोक संबंधी याचिका खारिज नहीं कर दी और तब लगभग नौ दस दिनों तक वह यहां वहां घूमता रहा था।उन्होने कहा कि खासकर अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था के मामले में जातिवाद को त्याग करके सही भावना से सपा सरकार को काम करने की जरुरत है। साथ ही शासन-प्रशासन को भ्रष्टाचार को छोड़जनहित व जनकल्याण के प्रति सघनता के साथ प्रेरित करना होगा, वरना उत्तर प्रदेश की आमजनता के साथ साथ घर की मां बेटियों की अस्मत पर अपराधीगण हमला करते रहेंगे। इससे उत्तर प्रदेश की आमजनता को बचाने की शख्त जरुरत है। उन्होने बरेली, शामली व कानपुर आदि की घटना की भी तीव्र निंदा करते हुए आरोपियों को यथाशीघ्र गिरफ्तार करके उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की।
इक मुस्लिम पायलेट ने खुद्की जान देकर बचायी 300 लोगो की जान
दुबई। दुबई एयरपोर्ट पर हुए एमिराट् विमान की क्रैश लैंडिंग के बाद उसमें आग लग गई और वो पूरीतरह जल गया। अगर वक्त रहते इसमें सवार 300 लोगों को नहीं निकाला गया होता तो कई जाने जा सकती थीं। लेकिन विमान में सवार लोगों को बचानेके बावजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई और वो था फायर फायटर टीम का सदस्य।इस बहादुर इंसान ने दूसरों को तो बचा लिया लेकिन इस दुर्घटना से खुद को नहीं बचा पाया। जसिल इसा मोहम्मद हुसैन नाम के इस साहसी फायर फाइटर ने अल्टीमेट सेक्रिफाइज करते हुए 300 लोगों को दुर्घटनाग्रस्त विमान से सुरक्षित बाहर निकाला। उसकी मौत की खबर मिलने के बाद डायरेक्टर जनरल सिविल एविऐशन अथॉरिटी सैफ अल सुवैदी ने कहा कि फायर फायटर ने दूसरों की जान बचाते हुए खुद की जान दांव पर लगा दी।मैं उस साहसी युवक के अल्टीमेट सेक्रिफाइज को सलाम करता हूं। हमारी प्रार्थनाएं उसके परिवारके साथ हैं। दरअसल मंगलवार को दुबई के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एमिराट्स के विमान ने इमरजेंसी लैंडिंग की। लैंडिंग के बाद यात्रियों को बचाने के लिए तैयार टीम में जसिल भी थे। जैसे ही विमान रूका वो उसकी तरफ दौड़े औरयात्रियों को बाहर निकालने लगे जैसे ही सभी यात्री बाहर निकले विमान में धमाके से आग लग गई और इसमें जसिम घायल हो गए।FACEBOOK पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए यहां क्लिक करें-गंभीर चोटों के चलते उनकी मौत हो गई। उनके बलिदान को सलाम करते हुए जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा कि हम उपरवाले के शुक्रगुजार हैं कि उसकी दया के चलते बड़ा हादसा टल गया। लेकिन हमें दुख है कि इसमें हमारे एक फायर फायटर की मौत हो गई जो दूसरों की जिंदगी बचाने में लगा था।स्थानीय मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार लैंडहोने से पहले विमान को फिर से उड़ने के आदेश मिले थे और दूसरी कोशिश के लिए कहा गया था। तब तक विमान रनवे के करीब आ चुका था और फिर से ऊंचाई पर जाने की बजाय रनवे से टकराकर आग का गोला बन गया।
Friday, 5 August 2016
बीजेपी प्रवक्ता ने कि आजम खान के परिवार पर आपत्तिजनक टिपण्णी
लखनऊ: बुलंदशहर में हुई बलात्कार की घटना के बाद सत्ता धारी समाजवादी पार्टी के क़ाबीना मंत्री आज़म खान पर बीजेपी प्रवक्ता आई पी सिंह के द्वारा किये गए एक ट्वीट ने हंगामा खड़ा कर दिया है. इस ट्वीट में सिंह ने कहा था कि अगर गैंग रेप आज़म की बीवी और बेटी से हो जाएगा तो आज़म की आँख खुलेगी. इस बयान पर आज़म खान ने कुछ नहीं कहा लेकिन समाजवादी पार्टी अपने क़द्दावर नेता के साथ खड़ी हो गयी और बीजेपी से इस बारे में माफ़ी मांगने को कहा वहीँ समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर हो रही राजनीति को लेकर बहुजन समाज पार्टी पर भी निशाना साधा.नीचे समाजवादी पार्टी की फेसबुक वाल पर जारी प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का बयान साझाकिया जा रहा है[समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि अर्थ का अनर्थ करने में भाजपा-आर0एस0एस0 का कोई जवाब नही। उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव नजदीक आते इन्होेंने सचमुच इसे ‘साजिश वर्ष’ बनाना शुरु कर दिया है। मो0 आजम खाँ समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कबीना मंत्री हैं जिनका धर्मनिरपेक्ष चरित्र सर्वविदित है। धर्मनिरपेक्षता में उनका अटल विश्वास उनके विरोधियों को खलता है। इसलिए वे हमेशा सांप्रदायिक ताकतों के निशाने पर रहते हैं। इन ताकतों का काम धर्म के आधार पर समाज को बाँटने और सामाजिक सौहार्द को चोट पहुँचाने का होता है। श्री आजम खाॅ ने चैधरी चरण सिंह और श्री मुलायम सिंह यादव के साथ गांधी जी और डा0 लोहिया के रास्ते पर चलते हुए मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव की धर्मनिरपेक्ष राजनीति को ताकत दी हैं।बुलन्दशहर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने त्वरित कार्यवाही कर अपराधियों को गिरफ्तार कराया और कत्र्तव्य पालन में ढिलाई करने वाले पुलिस अफसरों को दंडित किया। इसकी सराहना स्वयं महामहिम राज्यपाल श्री राम नाईक ने की। लेकिन भाजपा आर0एस0एस0 के लोग इस घटना को भी राजनीतिक रंग देने से बाज नही आ रहे हैं। श्री आजम खाँ के बयान को प्रसंग से हटकर पेश करते हुएसांप्रदायिक ताकतें पीड़ित परिवार की भावनाओं से भी खिलवाड़ कर रही है।FACEBOOK पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए यहां क्लिक करें-भाजपा के नेताओं ने आजम साहब के परिवार के बारे में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करके साबित कर दिया है कि उनका नैतिक स्तर क्या है ? आजम साहब पर हमला यों ही नही हुआ है, इसके पीछे एक सोची समझी साजिश है। सांप्रदायिक लोग उत्तर प्रदेश में सद्भाव बिगाड़ने में सफल नही हो सके तो उन लोगो ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक आजम साहब पर बेहूदा टिप्पणियाँ करनी शुरु कर दी है। भाजपा जैसे सांप्रदायिक दल से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है ? उत्तर प्रदेश गंगा-यमुनी सभ्यता का राज्य है। भाजपा ने अपने अनैतिक आचरण से इसे लांछित करने का काम किया है। लगता है भाजपा का संस्कारों से दूर-दूर तक कोई वास्ता नही है।भाजपा की लाइन पर ही बसपा अध्यक्ष भी चल रही है।उनकी एक ही रट है कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपतिराज हो। उनको अपना कार्यकाल याद करना चाहिए जब थानो में बलात्कार होते थे, जेल में हत्यांए होती थी और हर काम में मोटे कमीशन की वसूली होती थी। जनता त्रस्त रहती थी।भाजपा की सांस्कृृृतिक, संवेदनाशून्य राजनीति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के नेतृृत्व मेंउत्तम प्रदेश बनाने के लिए विकास और सद्भाव को बढ़ावा दिया जा रहा है। चुनावी वादे अधिकांशतः पूरे किये जा चुके हैं। राज्य के विकास में रोड़ा अटकाने और इसे गुजरात बनाने की साजिशों सेजनता सतर्क है। वह सांप्रदायिकता और जातिवाद की घातक राजनीति से उत्तर प्रदेश को बर्बाद नहीं होने देगी।
गाय पर राजनीती,और पालते है कुत्ते।
यूपी में दलितो और मुस्लिमों को खूभ भा रहाहैं जय भीम जय मीम का नारा पार्टी का जनसंर्पक हुआ तेज
2017 में होने वाले विधान सभा चुनाव में अभी वक्त हैं लेकिन राजनीतिक दल मैदान में उतर चुकेहैं। एमआईएम कई सीटों पर अपने उम्मीदवार के नामों का ऐलान कर चुकी है। जिल की उतरौला सीट सेपार्टी उम्मीदवार और देवीपाटन मंडल के अध्यक्षहाजी मोहम्मद निजामुल्लाह खान भी चुनावी मुहिममें जुटे हुए हैं।हाजि मोहम्मद निजामल्लाह खान अब्दुल्लाह ने अपने क्षेत्र के कई इलाको का दौरा किया और लोगों से पार्टी में जोडने कि अपील की । जनसंपर्क के दौरान अब्दुल्लाह के कहा कि यूपी में लोगो को खूभ भा रहा हैं जय भीम जय मीम का नारा।FACEBOOK पे हमारे पेज Raziya parveen को लाइक
करें-उन्होने मौजूदा सपा सरकार और दूसरी पार्टी की सरकारों पर जमकर निशाना साधा अब्दुल्लाह ने कहा की दलितो और मुसलमानो पर खूब जुल्म किया जा रहा है। यही वजह है कि आज यूपी में एमआईएम को आना पडा। उन्होने कहा कि यूपी में गरीबों, दलितो और कमजोरो की आवाज बनकर उनके साथ उनके साथ खडी रहेगी। और दमदारी से सब के हक की लडाई लडेगी।पार्टी जिला महासचिव फैसल रफीक ने बताया बूथ स्तर पर पार्टी का काम चल रहा है। जहां संगठन में पद खाली हैं, वहां पार्टी योग्य लोगों को जिम्मेदारी दे रहीं है। छात्र सभा के जिला सदर मोहम्मद अनवर ने बताया कि सदस्यता अभीयान चलाकर ज्यदा से ज्यादा लोगों को पार्टी में जोडा जा रहा है।बीजेपी की सरकार में दलित, ओबीसी और मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार- मायावती
अहमदाबाद।बसपा प्रमुख मायावती गुरुवार को पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात के अहमदाबाद पहुंचीं। यहां उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होने कहा कि राज्य में बीजेपी की सरकार है और बीजेपी की सरकार में ही सभी राज्यों में दलित, ओबीसी और मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहे हैं। इस दौरान मायावती ने आरएसएस पर भी पर हमला बोलते हुए कहा कि आरएसएस वअन्य कट्टरपंथी संगठनों ने माहौल खराब किया हुआ है। बीजेपी और आरएसएस ने मिलकर गोरक्षा के नाम पर मुस्लिमों को भी खूब सताया है और अब वह दलितों को निशाना बना रहे हैं।गुजरात की सीएम का इस्तीफा बीजेपी का दिखावा मायावती ने आगे कहा, ‘दलितों पर होता अत्याचार ऐसा लगता है जैसे मुझ पर अत्याचार किया जा रहा है। यह बेहद ही दुख की बात है कि दलितों को पीटा जा रहा था और लोग केवल खड़े हो कर देख रहे थे। बीजेपी वाले जनता की आवाज को दबाना चाहते थे यहां तक कि राजकोट में पीड़ितों को बिना इलाज के छोड़ दिया गया। उन्होने आगे कहा, ‘बीजेपी ने दलितों को दिखाने के लिए सीएम का इस्तीफा लिया है। बीजेपी दलितों के मुद्दे पर गंभीर नहीं है।’ उन्होंने कहा कि मैं यहां तक ना पहुंच पाऊंइसलिए बीजेपी ने मेरे खिलाफ घटिया बयान दिलवाया जिससे सभी का ध्यान इस मुद्दे से हटायाजा सके।बीजेपी ने की मुद्दे को दबाने की कोशिशबसपा प्रमुख ने कहा, “पूरे गुजरात में दलितों काबुरा हाल है यहां पर दलितों को प्रताड़ित किया जा रहा है। पुलिस ने भी अभी तक मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है। ” उन्होंने कहा, “पूरे देश का इस मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए मेरे खिलाफ साजिश के तहत अभद्र भाषा का इस्तेमाल कराया। यह सब कुछ एक साजिश के तहत किया गया।” उन्होंने गोरक्षा के नाम पर तथाकथितगोरक्षकों से हिंसा व क्रूरता त्याग कर अहिंसक गोरक्षक बनने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी उत्तर प्रदेश में चुनाव को ध्यान में रखकर दलितों के साथ भोजन करना का दिखावा कर चुके हैं। इतना ही नहीं गुजरात की भाजपा सरकार ने मामले को दबाने की पूरी कोशिश की जबकि वर्षों तक वहां सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी भी खामोश रही। हलांकि इस प्रकरण से पहले भी कई जघन्य घटनाएं यहां हो चुकी हैं।कार्रवाई के लिए मजबूर हुई सरकारउन्होंने आगे कहा कि सरकार हरकत में आयी लेकिन काफी आधे-अधूरे मन से। लेकिन संतोष की बात यह हैकि ऊना की जघन्य घटना के खिलाफ पूरे देश में सर्वसमाज के लोग खड़े हुए जिससे बीजेपी के दलित-विरोधी चाल, चरित्र व चेहरे का तीव्र विरोध हुआ। मायावती ने आगे कहा कि उन्होंने उनकी लड़ाई देश की राजधानी व संसद में भी खूब लड़ी जिससे अन्याय के खिलाफ संघर्ष को काफी मददमिला। इसका असर यह हुआ कि भाजपा की गुजरात सरकार को दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा।केंद्र सरकार की नीयत में खोट बसपा प्रमुख ने कहा, “दलितों के खिलाफ संगठित तौर पर जुल्म तथा अन्याय-अत्याचार के खिलाफ व खासकर ऊना कांड के मामले में सर्वसमाज के लोगोंका सहयोग काफी सराहनीय है। अगर ऐसा नहीं होता तो भाजपा की सरकारें अपनी गलतियों व कमियों को जल्दी से मानने को तैयार नहीं होती। यही गलत रवैया केंद्र की मोदी सरकार का अभी तक भी लगातार बना हुआ है। केंद्र की वर्तामान भाजपा सरकार द्वारा देश में स्वच्छता का अभियान चलाकर व फोटो छपवाने के लिए झाडू लगाकर वाहवाहीलूटने का सस्ता प्रयास तो किया जाता है। लेकिन लाखों सफाईकर्मियों को मशीनों से सफाई का काम करने से वंचित रखकर उन्हें परम्परागत तौर पर नरकीय जीवन जीने को मजबूर किया जाता है। जो कि सरकार की नीयत में असली खोट को दर्शाता है।”
सपा सरकार की नाक के नीचे 50 रूपये में बिक रहे रेप के वीडियो
यूपी। अखिलेश राज में यूपी की हालत किसी से छुपी नहीं है। महिलाओं पर होते दिन-रात अत्याचार ने सपा सरकार की महिलाओं के प्रति सुरक्षा व्यवस्था को खोल कर रख दिया है। लेकिन राज्य में आलम यह है कि अब महिलाओं के साथ होते रेप की वीडियो खुले आम बिक रही है। पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे होते इस काम की भनक तक उनको नहीं है।उत्तर प्रदेश की दुकानों में पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे रेप के सैकड़ों-हजारों विडियो रोज बेचे जा रहे हैं जिनकी कीमत मात्र 50 रुपयेसे 150 रुपये तक है। हालांकि वीडियो का रेट इस बात पर निर्भर करता है कि ये कितनी ‘एक्सक्लूसिव’ हैं। इन वीडियो अवधि 30 सेकंड सेलेकर पांच मिनट तक होती है। हैरत की बात यह है कि यह सब सपा सरकार की पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। रेप की वीडियो जिसे भी चाहिए होती है वहडीलर सिर्फ उनसे ही बात करता है जो किसी भरोसेमंद कस्टमर का रेफरेंस लेकर आते हैं।आगरा के कासगंज मार्केट में एक दुकानदार ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताते हुए कहा कि ‘पॉर्न अब गुजरे जमाने की बात हो चुकी है। असल जिंदगी के अपराध अब जोर पकड़ रहे हैं। डीलर ये विडियो सीधे आपके स्मार्टफोन में डाउनलोड कर देता है या आपकी पेन ड्राइव में डाल देता है। ।एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बात करते हुए बताया कि रेपिस्ट्स अक्सर अपराध को अंजाम को देते वक्त अपने फोन में इसकी विडियो भी बनाते हैं। बाद में वे इसका इस्तेमालपीड़िता को ब्लैकमेल करने और उसे दोबारा अपना शिकार बनाने में करते हैं। विडियो पब्लिक करने की धमकी देकर वे पीड़िता को पुलिस के पास जाने से भी रोकते हैं। उन्होंने कहा,’विडियो को ऑनलाइन पोस्ट करने की धमकी बेहद खतरनाक होती है।आगरा सिटी के एसपी सुशील चंद्रभान ने कहा कि हमने ताजगंज और सदर इलाकों में रेड डालकर एक शख्स को ऐसे विडियो और पाइरेटेड फिल्म बेचने केजुर्म में गिरफ्तार भी किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस चलन को रोकना लगभग नामुमकिन होगा।
पीपली लाइव के फिल्मकार महमूद फारूकी को रेप केस में 7 साल की सजा
‘पीपली लाइव’ के सह निर्देशक महमूद फारूकी को दिल्ली के एक ट्रायल कोर्ट ने रेप केस में 7 सालकी सजा सुनाई है. साथ ही उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.कोर्ट के मुताबिक, अगर उन्होंने जुर्माना नहीं भरा, तो उन्हें तीन महीने और जेल में रहना होगा. फारूकी पर एक अमेरिकी महिला से रेप का आरोप है.Mahmood Farooqui case: Court also imposed fine of Rs fifty thousand, if fine not given,then three months sentence will be added— ANI (@ANI_news)
अब ट्रैफिक नियम तोड़ेंगे तो भारी जुर्माना आपके ऊपर बोझ बनकर गिरेगा।
कैबिनेट ने सड़क सुरक्षा विधेयक को मंजूरी दे दी है. पीएम मोदी के अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद इसे हरी झंडी दिखाई गई है और ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को रेड सिग्नल भी दिखा दिया गया है.इस विधेयक में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रस्ताव है.ट्रैफिक तोड़ा- भरना पड़ेगा 10 गुना ज्यादा जुर्माना*.हिट एंड रन- मुआवजा राशि 25,000 रूपये से बढ़ाकर दो लाख रुपए*.सड़क दुर्घटना में मौत- 10 लाख तक का मुआवजा*.शराब पीकर गाड़ी चलाना- 10 हजार तक का जुर्माना*.तेज रफ्तार- 1 हजार से 4 हजार तक का जुर्माना*.बगैर इंश्योरेंस गाड़ी चलाना- 2000 का जुर्माना या जेल*.बिना हेलमेट गाड़ी चलाना- 2000 का जुर्माना या लाइसेंस रद्द*.इमरजेंसी गाड़ियों को रास्ता नहीं दिया- 10 हजार का जुर्माना*.बच्चा ड्राइव कर रहा है तो गाड़ी मालिक और माता-पिता दोषी, रजिस्ट्रेशन रद्द होगा
क़ुरबानी के मसाइल जानवर को भूका प्यासा ज़भा ना करे।
प्यासा ज़बह न करे_हज़रते मुफ़्ती अमजद अली आज़मी अलैरहमा फरमाते है : क़ुरबानी से पहले उसे चारा पानी दे दे यानि भूका प्यास ज़बह न करे और एक के सामने दूसरे को न ज़बह करे और पहले से छुरितेज़ कर ले ऐसा न हो कि जानवर गिराने के बाद उस के सामने छुरी तेज़ की जाए।
*✍🏽बहरे शरीअत, 3/352*
यहाँ एक अज़ीबो गरीब हिकायत मुलाहजा हो चुनांचे...
हज़रते अबू ज़फ़र अलैरहमा फरमाते है : एक बार में ने ज़बह के लिये बकरी लिटाई इतने में मशहूर बुज़ुर्ग हज़रते अय्यूब सख्तियानी इधर आ निकले, में ने छुरी ज़मीन पर दाल दी और गुफ्त गु में मशगूल हुवा, दरी अस्ना बकरी ने दिवार की जड़ में अपने खुरो से एक गढ़ा खोदा और पाउ से छुरी उस में धकेल दी पर उस पर मिटटी डाल दी ! हज़रते अय्यूब सख्तियानी फरमाने लगे : अरे देखो तो सही ! बकरी ने ये क्या किया ! ये देख कर मेने पुख्ता अज़्म कर लिया कि अब कभी भी किसी जानवर को अपने हाथ से ज़बह नही करूँगा।
*✍🏽हयातुल हैवान, 2/61*
ईस हिकायत से मआज़ल्लाह ये मुराद नही कि ज़बह करना कोई गलत काम है। बस इस तरह के वाक़ीआत बुज़ुर्गो के ग़ालबए हाल पर मब्नी होते है। वरना मसअला येही है कि अपने हाथ स
*✍🏽बहरे शरीअत, 3/352*
यहाँ एक अज़ीबो गरीब हिकायत मुलाहजा हो चुनांचे...
हज़रते अबू ज़फ़र अलैरहमा फरमाते है : एक बार में ने ज़बह के लिये बकरी लिटाई इतने में मशहूर बुज़ुर्ग हज़रते अय्यूब सख्तियानी इधर आ निकले, में ने छुरी ज़मीन पर दाल दी और गुफ्त गु में मशगूल हुवा, दरी अस्ना बकरी ने दिवार की जड़ में अपने खुरो से एक गढ़ा खोदा और पाउ से छुरी उस में धकेल दी पर उस पर मिटटी डाल दी ! हज़रते अय्यूब सख्तियानी फरमाने लगे : अरे देखो तो सही ! बकरी ने ये क्या किया ! ये देख कर मेने पुख्ता अज़्म कर लिया कि अब कभी भी किसी जानवर को अपने हाथ से ज़बह नही करूँगा।
*✍🏽हयातुल हैवान, 2/61*
ईस हिकायत से मआज़ल्लाह ये मुराद नही कि ज़बह करना कोई गलत काम है। बस इस तरह के वाक़ीआत बुज़ुर्गो के ग़ालबए हाल पर मब्नी होते है। वरना मसअला येही है कि अपने हाथ स
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