‘पूरे हुए वादे, अब हैं नए ईरादे’ यही नारा उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सरकार की उपलब्धि को लेकर पूरे राज्य में इस्तेहार के रूप में चौक-चौराहों पर टंगवा दिया है। अनुमानत इस पर सरकार ने करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।लेकिन हकीकत देखिए कि कानपुर जैसे शहर में एक गरीबबाप के कंधे पर सरकारी अस्पताल परिसर में बीमार बेटा इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। किस तरह से लोकतंत्र के नाम पर एक शासन व्यवस्था व संविधान प्रदत समान अधिकार के आगोश में गरीब आदमी स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव में दम तोड़ देता है और व्यवस्था ऐसी कि किसी को भी कोई फर्क नहीं पड़ता है।दरअसल, फजलगंज के रहने वाले सुनील के बेटे का बदन बुखार से तप रहा था। इलाज के लिए पिता ने समाजवादी एंबुलेंस को बुलाना चाहा, लेकिन नहीं मिली। अपने ही साधन से बेटे को अस्पताल पहुंचाया तो स्ट्रेचर नहीं मिली। बेटे को कंधे पर लादकर पिता अस्पताल में डॉक्टरों को ढूंढने लगा। काफी देर तक यही सिलसिला चलता रहा, न तो स्ट्रेचर मिली और न ही डॉक्टर। मासूम ने तड़प- तड़प कर पिता के कंधे पर हीदम तोड़ दिया।
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Tuesday, 30 August 2016
मध्य प्रदेश विधानसभा में भी जैन धर्मगुरु ने दिया था नग्न अवस्था में भाषण
भोपाल/चंडीगढ़: जुमे के रोज़ हरियाणा की विधानसभा के पटल पर दिगंबर समाज के जैन संत तरुण सागर ने जब भाषण दिया तो उस पर ज़बरदस्तहंगामा हो गया. हंगामे के पीछे एक वजह थी कि धार्मिक गुरु का एक विधानसभा में भाषण देना और वो भी नग्न अवस्था में, सोशल मीडिया पर निंदा का पात्र रहा वहीँ कुछ लोगों ने उनके दिए गए बयान जिसमें उन्होंने औरतों के बारे में कहा था उसकी निंदा की लेकिन ऐसा नहीं था कि तरुण सागर पहले धार्मिक नेता थे जो विधानसभा से भाषण दे रहे थे. मध्यप्रदेश की विधानसभा में भी एक दिगंबर संत आचार्य विद्यासागर अपना भाषण दे चुके हैं. एक महीने पहले दिया गया उनका भाषण सोशल मीडिया में बिलकुल चर्चा का विषय नहीं बना था. बताया जाता है कि जब आचार्य विद्यासागर विधानसभा में आये थे उनका स्वागत करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टी के लीडर ख़ास उत्साहित नज़र आये. मुख्यमंत्री शिव राज सिंह चौहान भी काफ़ी ख़ुश नज़र आये थे. आचार्य विद्यासागर लेकिन सोशल मीडिया की नज़रों से बच गए.
अगर स्कूलों में सूर्य-नमस्कार लाज़्मी हुआ, तो मुस्लिम बच्चे पढ़ाई छोड़ देंगे : अबु आज़मी
मुम्बई : आज़म खान से भी एक कदम आगे बढ़कर सपा नेता अबु आज़मी ने मुम्बई में एलान किया है किअगर BMC स्कूलों में सूर्य-नमस्कार को अनिवार्य किया गया तो मुस्लिम बच्चे पढ़ाई छोड़ देंगे। मुलायम सिंह यादव के करीबी अबु आज़मी महाराष्ट्र के सपा प्रमुख और विधायक हैं। अब आज़मी का कहना है कि ये नोटिस हम मुस्लिमों को कबूल नही है। हमारे बच्चे ज़ाहिल हो जाएँ पर सूर्य नमस्कार नही करेंगे।मुम्बई के म्युनिसिपल कारपोरेशन के BMC स्कूलों में चार लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं और ज्यादातर बच्चे गरीब घरों से आते हैं। इससे पहले जब BMC के स्कूलों में वन्देमातरम गाने की बात कही गई तो भी मुस्लिम नेताओं ने उसका विरोध किया था।कभी दाऊद इब्राहिम के नज़दीकी कहे जाने वाले अबु आज़मी का कहना है कि बीजेपी और शिवसेना कीसाज़िश के तहत BMC स्कूलों में सूर्य-नमस्कार को अनिवार्य करने के लिए नोटिस जारीकिया गया है। फिलहाल अबु आज़मी इस बार सूर्यनमस्कार को सीधे राजनीति से जोड़कर पूरे माहौल का फायदा उठाना चाहते हैं। ये विवाद उस वक़्त खड़ा हुआ जब BMC के सदन में बीजेपी ने सूर्यनमस्कार को स्कूलों में अनिवार्य करने का प्रस्ताव पिछले सप्ताह पारित किया था। बहरहाल मुस्लिम समुदाय के गरीब स्थानीय नागरिक जो अपने बच्चों को मुम्बई के महँगे निजी स्कूलों में नही पढ़ा सकते हैं वो इस नए हंगामे से काफी परेशान दिखरहे हैं।
सऊदी किंग की दरियादिली मज़लूम फिलीस्तीनियों को फ्री में कराएँगे हज।
रियाद: सेवक हरमैन अल शरीफैन शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज ने फिलिस्तीनियों के साथ जज़्बा सद्भावना के तहत फिलीस्तीनी शहीदों और असीरान के एक हजार परिवार का रियाज सरकार की मेजबानी में हज व्यवस्था का आदेश दिया है।Facebook पे हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करियेअल अरबिया डॉट नेट के अनुसार सऊदी प्रधान शाह सलमान बिन अब्दुल अजीज ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अनुकूलन परंपरा से फ़िलिस्तीनी शहीदों और असीरान के एक हजार परिवारों के लिए सन 1437 हिजरी के हज के अवसर पर सरकारी खर्च पर हज का इन्तिज़ाम करें।इस बीच सेवक हरमैन विशेष हज कार्यक्रम के प्रभारी और मंत्री धार्मिक मामलों के इरशाद अल शेख सालेह बिन अब्दुल अजीज बिन मोहम्मद आले शेख ने शाह सलमान से एक हजार फिलीस्तीनियों के हज के आदेश पर उन्हें विशेष धन्यवाद दिया है। अल शेख सालेह अल शेख का कहना है कि शाह सलमान का पीड़ित फिलीस्तीनी भाइयों के साथ भाईचारे और प्रेम की भावना सराहनीय है। इस्लाम के पांचवें फर्ज़ को चुकाने में फिलिस्तीनियों को जोड़कर शाह सलमान ने साबित किया है कि वह फ़िलिस्तीनी राष्ट्र से गहरी सहानुभूति रखते हैं।
राजिस्थान:एम्बुलेंस ना आने की वजह से तड़प तड़प के मर गयी ये महिला।
राजस्थान:सुविधाओं की कमी और देश के मेडिकल सिस्टम का ढंग से काम न करना तो किसी से छुपा हुआ नहीं है। इलाज न हो पाने के कारण मौत होना तो इस देश में पहले से ही आम बात ही थी बावजूद इसके की भारत की केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार बेहतर सुविधा देने का दावातो करते है लेकिन जब इनके दावे असल जिंदगी में काम न आ पाए तो उसका आम और गरीब जनता को क्या फायदा। मौत के बाद जांच कराने और दोषियों को सजा देने का दावा किया जाता है लेकिन उस वक़्त उस जांच और कार्रवाई का लोग क्या करेंगे जब उनके अपनों ने आखिरी सांस तक यही उम्मीद लगाई हो कि शायद हस्पताल जाकर इलाज से हम ठीक हो सकें। ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है राजस्थान के खेड़ली गांव से जहाँ माधुरी शर्मा नाम की महिला को हस्पताल में दाखिल कराया गया लेकिन वहां आराम न मिलने पर जब उसे दुसरे हस्पताल में रैफर किया गया। दुसरे हस्पताल जाने के लिए एम्बुलेंस का इंतज़ार कर रहे इस महिला और उसके पति को काफी देर इंतज़ार करना पड़ा। जिसके चलते महिला बेहोश हो गई। जब इस महिला का पति डॉक्टर के पास गया तो डॉक्टर ने उसके लिए कुछ नहीं किया। ढाई घण्टे इंतज़ार के बाद भी जब एम्बुलेंस नहीं आई तो उन्हें मिलने आये लोगो ने हंगामा शुरू कर दिया जिसे देखते हस्पताल से डॉक्टर भाग गए और महिला ने वहीँ दम तोड़ दिया।
आरएसएस बना रहा मंदिरों को हथियारों का गोदाम : केरल मंत्री
केरल : के.सुरेंद्रन केरल के मंत्री हैं उन्होने आरएसएस पर इल्ज़ाम लगाया कि आरएसएस राज्य में मंदिरों को ‘हथियारों का गोदाम’ बना रहा है। देवास्वोम मंत्री सुरेंद्रन ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा कि माकपा नीत राज्य सरकार को इस सिलसिले में बड़ी तादाद में शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने इसके साथ ही कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘मुझे आरएसएस समेत संगठनों की तरफ से देवास्वोम बोर्ड के तहत आने वाले मंदिरों में गैर कानूनी सरगरमियों के बारे में विभिन्न शिकायतें मिल रही हैं।मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने कहा कि आरएसएस ने मंदिरों को अपनी शाखा बना लिया है.आरएसएस कार्यकर्ता मंदिरों में हथियार छुपाते हैं. ”सरकार को मंदिरों में आरएसएस शाखाओं की अवैध गतिविधियों की कई शिकायतें मिली हैं. इस तरह की शाखाओं पर सरकार कड़े कदम उठाएगीउन्होने कहा यह एक सोंची समझी चाल है जिससे श्रद्धालुओं को मंदिरों से दूर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर अनुष्ठान और विश्वास के केंद्र हैं और किसी को भी उपासना स्थलों को असामाजिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बनाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘सरकार इस पर रोक लगानेके लिए मजबूती से मुदाखिलत करेगी।’उन्होंने दावा किया कि संघ मंदिरों को हथियारों का स्टोरहाउस बनाकर लोगों को इनसे दूर करने की कोशिश कर रहा है. वह अपने कैडर कोहथियार की ट्रेनिंग भी दे रहा है. गौरतलब रहें कि इसी महीने केरल में एक बीजेपी कार्यकर्ता की घर में बम बनाते दौरान ब्लास्ट से मौत हो गई थी।
झारखंड में गौ भक्तों द्वारा गाय के नाम पर मुस्लिम और दलितों का खून बहाया जा रहा है!
हजारीबाग : अल्पसंख्यक, दलित, कमजोर और गरीब सभी को सताया जा रहा है. राज्य में माहौल बिगड़ा हुआ है. सरकार इसे रोकने में नाकाम है. यह बातें बगोदर भाकपा माले के पूर्व विधायक विनोद सिंह ने कही. हजारीबाग में सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि राज्य में जानवरों के नाम पर इंसानों का खून बहाया जा रहा है. बालूमाथ में दो बेगुनाह की हत्या करने की घटना से लेकर तोंपचाची गोली कांड की घटना में केंदीय अल्पसंख्यक आयोग की जांच रिपोर्ट आ चुका है. फिर भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है. इससे साबित होता है की झारखंड की हुकूमत की खुली छुट है ये सब करने के लिए।गौरतलब है की हजारीबाग के पेलवल थाना के पबरा में गाय के नाम पर मारपीट और समान जला देने की घटना सियासत हिन्दी ने प्रमुखता से न्यूज़ चलायी और इस घटना को उजागर किया। हजारीबाग के पेलावल में गो भक्तों द्वारा उत्पात मचाये जाने की घटना की जांच के लिए माले और एआइपीएफ(आल इंडिया पीपुल्स फोरम) कीटीम वहां गयी थी. टीम में पूर्व विधायक विनोदसिंह, जावेद इसलाम, जियाउल्लाह व पच्चू राणा शामिल थे. टीम ने बताया कि 27 अगस्त की यह घटना सुनियोजित थी. पुलिस द्वारा गाड़ी को धक्का मारने की बात बेबुनियाद है. गाड़ी को हरना गांव में मंदिर के पास ट्रैक्टर से रोक कर हमला बोला गया और जला दिया गया. गाड़ी में सवार साहिला खातून के दोनों भाइयों व साथ जा रहे एक अन्य नौजवान को खींच कर पास के गड्ढे में डुबो कर मारा जा रहा था. मालूम हो की सालेहा खातून के शौहर झारखंड में राजमिस्त्री है. सालेहा खातून का मायके पेलावल है. वह अपने घर-परिवार का सामान लेकर अपने मायका पेलावल जा रही थी. योजनाबद्ध तरीके से घटना का अंजाम दिया गया. यह सब राज्य सरकार के इशारे पर हो रहा है.पूरे राज्य में बिगड़े माहौल पर एक सितंबर को ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम हजारीबाग समाहरणाल के सामने एक दिवसीय धरना देगा. पूरे राज्य में जमीन की लूट चल रही है. जमीन लूटनेवालों को सरकार संरक्षण दिया है. 21 सितंबर को हजारीबाग में रैली निकाली जायेगी.इसमें भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल होंगे. विनोद सिंह ने कहा कि पबरा 407 गाड़ी जलाने की घटना में पीड़ित परिवार से जाकर मिला.
बीफ पूरी तरह से बैन नहीं होना चाहिए-मोदी के मंत्री “रामदास अठावले”
केंद्र सरकार में मंत्री सामाजिक न्याय अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने मांग की है कि बीफ पर कंप्लीट बैन नहीं होना चाहिए. रामदास अठावले का कहना है कि गौ हत्याऔर गोमांस पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ हैइसलिए बाकी बीफ पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए.अटावले ने कहा कि अगर प्रतिबंध लगाया जाएगा तो उनकी पार्टी RPI इसका विरोध करेगी रामदास अठावले का यह भी कहना है कि किसानों को इस बात की छूट होनी चाहिए कि जो बैल भैंस बूढ़े हो गए हैं जो उनके काम के नहीं है उनके मांस पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए.
लड़कियो के एस्कार्ट पहनने पर आलोचना और विधानसभा में लोग आते है नंगे।
नई दिल्ली:जैन मुनि तरुण सागर महाराज को लेकर चल रहे विवाद में अब टीवी पत्रकार बरखा दत्त भी कूद पड़ी हैं।Facebook पर हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करेंसोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर ट्वीट कर बरखा दत्त ने लिखा है कि कंफ्यूज हूं- एक धार्मिक नेता नग्न रहकर विधानसभा को संबोधित कर सकते हैं लेकिन विदेशी महिला पर्यटक स्कर्ट नहीं पहन सकतीं। इसके जरिये बरखा ने मुनि तरुण सागर महाराज के संबोधन के मामले के साथ ही पर्यटन मंत्री डॉ.महेश शर्मा के बयान पर भी निशाना साधा है जिसके लिए उनकी ट्विटर पर काफी आलोचना भी हो रही है। आप को बता दें कि पर्यटन मंत्री का ब्यानजिसमें उन्होंने कहा कि विदेशी महिला सैलानियों को रात के समय छोटे कपड़े पहनकर नहीं निकलना चाहिए।
मदर टेरेसा को संत बता विश्व हिन्दू परिषद् कर रहा धर्मांतरण
नई दिल्ली: मदर टेरेसा को संत का दर्जा दिए जाने पर VHP ने विरोध जताते हुए कहा है कि ऐसा करना धर्मांतरण को बढ़ावा देना है। VHPके इंटरनेशनल सचिव सुरेंद्र जैन ने कहा है कि मदर टेरेसा को संत बनाना भारत के लिए खतरेकी घंटी है इससे तो भारत में धर्मांतरण बढ़ेगा और विदेश से इसके लिए और फंड आने का रास्ता साफ होगा और समाज में और अशांति फैलेगी। आज के वक़्त में किसी को संत बनाना बिलकुल ठीक नहीं है। देश में मदर टेरेसा के नाम पर धर्मांतरण आज की बात नहीं बल्कि काफी वक़्त से चला आ रहा है।
कुरआन पर बेबुनियाद इलज़ाम लगाने वालो ने खुद ही टेके इस अज़ीम किताब के आगे घुटने।
कुरआन ऐ हकीम को फाड़ना या उसके नुस्ख़े जलाना दुश्मनाने दीन के लिए ये कोई नई बात नही है, ये साज़िशें बहुत वक़्त पुरानी है, जब से दुनिया मे कुरआन आया है तभी से लोग इसके दुश्मन है और कयामत तक ये दुश्मन बने रहेंगे, हिन्दुस्तान मे अंग्रेजी हुकूमत के वक़्त तकरीबन तीन लाख कुरआन के नुस्खों को आतिश नज़र किया गया था
(उन्हें जला दिया गया था)
लेकिन कुरआन की रूह पर इस का ज़र्रा बराबर भी असर नही हुआ और नाहि कुरआन की अज़मत पर किसी तरह का असर पढ़ा
आइये जानते है कुरआन क्यूँ नही मिटाया जा सकता??
बेशक कुरआन अल्लाह की किताब है .@
यह बात सही है कि कुरआन में कुछ अच्छी बातें लिखी हैं लेकिन यह तो हर धर्म की किताबों में लिखी होती हैं और कोई भी समझदार इंसान लिख सकता है, फिर हम कुरआन को अल्लाह की किताब क्यों माने, क्या सबूत है कि कुरान अल्लाह की तरफ से ही है ?
जवाब - मैं इस सवाल का जवाब कई पहलुओं से दूँगा, क्यों कि कुरान ने अलग पहलुओं से अल्लाह के कलाम (वाणी) होने के सबूत दिए हैं, अगर आप घहराई से बिना पक्षपात के विचार करेंगें तो मैं आप को यकीन दिलाता हूँ कि कोई भी ज़रा भी शक बाकि नहीं रहेगा.
(1) पहली बात, अगर आप अरब का मुहम्मद (ﷺ) के टाइम का इतिहास पढेंगे जो इतिहास की बड़ी किताबों में आप को आसानी से मिल जाएगा, तोआप पाएँगे कि मुहम्मद (ﷺ) बिलकुल बिलकुल पढना लिखना नहीं जानते थे और तो और वो अपना नाम भी लिखना नहीं जानते थे और ना ही उन्हें शाइरी वगैरह का कोई शौक था,लेकिन अरब के लोग शाइरी के बादशाह थे वो अपना पूरा इतिहास और अपनी कई पीढयों के नाम भी शाइरी में ही बयान कर दिया करते थे,आप जानते हैं कि किसी भी भाषा या शब्दों का सबसे अच्छा इस्तिमाल एक शायर (कवि) ही करता सकता है उस ज़माने में अरब में एकसे बढ़कर एक शायर मौजूद थे, हर साल वहां शाइरी की बहुत बड़ी प्रतियोगिता होती थी जिस में दूर दूर के लोग भाग लेते थे, जीतने वाले शायर का शेर काबा की दीवार पर लगाया जाता था और उस शायर को सब सजदा किया करते थेअब ऐसे माहौल में मुहम्मद (ﷺ) अचानक एक कलाम पेश करते हैं और दावा करते हैं कि यह कलाम अल्लाह की तरफ से है और अगर तुम्हे इसमें शक है तो तुम भी ऐसा कलाम बना कर दिखाओ (सूरेह बक्राह-23,24).आप तसव्वुर कीजये एक तरफ कोई एक अनपढ़ आदमी है जिसे सब जानते हैं कि यह हम में 40 साल रहा है इसने कहीं से तालीम हासिलनहीं की और दूसरी तरफ इक़बाल, ग़ालिब, मीर और हाली जैसे महान शायर मौजूद हैं जो अपनी शानदार शाइरी के लिए मशहूर हैं, वो अनपढ़ आदमी इन शायरों को चैलेंज कर कह रहा है कि तुम सब मिलकर भी मेरे मुकाबले का कलाम पेश नहीं कर सकते, ये बड़े बड़े शायरउस आदमी से दुश्मनी रखते हैं उसके खिलाफ़ जंग लड़ते हैं उसकी दुश्मनी में अपनी जाने और माल खर्च करते हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि वे सब मिलकर भी एक पेज भी ऐसा नहीं लिख सके जिसको वे कुरआन के मुकाबले में दुनियां के सामने पेश करके कह सकेंकि देखो हमने मुहम्मद (ﷺ) को झूटा साबित कर दिया है.इससे साफ़ ज़ाहिर है कि यह अज़ीम कलाम किसी अज़ीम हस्ती ही का हो सकता है कोई इंसान तो अपने लिखे हुए कलाम के बारे में ऐसा दावा नहीं कर सकता.
(2) जो लोग अरबी भाषा का थोड़ा भी ज्ञान रखते हैं वो यह हकीक़त अच्छी तरह जानते हैं कि कुरआन ने अरबी भाषा को नई ऊँचाइयाँ दी हैं यानि कुरआन में बहुत हाई स्टेंडर्ड की अरबी शैली का इस्तिमाल किया गया है इतने स्टेंडर्ड की अरबी की कोईकिताब इसके बाद कभी नहीं लिखी जा सकी, आज भी जो कोई कुरआन की शैली के 10% करीब की अरबी बोले या लिखे उसे दुनियां में हाई स्टेंडर्ड अरबी बोलने वाला माना जाता है, इतने हाई स्टेंडर्ड की अरबी कोई आम इंसान लिखे यह नामुमकिन है.इससे भी यह बात साफ़ ज़ाहिर होती है कि कुरआन कोई आम किताब नहीं है.
(3) कुरआन में अल्लाह तआला ने दावा किया है कि इस में कोई ज़रा भी बदलाव नहीं कर सकता क्यों कि हम इसकी हिफाज़त करते हैं(सूरेह हिज्र-9) इस बात का भी इतिहास गवाह है कि कुरआन में आज तक कोई एक नुक्ते का भी बदलाव नहीं हुआ, वरना यूं तो बाइबल भी अल्लाह की किताब है लेकिन सब जानते हैं कि उसके कितने ही नए एडिशन कुछ ना कुछ बदलाव के साथ आते रहते हैं, लेकिनकुरआन 1450 सालों से ऐसा ही है.इससे भी पता चलता है कि कुरआन कोई आम किताब नहीं है.
(4) आप जानते हैं कि कुरान करीब 600 पेज की एक बड़ी और मोटी किताब है इसके बावजूद यह लाखो नहीं बल्कि करोड़ों लोगोंको ज़ुबानी याद है, और इसका कुछ ना कुछ हिस्सा तो हर मुस्लमान को याद होता है, यह रुतबा दुनियां की और किसी भी किताब को हासिल नहीं है, आप सोच कर देखें किसी छोटी सी किताब को भी वर्ड-टू-वर्ड ज़ुबानी याद करना कितना मुश्किल काम है और अगर वो कोई 600 पेज की मोटी किताब हो तब तो यह काम बेहद मुश्किल हो जाता है और इतना ही नहीं फिर अगर वो किताब किसी ऐसी भाषामें हो जो आप को समझ ही नहीं आती तो ??? लेकिन कुरान को अल्लाह ने कुछ ऐसा बनाया है जो वो चमत्कारी ढंग से बड़ों का तो क्या कहना 12,13, साल का बच्चा पूरा कुरआन ज़ुबानी याद किया हुआ आप को मुसलमानों की हर गली या मोहल्ले में आसानी से मिल जाएगा यह तो आम है लेकिन ऐसे बच्चों की भी बहुत बड़ी तादाद है जिनको पूरा कुरआन याद है और उनकी उमर सिर्फ 6,7, और 8 साल है, अगर आप गौर करें तो यह कोई मामूली बात नहीं कि 600 पेज की एक मोटी किताब जो ऐसी भाषा में लिखी है जो गैर अरब को समझ नहीं आती और उसको छोटे छोटेबच्चे पूरा ज़ुबानी याद कर लेते हैं.इससे भी पता चलता है कि कुरआन कोई आम किताब नहीं है.
(5) कुरआन का एक कमाल यह भी है कि हर किताब तो एक खास तबके के लिए लिखि जाती है यानि लिखने वाला पहले यह फैसला कर लेताहै की मैं किस तरह के लोगों के लिए यह किताब लिख रहा हूँ कोई आम आदमी की समझ के अनुसार होती है और कोई बड़े एजुकेटिड लोगों को ध्यान में रख कर लिखी जाती है तो कोई ख़ास ज़माने और देश को ध्यान में रख कर लिखी जाती है, लेकिन कुरआन जितना अनपढ़ के लिखे हिदायत है उतना ही बहुत पढे लिखे के लिए भी हिदायत है, जैसे इसे पढ़कर आम लोग के ईमान लाने की बेशुमार मिसालें हैं ऐसे ही बहुत पढ़े लिखे एजुकेटिड लोगों के इस को पढ़ कर ईमान लाने की भी मिसालों की कमी नहीं यानि चाहे कोई मर्द हो या औरत, भारत से हो अफ्रीका से, अमीर घर से हो या गरीब घर से, बूढ़ा हो या नौजवान, बहुत पढ़ा लिखा हो या कम पढ़ा लिखा हो यह किताब सब को समझ में भी आती है और सब की रहनुमाई (मार्गदर्शन) भी करती है, इसी लिए कुरआन में अल्लाह ने फ़रमाया है कि- हमने कुरआन को नसीहत के लिए आसान बना दिया है, तो क्या कोई है नसीहत चाहने करने वाला ?(सूरेह क़मर-32)और बहुत ज्यादा गहराई में जा कर बात समझने वालों के लिए तो यह समुन्द्र के जैसा है,आज तक अलग अलग आलिमों की तरफ से कुरआन की हजारों बड़ी बड़ी तफसीरें (Commentary) लिखी जा चुकी हैं लेकिन हमेशा लिखने वाले कहते हैं कि हमने तो कुछ भी नहीं लिखा अभी तो बहुत ज्यादा लिखना बाकि है.यानि एक तरफ तो कुरआन इतना सादा है कि एक आम रेढ़ी चलाने वाला भी इससे फाएदा हासिल करता है और दूसरी तरफ गहराई इतनी कि कोई बड़े से बड़ा आलिम भी यह दावा नहीं करता कि मैंने पूरा कुरआन समझ लिया है अब और ज्यादा कुरान में कुछ नहीं है बल्कि वोयह ही कहता है कि जितना समझा है उससे कहीं ज्यादा समझना बाकि है.इससे भी ज़ाहिर होता है कि यह कोई आम किताब नहीं है.
(6) एक अहम पहलू यह भी है कि जब हम किसी बड़े कवि या लेखक को पढ़ते हैं तो हमेशा हम देखते हैं कि वक़्त से साथ साथ उस लेखक के ज्ञान, भाषा शैली और विचारों में विकास हुआ है यह ना मुमकिन है कि एक लेखक लम्बे समय तक कुछ लिखता हो और उसके लेखन में विकास न हुआ हो, इसी विचारों के विकास की वजह से एक ही लेखक की शुरू ज़िन्दगी की लिखी हुई बातों और आखिर ज़िन्दगीकी लिखी हुई बातों में विरोधाभास मिलना एक आम बात है, आप चाहे इकबाल को पढ़लें या ग़ालिब को या विलियम शेक्सपियर को या किसी भी लेखक को जिसने सालों लिखा हो आप को उसके लेखन में विकास और विरोधाभास साफ नज़र आएगा, क्यों कि हर इंसान के विचारों में विकास होता रहता है.लेकिन कुरआन 23 साल के लम्बे अरसे में लिखे जाने के बावजूद उसमे आप को कोई विकास नज़र नहीं आ सकता, और ना ही उसमे विरोधाभास पाया जाता है जिस मापदंड के विचार, भाषा शैली, ज्ञान और दावे उसमे शुरू में हैं आखिर तक वैसे ही हैं, यह किसी इंसान के वश की बात नहीं यह अल्लाह ही है जिसके ज्ञान में विकास नहीं होता क्यों कि वो पहले से ही सब जनता है, इसी लिए कुरआन में लिखा है कि- अगर यह कुरआन अल्लाह के बजाए किसी और की ओर से होता तो वे इसके भीतर बहुत विरोधाभास पाते (सूरेह निसा-82)इससे साफ़ ज़ाहिर है कि कुरआन किसी इंसान का लिखा हुआ नहीं है.
(7) अब कुछ कुरआन की की हुई भविष्यवाणयों पर नज़र डालये जो अब इतिहास बन चुकी हैं- कुरआन के नाज़िल होते वक़्त दुनियाँ में दो बहुत बड़ी सलतनतें थी एक रूमी सलतनत जो ईसाइयों की थी उसका बादशाह हरकुल (हरक्युलिस) था दूसरी ईरानी सलतनत जो मजूसयों (आग को पूजने वालों) की थी और उसका बादशाह खुसरो था, ईरानियों ने रूमयों को बुरी तरह हरा दिया था और रूमयों के फिर से उठने के कोई आसार नहीं थे, मक्के के मुशरिक इस पर खुशियाँ मना रहे थे और मुसलमानों से कहते थे कि देखो ईरान के आगके पुजारी विजय पा रहे हैं और रोमन पैगम्बरों के मानने वाले ईसाई हार पर हार खाते चले जा रहे हैं, इसी तरह हम भी अरब के बुत परस्त तुम्हें और तुम्हारे धर्म को मिटा कर रख देंगे.कुरआन ने ऐसे हालात में भविष्यवाणी की कि रूमी 10 साल के अन्दर फिरसे विजय पाएगें (सूरेह रूम), इसे सुनकर मक्का के मुशरिक मुसलमानों की मज़ाक उड़ाने लगे कि देखो मुस्लमान पागल हो गए हैं जो ऐसी बात कह रहे हैं जो मुमकिन ही नहीं है,लेकिन दुनियां ने देख लिया कि कुरआन की यह नामुमकिन भविष्यवाणी 9 साल के भीतर पूरी हुई, इतिहासकार भी हरक्युलिस की जीत को किसी चमत्कार से कम नहीं मानते.इससे भी पता चलता है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है.
(8) इतिहास से ही आप को पता चल सकता है कि एक वक़्त ऐसा भी था जब मुसलमानों की तादाद उँगलियों पर गिनने लायक थी और जो थे उनकी भी हालत गरीबी में ऐसी थी कि उनके पास अपनी हिफाज़त करने के लिए तलवारें भी ना के बराबर थी, जबकि उनके दुश्मन अनगिनत थे और बड़े बड़े सरदार थे जो मुसलमानों और इस्लाम को ज़मीन से मिटाने के लिए बेताब थे और देखने वाले समझ रहे थे कि अब मुसलमानों का बचना नामुमकिन है, ऐसे हालत में कुरआन ने दो भविष्यवाणी की एक मक्का शहर मुसलमान फ़तेह करेंगे और दूसरी लोग फ़ौज की फ़ौज इस्लाम क़ुबूल करेंगे (सूरेह नस्र).जिस वक़्त यह दोनों भविष्यवाणी हुई उस वक़्त इनसे नामुमकिन बात और कोई नहीं थी लेकिन कुछ ही अरसे बाद दुनियां ने ये दोनों भविष्यवाणी भी पूरी होती हुई देखली थी.इससे भी अंदाज़ा होता है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है.
(9) मक्का में मुहम्मद (ﷺ) का एक पड़ोसी था वो कुरैश का सरदार था उसका नाम अबू लहब था वो और उस की बीवी अल्लाह के रसूल के बहुतबड़े दुश्मन थे वो हर तरह से उन्हें सताता था, उसकी मौत से करीब 10 साल पहले कुरआन ने भविष्यवाणी की थी कि वो कभी ईमाननहीं लाएगा और उसकी मौत अज़ाब से होगी (सूरेह लहब), वो इस्लाम दुश्मनी में कुछ भी कर सकता था अगर वो ईमान क़ुबूल करलेता जैसे उसकी बेटी और दोनों बेटों ने किया तो कुरआन की भविष्यवाणी गलत साबित हो जाती लेकिन वो ऐसा ना कर सका और उसकी मौत भीबहुत बुरी बीमारी से हुई जिससे उस का शरीर सड़ गया था उसके परिवार के लोगों ने भी उसके शरीर को हाथ नहीं लगाया.इससे भी पता चलता है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है.
(10) कुरआन के नाजिल होने से बहुत पहले अल्लाह के एक पैगम्बर मूसा (अलैहिस्सलाम) के ज़माने में मिस्र में फिरौन नामीएक राजा को जो ज़बरदस्ती खुद को खुदा कहलवाता था अल्लाह ने अज़ाब के तौर पर दरया में डुबा कर मार दिया था उसका ज़िक्र ओल्ड टेस्टीमेंट में भी है,कुरआन में उसके बारे में भविष्यवाणी हुई थी कि उसकी लाश को अल्लाह एक दिन ज़ाहिर करेगा ताकि बाद में आने वालों लोगों के लिए वो इबरत की निशानी बने (सूरेह यूनुस-92).ध्यान रहे उसके अज़ाब से मरने के बारे में तो ओल्ड टेस्टीमेंट में ज़िक्र है लेकिन उसकी लाश पानी में गर्क नहीं होगी ऐसा कुरआन के अलावा किसी भी किताब में नहीं लिखा था,सन 1898 में चमत्कारी तौर पर उसके मरने के हजारों साल बाद उसकी लाश 'नील' नामी दरया के पास से मिली, जो ममी ना होनेके बावजूद भी हजारों साल तक गर्क नहीं हुई थी उसे आज भी मिस्र के म्युज्यम में देखा जा सकता है, उसकी लाश की पहचान और मिलने का विवरण 'डॉ. एलीड स्मिथ' की किताब ''royal mummies'' में देखा जा सकता है.अगर किसी इंसान ने हकीकत से आंखें बंद करने की कसम ही ना खा रखी हो तो यह एक बहुत बड़ा सबूत है कि कुरआन अल्लाह की किताब है.इनके अलावा भी कुरआन और सही हदीसों में बहुत सी भविष्यवाणयां हैं जो पूरी हुई हैं लेकिन वो इल्मी तरह की हैं इसलिए मैं उन्हें स्किप कर रहा हूँ, लेकिन एक बात साबित शुदा है कि अल्लाह और उसके रसूल की की हुई एक भी भविष्यवानि आज तक गलत साबित नहीं हुई है.
(11) अगर आप किसी लेखक से कहें की एक छोटी सी कहानी लिखो और उसमे फला फला शब्द इतनी इतनी बार आना चाहिए और फला फला शब्द नहीं आना चाहिए और फला फला शब्द जितनी बार पहले वाक्य में इस्तिमाल होगा दुसरे में भी इतनी ही बार होना चाहिए जैसी 5,6 कंडीशन आप लगादें तो आप अंदाज़ा कर सकते हैं कि लेखक पहले तो इन शर्तों के साथ कुछ लिख ही नहीं पाएगा और अगर लिख भी दिया तो वो जितना टूटा फूटा होगा आप खुद समझ सकते हैं.लेकिन कुरआन में अपनी बहतरीन शैली के साथ साथ गणित के पहलु से भी अनगिनत चमत्कार मौजूद हैं, मैं समझाने के लिए सिर्फ एक मिसाल देता हूँ, कुरआन मैं कहा गया है कि अल्लाह की नज़र में हज़रत ईसा (अ) की मिसाल हज़रत आदम (अ) के जैसी है (सूरेह आलेइमरान-59) यानि कि ईसा (अ) को बिना बाप के पैदा किया और आदम (अ) को बिना माँ बाप के पैदा किया,मायने के लिहाज़ से यह बात बिलकुल साफ़ है लेकिन अगर आप पूरे कुरआन में शब्द ''ईसा'' तलाश करें तो वो 25 बार पूरे कुरआन में आया है, और शब्द ''आदम'' भी पूरे कुरआन में 25 बार ही आया है, तो गिनती के लिहाज़ से भी यह दोनों एक जैसे ही हैं,अगर कुरआन में यह चीज़ें दो चार बार होती तो माना जाता कि यह इत्तिफाक से है, लेकिन यह गणित के चमत्कार तो कुरआन में अनगिनत हैं कुरआन में यह खोज अभी नई है और जारी है इसलिए इस टॉपिक पर अभी कुछ खास किताबें नहीं लिखी जा सकी, कुरआन में गणित के ऐसे चमत्कारों जो समझने के लिए आप इस लिंक की विडियो देखें -http://www.youtube.com/watch?v=Y96KuhAQBMIइस नई खोज से भी पता चलता है कि कुरआन इंसानी दिमाग की उपज नहीं है.
(12) कुरआन साइन्स की किताब नहीं है, उसका मकसद लोगों को साइन्स के बारे में बताना नहीं है लेकिन फिर भी ऐसी बहुत सीबातें कुरआन में हैं जिनकी पुष्टि आज साइन्स से होती है,मिसाल के तौर पर कुरआन में अल्लाह ने फ़रमाया - हमने हर जीवित चीज़ को पानी से पैदा किया है (सूरेह अंबिया-30) आज से पहले तो शायद लोग इस बात को ऐसे नहीं समझते होंगे जैसे अब हम साइन्स की मदद से इस आयत को समझ सकते हैं,एक जगह अल्लाह ने कुरआन में अजीब सी कसम खाई - कसम है सितारों के मरने या टूटने के मौक़े की, और अगर तुम जान लो तो यह बहुत बड़ी कसम है (सूरेह वकिअह-75) आज से पहले लोग इस आयत को भी ऐसे नहीं समझ सकते थे जिस तरह आज हम जानते हैं कि सितारा मरने के बाद एक बेहद ताकतवर ब्लैक होल में बदल जाता है, तो वाकई यह बहुत बड़ी कसम है,इसी तरह और बहुत सी आयतें हैं जिनमे अंतरिक्ष, जल चक्र, पहाड़ों के बारे में और माँ के पेट में बच्चे के बन्ने के स्टैप वगैरा के बारे में बताया गया है, जो अब साइंस की मदद से हमें सही सही समझमे आती हैं, इस टॉपिक को ज्यादा जानने के लिए यह(Bible, Quran and Science, Author Dr. Maurice Bucaille) नामी किताब पढ़ें,किसी को धोड़ी देर के लिए कोई गलत फहमी हो जाए तो और बात है वरना आज तक साइन्स ने जितनी भी तक्की की है वो कभी कुरआन के खिलाफ़ साबित नहीं हो सकी और उल्टा साइन्स ने कुरआन को सच ही साबित किया है और बहुतसी आयातों को समझने में मददगार साबित हुआ है.इससे भी साबित होता है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है.
(13) कुरआन को आप यह ना समझें कि इसमें कोई अलग ही बातें बताई गई हैं, कुरआन अपने से पहली आसमानी किताबों का विरोधी नहीं बल्कि वो तो उनकी बार बार पुष्टि करता है, बस वो यह कहता है की धर्म के ठेकेदारों ने उन किताबों में अपनी अकल से छेड़ छाड़ करके उनमे काफी कुछ गलत चीज़े मिलादी है और लोगों से कहते हैं कि यह ईश्वर की तरफ से है, वो भी अल्लाह ही था जिसने पहले वे किताबें नाजिल की थी और यह भी अल्लाह ही है जिसने कुरआन नाजिल किया है.इसके अलावा भी बहुत से पहलु हैं जिनसे कुरआन अल्लाह का कलाम साबित होता है लेकिन सबको एक पोस्ट में लिख देना मेरे लिए मुमकिन नहीं है, लेकिन एक ऐसे इंसान के लिए जो बिना पक्षपात के बातों को देखता और समझता है उसके लिए ये सबूत काफी हैं किकुरआन अल्लाह का कलाम है, और जिसने पक्षपात का चश्मा लगाया हुआ है उसके लिए हज़ार सुबूत भी कम हैं, वरना कुरआन में 6500 से ज्यादा आयतें हैं और ''आयत'' का मतलब ही ''निशानी'' होता है.हमारी दावत (पुकार) इसके सिवा कुछ भी नहीं कि हम मुहब्बत और हमदर्दी के साथ ज़मीन पर रहने वाले इंसानों को उनके असल रब का यह पैगाम पहुंचा दें जो हमारे पास उनकी अमानत है, हम आप से इसके बदले में कुछ नहीं चाहते हमारा बदला तो रब के जुम्मे है,और कुरआन की दावत इसके सिवा कुछ नहीं कि वो इंसानों को उस दिन से खबरदार कर दे जो अब करीब आ लगा है, जिस दिन यह दुनियां ख़त्म हो जाएगी और इंसान और उनके रब के बीच का पर्दा उठ जाएगा और इंसान बंद आखों से भी वो सब कुछ देख लेगा जिसे आज वो खुली आखों से भी देखना नहीं चाहता, जिस दिन हर ज़ालिम को उसके हर ज़ुल्म की सज़ा मिल कर रहेगी और हर नेक को उसकी हर नेकी काबदला मिलेगा जिस दिन फैसले हमारी कमज़ोर अदालते नहीं बल्कि इंसानों का रब खुद करेगा.कुरआन लोगों को बताना चाहता है कि तुम अच्छी बुरी ज़िन्दगी जी कर मिट्टी हो जाने के लिए पैदा नहीं किये गए हो बल्कि तुम्हारे अज़ीम रब ने एक अज़ीम स्कीम एक अज़ीम प्लान के तहत तुमको पैदा किया, अब जो चाहे अपने होने का मकसद इससे जान ले और जो ना चाहे ना जाने.
अब जिसके जी में आए वो ही पाए रौशनी
हम ने तो दिल जलाके सरे आम रख दिया..
(Islam Par BeBuniyaad iljam)
(उन्हें जला दिया गया था)
लेकिन कुरआन की रूह पर इस का ज़र्रा बराबर भी असर नही हुआ और नाहि कुरआन की अज़मत पर किसी तरह का असर पढ़ा
आइये जानते है कुरआन क्यूँ नही मिटाया जा सकता??
बेशक कुरआन अल्लाह की किताब है .@
यह बात सही है कि कुरआन में कुछ अच्छी बातें लिखी हैं लेकिन यह तो हर धर्म की किताबों में लिखी होती हैं और कोई भी समझदार इंसान लिख सकता है, फिर हम कुरआन को अल्लाह की किताब क्यों माने, क्या सबूत है कि कुरान अल्लाह की तरफ से ही है ?
जवाब - मैं इस सवाल का जवाब कई पहलुओं से दूँगा, क्यों कि कुरान ने अलग पहलुओं से अल्लाह के कलाम (वाणी) होने के सबूत दिए हैं, अगर आप घहराई से बिना पक्षपात के विचार करेंगें तो मैं आप को यकीन दिलाता हूँ कि कोई भी ज़रा भी शक बाकि नहीं रहेगा.
(1) पहली बात, अगर आप अरब का मुहम्मद (ﷺ) के टाइम का इतिहास पढेंगे जो इतिहास की बड़ी किताबों में आप को आसानी से मिल जाएगा, तोआप पाएँगे कि मुहम्मद (ﷺ) बिलकुल बिलकुल पढना लिखना नहीं जानते थे और तो और वो अपना नाम भी लिखना नहीं जानते थे और ना ही उन्हें शाइरी वगैरह का कोई शौक था,लेकिन अरब के लोग शाइरी के बादशाह थे वो अपना पूरा इतिहास और अपनी कई पीढयों के नाम भी शाइरी में ही बयान कर दिया करते थे,आप जानते हैं कि किसी भी भाषा या शब्दों का सबसे अच्छा इस्तिमाल एक शायर (कवि) ही करता सकता है उस ज़माने में अरब में एकसे बढ़कर एक शायर मौजूद थे, हर साल वहां शाइरी की बहुत बड़ी प्रतियोगिता होती थी जिस में दूर दूर के लोग भाग लेते थे, जीतने वाले शायर का शेर काबा की दीवार पर लगाया जाता था और उस शायर को सब सजदा किया करते थेअब ऐसे माहौल में मुहम्मद (ﷺ) अचानक एक कलाम पेश करते हैं और दावा करते हैं कि यह कलाम अल्लाह की तरफ से है और अगर तुम्हे इसमें शक है तो तुम भी ऐसा कलाम बना कर दिखाओ (सूरेह बक्राह-23,24).आप तसव्वुर कीजये एक तरफ कोई एक अनपढ़ आदमी है जिसे सब जानते हैं कि यह हम में 40 साल रहा है इसने कहीं से तालीम हासिलनहीं की और दूसरी तरफ इक़बाल, ग़ालिब, मीर और हाली जैसे महान शायर मौजूद हैं जो अपनी शानदार शाइरी के लिए मशहूर हैं, वो अनपढ़ आदमी इन शायरों को चैलेंज कर कह रहा है कि तुम सब मिलकर भी मेरे मुकाबले का कलाम पेश नहीं कर सकते, ये बड़े बड़े शायरउस आदमी से दुश्मनी रखते हैं उसके खिलाफ़ जंग लड़ते हैं उसकी दुश्मनी में अपनी जाने और माल खर्च करते हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि वे सब मिलकर भी एक पेज भी ऐसा नहीं लिख सके जिसको वे कुरआन के मुकाबले में दुनियां के सामने पेश करके कह सकेंकि देखो हमने मुहम्मद (ﷺ) को झूटा साबित कर दिया है.इससे साफ़ ज़ाहिर है कि यह अज़ीम कलाम किसी अज़ीम हस्ती ही का हो सकता है कोई इंसान तो अपने लिखे हुए कलाम के बारे में ऐसा दावा नहीं कर सकता.
(2) जो लोग अरबी भाषा का थोड़ा भी ज्ञान रखते हैं वो यह हकीक़त अच्छी तरह जानते हैं कि कुरआन ने अरबी भाषा को नई ऊँचाइयाँ दी हैं यानि कुरआन में बहुत हाई स्टेंडर्ड की अरबी शैली का इस्तिमाल किया गया है इतने स्टेंडर्ड की अरबी की कोईकिताब इसके बाद कभी नहीं लिखी जा सकी, आज भी जो कोई कुरआन की शैली के 10% करीब की अरबी बोले या लिखे उसे दुनियां में हाई स्टेंडर्ड अरबी बोलने वाला माना जाता है, इतने हाई स्टेंडर्ड की अरबी कोई आम इंसान लिखे यह नामुमकिन है.इससे भी यह बात साफ़ ज़ाहिर होती है कि कुरआन कोई आम किताब नहीं है.
(3) कुरआन में अल्लाह तआला ने दावा किया है कि इस में कोई ज़रा भी बदलाव नहीं कर सकता क्यों कि हम इसकी हिफाज़त करते हैं(सूरेह हिज्र-9) इस बात का भी इतिहास गवाह है कि कुरआन में आज तक कोई एक नुक्ते का भी बदलाव नहीं हुआ, वरना यूं तो बाइबल भी अल्लाह की किताब है लेकिन सब जानते हैं कि उसके कितने ही नए एडिशन कुछ ना कुछ बदलाव के साथ आते रहते हैं, लेकिनकुरआन 1450 सालों से ऐसा ही है.इससे भी पता चलता है कि कुरआन कोई आम किताब नहीं है.
(4) आप जानते हैं कि कुरान करीब 600 पेज की एक बड़ी और मोटी किताब है इसके बावजूद यह लाखो नहीं बल्कि करोड़ों लोगोंको ज़ुबानी याद है, और इसका कुछ ना कुछ हिस्सा तो हर मुस्लमान को याद होता है, यह रुतबा दुनियां की और किसी भी किताब को हासिल नहीं है, आप सोच कर देखें किसी छोटी सी किताब को भी वर्ड-टू-वर्ड ज़ुबानी याद करना कितना मुश्किल काम है और अगर वो कोई 600 पेज की मोटी किताब हो तब तो यह काम बेहद मुश्किल हो जाता है और इतना ही नहीं फिर अगर वो किताब किसी ऐसी भाषामें हो जो आप को समझ ही नहीं आती तो ??? लेकिन कुरान को अल्लाह ने कुछ ऐसा बनाया है जो वो चमत्कारी ढंग से बड़ों का तो क्या कहना 12,13, साल का बच्चा पूरा कुरआन ज़ुबानी याद किया हुआ आप को मुसलमानों की हर गली या मोहल्ले में आसानी से मिल जाएगा यह तो आम है लेकिन ऐसे बच्चों की भी बहुत बड़ी तादाद है जिनको पूरा कुरआन याद है और उनकी उमर सिर्फ 6,7, और 8 साल है, अगर आप गौर करें तो यह कोई मामूली बात नहीं कि 600 पेज की एक मोटी किताब जो ऐसी भाषा में लिखी है जो गैर अरब को समझ नहीं आती और उसको छोटे छोटेबच्चे पूरा ज़ुबानी याद कर लेते हैं.इससे भी पता चलता है कि कुरआन कोई आम किताब नहीं है.
(5) कुरआन का एक कमाल यह भी है कि हर किताब तो एक खास तबके के लिए लिखि जाती है यानि लिखने वाला पहले यह फैसला कर लेताहै की मैं किस तरह के लोगों के लिए यह किताब लिख रहा हूँ कोई आम आदमी की समझ के अनुसार होती है और कोई बड़े एजुकेटिड लोगों को ध्यान में रख कर लिखी जाती है तो कोई ख़ास ज़माने और देश को ध्यान में रख कर लिखी जाती है, लेकिन कुरआन जितना अनपढ़ के लिखे हिदायत है उतना ही बहुत पढे लिखे के लिए भी हिदायत है, जैसे इसे पढ़कर आम लोग के ईमान लाने की बेशुमार मिसालें हैं ऐसे ही बहुत पढ़े लिखे एजुकेटिड लोगों के इस को पढ़ कर ईमान लाने की भी मिसालों की कमी नहीं यानि चाहे कोई मर्द हो या औरत, भारत से हो अफ्रीका से, अमीर घर से हो या गरीब घर से, बूढ़ा हो या नौजवान, बहुत पढ़ा लिखा हो या कम पढ़ा लिखा हो यह किताब सब को समझ में भी आती है और सब की रहनुमाई (मार्गदर्शन) भी करती है, इसी लिए कुरआन में अल्लाह ने फ़रमाया है कि- हमने कुरआन को नसीहत के लिए आसान बना दिया है, तो क्या कोई है नसीहत चाहने करने वाला ?(सूरेह क़मर-32)और बहुत ज्यादा गहराई में जा कर बात समझने वालों के लिए तो यह समुन्द्र के जैसा है,आज तक अलग अलग आलिमों की तरफ से कुरआन की हजारों बड़ी बड़ी तफसीरें (Commentary) लिखी जा चुकी हैं लेकिन हमेशा लिखने वाले कहते हैं कि हमने तो कुछ भी नहीं लिखा अभी तो बहुत ज्यादा लिखना बाकि है.यानि एक तरफ तो कुरआन इतना सादा है कि एक आम रेढ़ी चलाने वाला भी इससे फाएदा हासिल करता है और दूसरी तरफ गहराई इतनी कि कोई बड़े से बड़ा आलिम भी यह दावा नहीं करता कि मैंने पूरा कुरआन समझ लिया है अब और ज्यादा कुरान में कुछ नहीं है बल्कि वोयह ही कहता है कि जितना समझा है उससे कहीं ज्यादा समझना बाकि है.इससे भी ज़ाहिर होता है कि यह कोई आम किताब नहीं है.
(6) एक अहम पहलू यह भी है कि जब हम किसी बड़े कवि या लेखक को पढ़ते हैं तो हमेशा हम देखते हैं कि वक़्त से साथ साथ उस लेखक के ज्ञान, भाषा शैली और विचारों में विकास हुआ है यह ना मुमकिन है कि एक लेखक लम्बे समय तक कुछ लिखता हो और उसके लेखन में विकास न हुआ हो, इसी विचारों के विकास की वजह से एक ही लेखक की शुरू ज़िन्दगी की लिखी हुई बातों और आखिर ज़िन्दगीकी लिखी हुई बातों में विरोधाभास मिलना एक आम बात है, आप चाहे इकबाल को पढ़लें या ग़ालिब को या विलियम शेक्सपियर को या किसी भी लेखक को जिसने सालों लिखा हो आप को उसके लेखन में विकास और विरोधाभास साफ नज़र आएगा, क्यों कि हर इंसान के विचारों में विकास होता रहता है.लेकिन कुरआन 23 साल के लम्बे अरसे में लिखे जाने के बावजूद उसमे आप को कोई विकास नज़र नहीं आ सकता, और ना ही उसमे विरोधाभास पाया जाता है जिस मापदंड के विचार, भाषा शैली, ज्ञान और दावे उसमे शुरू में हैं आखिर तक वैसे ही हैं, यह किसी इंसान के वश की बात नहीं यह अल्लाह ही है जिसके ज्ञान में विकास नहीं होता क्यों कि वो पहले से ही सब जनता है, इसी लिए कुरआन में लिखा है कि- अगर यह कुरआन अल्लाह के बजाए किसी और की ओर से होता तो वे इसके भीतर बहुत विरोधाभास पाते (सूरेह निसा-82)इससे साफ़ ज़ाहिर है कि कुरआन किसी इंसान का लिखा हुआ नहीं है.
(7) अब कुछ कुरआन की की हुई भविष्यवाणयों पर नज़र डालये जो अब इतिहास बन चुकी हैं- कुरआन के नाज़िल होते वक़्त दुनियाँ में दो बहुत बड़ी सलतनतें थी एक रूमी सलतनत जो ईसाइयों की थी उसका बादशाह हरकुल (हरक्युलिस) था दूसरी ईरानी सलतनत जो मजूसयों (आग को पूजने वालों) की थी और उसका बादशाह खुसरो था, ईरानियों ने रूमयों को बुरी तरह हरा दिया था और रूमयों के फिर से उठने के कोई आसार नहीं थे, मक्के के मुशरिक इस पर खुशियाँ मना रहे थे और मुसलमानों से कहते थे कि देखो ईरान के आगके पुजारी विजय पा रहे हैं और रोमन पैगम्बरों के मानने वाले ईसाई हार पर हार खाते चले जा रहे हैं, इसी तरह हम भी अरब के बुत परस्त तुम्हें और तुम्हारे धर्म को मिटा कर रख देंगे.कुरआन ने ऐसे हालात में भविष्यवाणी की कि रूमी 10 साल के अन्दर फिरसे विजय पाएगें (सूरेह रूम), इसे सुनकर मक्का के मुशरिक मुसलमानों की मज़ाक उड़ाने लगे कि देखो मुस्लमान पागल हो गए हैं जो ऐसी बात कह रहे हैं जो मुमकिन ही नहीं है,लेकिन दुनियां ने देख लिया कि कुरआन की यह नामुमकिन भविष्यवाणी 9 साल के भीतर पूरी हुई, इतिहासकार भी हरक्युलिस की जीत को किसी चमत्कार से कम नहीं मानते.इससे भी पता चलता है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है.
(8) इतिहास से ही आप को पता चल सकता है कि एक वक़्त ऐसा भी था जब मुसलमानों की तादाद उँगलियों पर गिनने लायक थी और जो थे उनकी भी हालत गरीबी में ऐसी थी कि उनके पास अपनी हिफाज़त करने के लिए तलवारें भी ना के बराबर थी, जबकि उनके दुश्मन अनगिनत थे और बड़े बड़े सरदार थे जो मुसलमानों और इस्लाम को ज़मीन से मिटाने के लिए बेताब थे और देखने वाले समझ रहे थे कि अब मुसलमानों का बचना नामुमकिन है, ऐसे हालत में कुरआन ने दो भविष्यवाणी की एक मक्का शहर मुसलमान फ़तेह करेंगे और दूसरी लोग फ़ौज की फ़ौज इस्लाम क़ुबूल करेंगे (सूरेह नस्र).जिस वक़्त यह दोनों भविष्यवाणी हुई उस वक़्त इनसे नामुमकिन बात और कोई नहीं थी लेकिन कुछ ही अरसे बाद दुनियां ने ये दोनों भविष्यवाणी भी पूरी होती हुई देखली थी.इससे भी अंदाज़ा होता है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है.
(9) मक्का में मुहम्मद (ﷺ) का एक पड़ोसी था वो कुरैश का सरदार था उसका नाम अबू लहब था वो और उस की बीवी अल्लाह के रसूल के बहुतबड़े दुश्मन थे वो हर तरह से उन्हें सताता था, उसकी मौत से करीब 10 साल पहले कुरआन ने भविष्यवाणी की थी कि वो कभी ईमाननहीं लाएगा और उसकी मौत अज़ाब से होगी (सूरेह लहब), वो इस्लाम दुश्मनी में कुछ भी कर सकता था अगर वो ईमान क़ुबूल करलेता जैसे उसकी बेटी और दोनों बेटों ने किया तो कुरआन की भविष्यवाणी गलत साबित हो जाती लेकिन वो ऐसा ना कर सका और उसकी मौत भीबहुत बुरी बीमारी से हुई जिससे उस का शरीर सड़ गया था उसके परिवार के लोगों ने भी उसके शरीर को हाथ नहीं लगाया.इससे भी पता चलता है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है.
(10) कुरआन के नाजिल होने से बहुत पहले अल्लाह के एक पैगम्बर मूसा (अलैहिस्सलाम) के ज़माने में मिस्र में फिरौन नामीएक राजा को जो ज़बरदस्ती खुद को खुदा कहलवाता था अल्लाह ने अज़ाब के तौर पर दरया में डुबा कर मार दिया था उसका ज़िक्र ओल्ड टेस्टीमेंट में भी है,कुरआन में उसके बारे में भविष्यवाणी हुई थी कि उसकी लाश को अल्लाह एक दिन ज़ाहिर करेगा ताकि बाद में आने वालों लोगों के लिए वो इबरत की निशानी बने (सूरेह यूनुस-92).ध्यान रहे उसके अज़ाब से मरने के बारे में तो ओल्ड टेस्टीमेंट में ज़िक्र है लेकिन उसकी लाश पानी में गर्क नहीं होगी ऐसा कुरआन के अलावा किसी भी किताब में नहीं लिखा था,सन 1898 में चमत्कारी तौर पर उसके मरने के हजारों साल बाद उसकी लाश 'नील' नामी दरया के पास से मिली, जो ममी ना होनेके बावजूद भी हजारों साल तक गर्क नहीं हुई थी उसे आज भी मिस्र के म्युज्यम में देखा जा सकता है, उसकी लाश की पहचान और मिलने का विवरण 'डॉ. एलीड स्मिथ' की किताब ''royal mummies'' में देखा जा सकता है.अगर किसी इंसान ने हकीकत से आंखें बंद करने की कसम ही ना खा रखी हो तो यह एक बहुत बड़ा सबूत है कि कुरआन अल्लाह की किताब है.इनके अलावा भी कुरआन और सही हदीसों में बहुत सी भविष्यवाणयां हैं जो पूरी हुई हैं लेकिन वो इल्मी तरह की हैं इसलिए मैं उन्हें स्किप कर रहा हूँ, लेकिन एक बात साबित शुदा है कि अल्लाह और उसके रसूल की की हुई एक भी भविष्यवानि आज तक गलत साबित नहीं हुई है.
(11) अगर आप किसी लेखक से कहें की एक छोटी सी कहानी लिखो और उसमे फला फला शब्द इतनी इतनी बार आना चाहिए और फला फला शब्द नहीं आना चाहिए और फला फला शब्द जितनी बार पहले वाक्य में इस्तिमाल होगा दुसरे में भी इतनी ही बार होना चाहिए जैसी 5,6 कंडीशन आप लगादें तो आप अंदाज़ा कर सकते हैं कि लेखक पहले तो इन शर्तों के साथ कुछ लिख ही नहीं पाएगा और अगर लिख भी दिया तो वो जितना टूटा फूटा होगा आप खुद समझ सकते हैं.लेकिन कुरआन में अपनी बहतरीन शैली के साथ साथ गणित के पहलु से भी अनगिनत चमत्कार मौजूद हैं, मैं समझाने के लिए सिर्फ एक मिसाल देता हूँ, कुरआन मैं कहा गया है कि अल्लाह की नज़र में हज़रत ईसा (अ) की मिसाल हज़रत आदम (अ) के जैसी है (सूरेह आलेइमरान-59) यानि कि ईसा (अ) को बिना बाप के पैदा किया और आदम (अ) को बिना माँ बाप के पैदा किया,मायने के लिहाज़ से यह बात बिलकुल साफ़ है लेकिन अगर आप पूरे कुरआन में शब्द ''ईसा'' तलाश करें तो वो 25 बार पूरे कुरआन में आया है, और शब्द ''आदम'' भी पूरे कुरआन में 25 बार ही आया है, तो गिनती के लिहाज़ से भी यह दोनों एक जैसे ही हैं,अगर कुरआन में यह चीज़ें दो चार बार होती तो माना जाता कि यह इत्तिफाक से है, लेकिन यह गणित के चमत्कार तो कुरआन में अनगिनत हैं कुरआन में यह खोज अभी नई है और जारी है इसलिए इस टॉपिक पर अभी कुछ खास किताबें नहीं लिखी जा सकी, कुरआन में गणित के ऐसे चमत्कारों जो समझने के लिए आप इस लिंक की विडियो देखें -http://www.youtube.com/watch?v=Y96KuhAQBMIइस नई खोज से भी पता चलता है कि कुरआन इंसानी दिमाग की उपज नहीं है.
(12) कुरआन साइन्स की किताब नहीं है, उसका मकसद लोगों को साइन्स के बारे में बताना नहीं है लेकिन फिर भी ऐसी बहुत सीबातें कुरआन में हैं जिनकी पुष्टि आज साइन्स से होती है,मिसाल के तौर पर कुरआन में अल्लाह ने फ़रमाया - हमने हर जीवित चीज़ को पानी से पैदा किया है (सूरेह अंबिया-30) आज से पहले तो शायद लोग इस बात को ऐसे नहीं समझते होंगे जैसे अब हम साइन्स की मदद से इस आयत को समझ सकते हैं,एक जगह अल्लाह ने कुरआन में अजीब सी कसम खाई - कसम है सितारों के मरने या टूटने के मौक़े की, और अगर तुम जान लो तो यह बहुत बड़ी कसम है (सूरेह वकिअह-75) आज से पहले लोग इस आयत को भी ऐसे नहीं समझ सकते थे जिस तरह आज हम जानते हैं कि सितारा मरने के बाद एक बेहद ताकतवर ब्लैक होल में बदल जाता है, तो वाकई यह बहुत बड़ी कसम है,इसी तरह और बहुत सी आयतें हैं जिनमे अंतरिक्ष, जल चक्र, पहाड़ों के बारे में और माँ के पेट में बच्चे के बन्ने के स्टैप वगैरा के बारे में बताया गया है, जो अब साइंस की मदद से हमें सही सही समझमे आती हैं, इस टॉपिक को ज्यादा जानने के लिए यह(Bible, Quran and Science, Author Dr. Maurice Bucaille) नामी किताब पढ़ें,किसी को धोड़ी देर के लिए कोई गलत फहमी हो जाए तो और बात है वरना आज तक साइन्स ने जितनी भी तक्की की है वो कभी कुरआन के खिलाफ़ साबित नहीं हो सकी और उल्टा साइन्स ने कुरआन को सच ही साबित किया है और बहुतसी आयातों को समझने में मददगार साबित हुआ है.इससे भी साबित होता है कि कुरआन अल्लाह का कलाम है.
(13) कुरआन को आप यह ना समझें कि इसमें कोई अलग ही बातें बताई गई हैं, कुरआन अपने से पहली आसमानी किताबों का विरोधी नहीं बल्कि वो तो उनकी बार बार पुष्टि करता है, बस वो यह कहता है की धर्म के ठेकेदारों ने उन किताबों में अपनी अकल से छेड़ छाड़ करके उनमे काफी कुछ गलत चीज़े मिलादी है और लोगों से कहते हैं कि यह ईश्वर की तरफ से है, वो भी अल्लाह ही था जिसने पहले वे किताबें नाजिल की थी और यह भी अल्लाह ही है जिसने कुरआन नाजिल किया है.इसके अलावा भी बहुत से पहलु हैं जिनसे कुरआन अल्लाह का कलाम साबित होता है लेकिन सबको एक पोस्ट में लिख देना मेरे लिए मुमकिन नहीं है, लेकिन एक ऐसे इंसान के लिए जो बिना पक्षपात के बातों को देखता और समझता है उसके लिए ये सबूत काफी हैं किकुरआन अल्लाह का कलाम है, और जिसने पक्षपात का चश्मा लगाया हुआ है उसके लिए हज़ार सुबूत भी कम हैं, वरना कुरआन में 6500 से ज्यादा आयतें हैं और ''आयत'' का मतलब ही ''निशानी'' होता है.हमारी दावत (पुकार) इसके सिवा कुछ भी नहीं कि हम मुहब्बत और हमदर्दी के साथ ज़मीन पर रहने वाले इंसानों को उनके असल रब का यह पैगाम पहुंचा दें जो हमारे पास उनकी अमानत है, हम आप से इसके बदले में कुछ नहीं चाहते हमारा बदला तो रब के जुम्मे है,और कुरआन की दावत इसके सिवा कुछ नहीं कि वो इंसानों को उस दिन से खबरदार कर दे जो अब करीब आ लगा है, जिस दिन यह दुनियां ख़त्म हो जाएगी और इंसान और उनके रब के बीच का पर्दा उठ जाएगा और इंसान बंद आखों से भी वो सब कुछ देख लेगा जिसे आज वो खुली आखों से भी देखना नहीं चाहता, जिस दिन हर ज़ालिम को उसके हर ज़ुल्म की सज़ा मिल कर रहेगी और हर नेक को उसकी हर नेकी काबदला मिलेगा जिस दिन फैसले हमारी कमज़ोर अदालते नहीं बल्कि इंसानों का रब खुद करेगा.कुरआन लोगों को बताना चाहता है कि तुम अच्छी बुरी ज़िन्दगी जी कर मिट्टी हो जाने के लिए पैदा नहीं किये गए हो बल्कि तुम्हारे अज़ीम रब ने एक अज़ीम स्कीम एक अज़ीम प्लान के तहत तुमको पैदा किया, अब जो चाहे अपने होने का मकसद इससे जान ले और जो ना चाहे ना जाने.
अब जिसके जी में आए वो ही पाए रौशनी
हम ने तो दिल जलाके सरे आम रख दिया..
(Islam Par BeBuniyaad iljam)
Monday, 29 August 2016
हाजी के जज़्बे को सलाम, दोनों पैरो सेहै विकलांग, फिर भी अपने हाथो से कमा रहे है सवाब
दुनिया में सबसे खुश किस्मत वो लोग होते है जिन्हें अल्लाह के घर का दीदार नसीब होता है. अगर अल्लाह के हुज़ूर में हाज़री हो जाये हर एक के लिये खुशकिस्मती की बात है,आपको बतादे कि ऐसा ही एक मामला सामने आया. एकविकलाँग हाजी जो अपने पैरो पर तवाफ़ नही कर सकता का वीडियो सोशल मीडिया से मिला हैजिसको देख कर दिल भर आया कैसी हिम्मत और हौसले के साथ अपने हाथो के बल बैतुल्लाह मेंतवाफ़ करते हुए ।
Sunday, 28 August 2016
में अमेरिका जैसे मतलबी देश पर भरोसा नहीं करता।
हवाना: बीसवीं शताब्दी के सबसे शानदार नेताओं का अगर ज़िक्र होगा तो उसमें फ़िडेल कास्त्रो का नाम ज़रूर आएगा. एक ऐसा क्रांतिकारी जिसने अपने जज़्बे से वो काम कर दिखाया जो नामुमकिन सा लगता था. 1950 के दशकमें क्यूबा की क्रान्ति में जिस तरह उन्होंने और चे गुइवेरा ने भूमिका निभायी वोकमाल रही, इतना ही नहीं उसके बाद जब अमरीका ने क्यूबा पर “बे ऑफ़ पिग्स” के ज़रिये क़ब्ज़ा करने की कोशिश की तो उन्हें धूल चटा दी. 13 अगस्त, 1926 को पैदा हुए इस क्रांतिकारी ने क्यूबा को अपने मज़बूत कन्धों पर संभाला है. क्यूबा मिसाइल क्राइसिस के वक़्त उनका रोल एहम रहा और बाद में NAM में भी वो प्रमुख भूमिका में रहे. भारत के क़रीबी दोस्त माने जाने वाले फ़िडेल कास्त्रो ने हर मोर्चे पर भारत का साथ दिया. वो अमरीकी चालाकी को हमेशाअच्छी तरह समझते थे और अब जबकि अमरीका से उनके भाई राउल कास्त्रो ने संबंध सुधर लिए हैं तब भी वो यही कहते हैं “मैं अमरीका पे भरोसा नहीं करता”. उनके बारे में कहा जाता हैकि उन्होंने क़रीब 50 साल क्यूबा की सत्ता संभाली लेकिन उन्होंने कभी अमरीकी राष्ट्रपति से हाथ नहीं मिलाया.आज वो 90 साल के हो गए हैं लेकिन इस उम्र में भी नौजवान पीढ़ी के लिए एक हौसले और जज़्बे का नाम हैं और जो लोग मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट फ़लसफ़े के क़रीब हैं उनके लिए चे गुइवेरा और फ़िडेल कास्त्रो हीरो हैं.
सूफी संत बुल्ले शाह, जिन्होंने फिरके का विरोध कर अपने परिवार से नाता तोड़ लिया था
हज़रत सूफी सैय्यद अब्दुल्ला शाह उर्फ़ बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह, एक सूफी संत औरएक महान पंजाबी कवी, 1680 में पैदा हुए थे. इतिहासकारो की माने तो इनके जन्म स्थान में थोड़ा विवाद हैं. जबकि ज़्यादातर का मानना हैं कि सैय्यद बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह मौजूदा पाकिस्तान के बहावलपुर में पैदा हुए थे.इनके वालिद हज़रत सैय्यद शाह मुहम्मद दरवेश जो एक मस्जिद के इमाम थे. सूफी संत सैय्यद बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह ने शुरुआती इस्लामिक तालीम अपने वालिद से तस्लीम की थी जबकि आला तालीम क़सूर ज़िले में हज़रत ख़्वाजाग़ुलाम मुर्तज़ा से ली थी. बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह के परिवार वाले इस बात के खिलाफ थे.बुल्लेह शाह के परिवार वाले इसके खिलाफ थे कि बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह इनायत से सूफी शिक्षा हासिल करे, क्योकि बुल्लेह शाह पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्लाहो अलह वसल्लम के वंशज में से थे जोकि सैय्यद थे. जबकि सूफी हज़रत इनायत जात से आराइन थे. लेकिन हज़रत बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह इस मुखालिफत केबावजूद हरजत शाह इनायत से जुड़े रहे. सूफी संत बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह ने अपनी कविता के ज़रिये लिखा कि जो मुझे बुलाएगा उसे दोज़ख़ (नरक) में सज़ा मिलेगी. जो मुझे आराइनकहेगा उसे बहिश्त (स्वर्ग) के सुहावने झूले मिलेंगे. सूफी बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह की वफ़ात 1757 से 1759 के दरमियान मौजूदा पाकिस्तान के शहर क़सूर में हुई थी.सूफी बुल्लेह शाह ने न सिर्फ पंजाबी में कलाम लिखे बल्कि इन्होंने हिंदी और सुधक्कड़ी में भी कालामो को लिखा. बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह ने पंजाबी में कविताएँ लिखीं जिन्हें काफ़ियाँ कहा जाता है। काफ़ियों में उन्होंने बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह तख़ल्लुस का इस्तेमाल किया है. बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह ने अपने ख्यालों व भावों को काफियों के तौर में ज़ाहिर किया है. देखते ही देखते बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह की काफ़ियाँ इतनी मशहूर होगयी के आम लोग भी काफ़ियाँ को इस तरह पढ़ते थे जैसी कि उन्होंने खुद ही इनकी रचनाये की हो. बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह लोक दिल पर इस तरह राज कर रहे थे कि उन्होंने बुल्ले शाह रहमत-उल्लाह अलेह की रचनाओं को अपना ही समझ लिया था. इनकी काफियों में अरबी फारसी के अल्फ़ाज़ और इस्लामी मजहबी ग्रंथो के मुहावरे भी मिलते हैं।
नमाज़ियों को मस्जिद से आर्मी वालो ने धक्के मारके बाहर निकाला,सड़क पर अदा की नमाज़।
उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित आर्मी एरिया के मस्जिद में जुमे के दिन मस्जिद में नमाज पढ़ने आएं लोगों को कुछ आर्मी के लोगों द्वारा जबरदस्ती बाहर निकालने का मामला सामने आया है जिससे वहां जुमे के बाद की नमाज़ भी नहीं अदा हो सकीं। जिसके चलते मजबूरन लोगों को सड़क पर नमाज़ अदा करनी पड़ी।इस इलाके की यह मस्जिद करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही है जहाँ सालों से मुसलमान नमाज़ पढ़ते आ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ नमाज करने आए मुस्लिम लोगों को यह कहकर वहां से निकल दिया गया कि यह सैना का प्रतिबंधित इलाका हैं और यहाँ वही आदमी मस्जिद में जा सकता है जिसके पास इस इलाके में आने का अनुमति पत्र होगा । इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में रोष है । लोगों का कहना है कि पिछले कई सालों से यहाँ लगातार नमाज़ हो रही है फिर अचानक ऐसा क्यों?
मुसलमानो को झुटे केस में फसाकर भेजा जाता है जेल:मायावती
आज़मगढ़: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्षा सुश्री मायावती ने आज आज़मगढ़ में एक रैली के दौरान कहा कि नरेंद्र मोदी ने बात तो अच्छे दिन की करी थी लेकिन वो बुरे दिन ले आये हैं. उन्होंने प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुसलमानों को जबरन जेल में डाल दिया जाता है और उन पर जो इलज़ाम लगाए जाते हैं वो सिवाय झूठ के कुछ नहीं होतेहैं. उनकी ये रैली एक कामयाब रैली के तौर पर देखी जा रही है जिसमें लोगों की अच्छी संख्या मायावती को सुनने के लिए आई थी.
हिन्दू मुस्लिम की राजनीती करके बच्चों के भविष्य के साथ खेल रही सरकार।
मुंबई:“अगर BMC स्कूलों में सूर्य-नमस्कार को अनिवार्य किया गया तो मुस्लिम परिवारों के बच्चे स्कूल ही नहीं जाएंगे” येऐलान किया है सपा नेता अबु आज़मी ने। बीजेपी और शिवसेना ने BMC स्कूलों में सूर्य-नमस्कार को एक साज़िश के तहत अनिवार्य किया है लेकिन हम अपने बच्चों को इस साजिश का शिकार नहीं बनने देंगे चाहे मुस्लिम बच्चों को पढ़ाई क्यों न छोड़नी पड़े। मुंबई के BMC स्कूलों में ४ लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं जिनमें से ज्यादातर बच्चे गरीब घरों से आते हैं। इससे पहले जब BMC के स्कूलों में वन्देमातरम गाने की बात कही गई तो भी मुस्लिम नेताओं ने उसका विरोध किया था।जहाँ सूर्यनमस्कार को सीधे राजनीति से जोड़कर पूरे माहौल का फायदा उठाने में लगे अबु आजमी का कहना है कि ये नोटिस हम मुस्लिमों को कबूल नही है। हमारे बच्चे ज़ाहिल हो जाएँ पर सूर्य नमस्कार नही करेंगे।वहीँ मुस्लिम समुदाय के गरीब लोग जो अपने बच्चों को मुंबई के महँगे निजी स्कूलों में नही पढ़ा सकते हैं वो इस नए हंगामे से काफी परेशान दिख रहे हैं।
फिर हुआ सीरिया में बच्चों पर जुल्म होता वीडियो वायरल रूह कांप जायेगी देखिये
अलेप्पो: सीरिया में चल रहे ग्रह युद्ध में जिस तरह से इंसानी जान और माल का नुक़सान हो रहा है वो बहुत दुःखदायी है. हाल ही में एक विडियो आया था जिसमें एक बच्चा मलबे से निकाला गया तो उसका पूरा चेहरा मलबे से सना था और उसकी आँखों में चौंकने की हद तक ख़ामोशीथी. इंसानी दुःख को बयान करने वाला एक और विडियो सामने आया है, इस विडियो में दो बच्चेजो मलबे के ढेर से निकाले गए हैं और बुरी तरह से रो रहे हैं और रोते रोते ये कह रहे हैं कि “बड़ा भाई मर गया”. दुःख की इस घडी में जब बड़े बड़े लोग अपना होशो हवास खो बैठते हैं ऐसे मेंबच्चों के लिए ये क़हर है.
श्री श्री रविशंकर ने ट्वीट की बुरहान के पिता के साथ खिंचवाई फ़ोटो,राजनीती में हुई उथल पुथल
श्रीनगर: धर्म गुरु श्री श्री रविशंकर जो पिछले दिनों विवादों में रहे थे, ने कश्मीर में मारे गए चरमपंथी बुरहान वानी के पिता के साथ तस्वीर खिंचवाई है. ट्विटर पर उन्होंने इस तस्वीर को साझा करते हुए लिखा है कि “बुरहान वानी के पिता मुज़फ़्फ़र वानी दो दिनों से आश्रम में थे. हमने कई मुद्दों पर बात की.”चर्चित पत्रकार बरखा दत्त ने इस पर ट्वीट करते हुए कहा, “जब मैंने बुरहान वानी को स्कूल मास्टर का बेटा कहा था तो लोगों ने मुझे देशद्रोही था. अब दक्षिणपंथियों के लिएये एक हास्यास्पद दिन है.”श्री श्री रविशंकर के इस फ़ोटो-ट्वीट के बाद तो जैसे बवाल ही आ गया हो और वो जमात जो अक्सरलोगों को देशभक्त और देशविरोधी होने का सर्टिफिकेट बांटते रहते हैं कमेंट करने लगते हैं और बिना वजह की गालियाँ देने लगे.
कश्मीरियों के साथ हो रहा भेदभाव,जल्द बात चीत शुरू करे मोदी सरकार:असाउद्दीन ओवैशी
हैदराबाद। MIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के हालात सामान्य करने के लिए मोदी सरकार को तत्काल वार्ता शुरू करनी चाहिए। कश्मीर के हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए हैदराबाद सेसांसद ने कहा कि अगर अभी बातचीत की पहल शुरू नहीं की गई, तो बाद में वार्ता के लिए कोई नहीं होगा, क्योंकि राजनीतिक पार्टियां अपना महत्व खोती जा रही हैं। घाटी में शनिवार को कफ्र्यू का 50वां दिन था।ओवैसी ने संवाददाताओं से कहा, विशेषज्ञों काकहना है कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) तथा नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) अपना राजनीतिक महत्व खोती जा रही हैं, जबकि अलगाववादी भी अपनी जमीन खो रहे हैं। उन्होंने कहा, हम अनिश्चितता के भंवर में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने रॉ के एक पूर्व प्रमुख के हवाले से कहा कि दक्षिण कश्मीर एक स्वतंत्र क्षेत्र बनता जा रहा हैFacebook पर हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करेंओवैसी ने कहा कि वार्ता शुरू करने के लिए सरकार के पास कई तरह के तरीके और सूत्र हैं। उन्होंने कहा, यह समय सरकार को गंभीरता से सोचने का है। उन्होंने पीडीपी-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन सरकार के एजेंडे की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसका मकसद अलगाववादियों सहित सबके साथ बातचीत करना है।
फतवा:महिलाये भी दे सकती है पुरुष को तलाक:दरगाह आला हजरत
उत्तर प्रदेश (बरेली) बीबी अपने शौहर को तलाक दे सकती है या नहीं, इस पर दरगाह आला हजरत से सय्यद इक्तेदार अली ने फतवा माँगा था , इस्लाम के अंतर्गत तलाक का हक सिर्फ पुरुष को है। महिला नहीं। पहली बार तलाक जैसे मसले पर नया मामला सामने आया है ,दरगाह आला हजरत के फतवे को माने तो अब महिला भी तलाक दे सकती है। जिसे शरीयत में तसवीज-ए-तलाक का नाम दिया गया है। फतवे के जवाब मे पहली बार नई जानकारी सामने आई है। मुफ्तियोंका कहना है कि महिला भी तलाक दे सकती है। यह कैसे मुमकिन हो सकता है, उसका तरीका भी बतायागया है। तरीके को तसवीज-ए-तलाक कहा है। मीडिया रिपोर्ट अनुसार तलाक ऐसा मुद्दा है, जिस पर लंबे समय से बहस चल रही है। उलमा पर सवाल दागे जाते रहे हैं कि जब मजहब-ए -इस्लाममहिलाओं को अधिकार दिए जाने की पैरवी करता है तो फिर तलाक का हक सिर्फ पुरुष को ही क्यों। यह हक महिलाओं को भी मिलना चाहिए था।निकाह के वक्त शौहर बीवी से यह कह दे कि मैं तुझे यह इख्तेयार देता हूं कि तू अपने आपको तलाक दे दे। इस मजमून को किसी आलिम से लिखवाया भी जा सकता है। ऐसी सूरत में बीवी ऐसे शौहर को जो उसकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। मसलन नशे का लती है, अपराध में लिप्त है, मारपीट करता है, घर में अमन-चैन नहीं है या किसी बड़ी बीमारी में घिरा है तो बीवी अपने आपको तलाक दे सकती है। शौहर ने निकाह केवक्त एक तलाक का इख्तेयार दिया तो एक, दो का दिया तो दो और तीन तीन का दिया तो तीन तलाक होजाएंगी।दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी ने कहा है कि तसवीज-ए-तलाक का जिक्र बहारे शरीयत में पेज 25 से 41 तक है। दुर्रे मुख्तार जो कि फिकाह-ए-हनफी की किताबहै, उसकी चौथी जिल्द में पेज 565 से 587 तक यह मसला बयान किया गया है। साफ हो जाता है कि महिला भी तलाक दे सकती है। उसे तलाक हो जाएगी। यही बात दारुल इफ्ता मंजरे इस्लाम में फतवा विभाग के अध्यक्ष मुफ्ती मुहम्मद सय्यद कफील हाशमी ने भी सवाल के जवाब में कही।मैनचेस्टर में रहने वाले मुहम्मद मसूद अहमद भी बेटी की शादी से पहले दरगाह से यही सवाल पूछ चुके हैं। मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी का कहना कि यूरोप में ज्यादातर मुसलमान बेटी, बहन की शादी तसवीज-ए-तलाक का हक लेकर ही करतेहैं, क्योंकि वहां शादियां जल्द टूट जाती हैं।इस मसले पर देवबंद की राय जानी गई तो जमीयत-ए-उलमा के जिला महासचिव मुफ्ती अबू जफर का कहना है कि महिला के लिए तलाक का एक रास्ता खुला यानि काजी की अदालत ही है। उसके अलावा महिला खुद को तलाक नहीं दे सकती।
मोलवी और मुल्लाओ ने इस्लाम जैसे सुलझे हुए धर्म को उलझा कर रख दिया।
बॉलीवुड स्टार सलमान खान के पिता सलीम खान ने मुंबई की मशहूर हाजी अली दरगाह में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले बंबईहाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन चीजों का समर्थन करता है जो हदीस और कुरान में कही गई हैं।गौरतलब है कि कल दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले में हाई कोर्ट ने इस दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर रोक हटाते हुए कहा कि इस ट्रस्ट केपास पूजा के एक सार्वजनिक स्थल पर महिलाओं को जाने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है।उन्होंने कहा, “मजार और दरगाह कब्रें हैंऔर पुरुष और स्त्रियां दोनों यहां जा सकते हैं। किसी तरह का लिंग भेद नहीं है। मुल्लाओं और मौलवियों ने बेहद सुलझे हुए इस्लाम धर्म को उलझा दिया है। उन्होंने कहा कि फतवा भी वैसा फैसला नहीं है जैसा लोग सोचते हैं। यह इस्लामिक धर्म गुरुओं द्वारा दिया जाने वाला ओपिनियन हैं।”High court judgement on Haji Ali endorses what Hadees and Quran have said. To be a good muslim you have to be a good human being.— Salim Khan (@luvsalimkhan)August 27, 2016uncomplicated religion like Islam. Even Fatwa is not a verdict as people think, its an opinion given by an Islamic scholar.— Salim Khan (@luvsalimkhan)August 27, 2016Mazar & Durga are graves men & women both can visit them as there is no genderdiscrimination in Islam. Mullas & Maulvis are complicating an— Salim Khan (@luvsalimkhan)August 27, 2016इस मामले में सलीम ने ट्वीट करके कहा, “हाजी अली पर हाई कोर्ट का फैसला उन्हीं बातों का समर्थन करता है जो हदीस और कुरान में कही गई हैं। एक अच्छा मुस्लिम होने के लिए आपको एक अच्छा इंसान होना पड़ेगा।” हालांकि हाजी अली दरगाह में महिलाओं को जाने की इजाजत मुंबई हाईकोर्ट से मिल गई है, लेकिन मुस्लिम महिलाएं अब भी दरगाह में मजार वाले हिस्से तक जाने से कतरा रही हैं। महिलाएं अपने संकोच के पीछे धार्मिक कारण बताते हुए कोर्टको भी इस मामले में दखल ना देने की सलाह दे रही हैं।
तुर्की सरकार का मुस्लिम के हक़ में फैसला,अब महिलाये हिजाब पहनकर करे नोकरी।
इन्स्ताबुल: तुर्की ने देश की महिला पुलिसकर्मियों को सिर पर इस्लामिक स्कार्फ बांधकर ड्यूटी करने को लेकर एक अधिसूचना निकली है, अधिसूचना के मुताबिक महिला पुलिसकर्मी इस स्कार्फ (हिजाब) से अपने सिर को पूरी तरह ढक सकेंगी, इसका रंग भी उनकी वर्दी जैसा ही होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आधिकारिक तौर पर सेक्युलर देश तुर्की की सत्तारूढ़ पार्टी जस्टिस ऐंड डिवेलपमेंट पार्टी ने महिलाओं के ड्यूटी के दौरान हेडस्कार्फ पहनने पर लगे।Facebook पर हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करेंइससे पहले 2010 में तुर्की ने यूनिवर्सिटी कैंपसों में छात्राओं के हेडस्कार्फ पहनने पर लगे बैन को हटा लिया था। सरकार ने 2013 में राजकीय संस्थानों में महिलाओं को हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति दी थी। इसके अलावा 2014 में हाईस्कूल की छात्राओं के लिए यह छूट दी गई थी।तुर्की के राष्ट्रपति रिचप तैयब एर्दोगन के आलोचक इन फैसले को लेकर उन्हें निशाने पर लेते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति तुर्की के सेक्युलर देश की छवि को खराब कर रहे हैं, जिसकी स्थापना 1923 मेंअतातुर्क कमाल पाशा ने की थी।हालांकि सरकार समर्थक मीडिया का कहना है कि पश्चिमी देश भी महिला अधिकारियों को हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति दे चुके हैं। हाल ही में स्कॉटलैंड ने ऐसे ही छूट का आदेश जारी किया था, जबकि लंदन में एक दशक पहले ही ऐसी छूट दी जा चुकी है। यही नहीं कनाडा सरकारने भी पुलिस फोर्स में महिलाओं की भर्ती बढ़ाने के लिए उन्हें ड्यूटी के दौरान हिजाबपहनने की अनुमति दी थी।
ऐतिहासिक मोड़ पहली बार किसी महिला इमाम ने दी मस्जिद में अज़ान।
कोपेनहेगन। डेनमार्क में शुक्रवार को स्कैंडिनेवियाई मूल की शेरिन खानकन ने मस्जिद में अजान दी है। इसी मस्जिद की एक और महिला इमाम सलीखा मैरी फेतह ने ‘इस्लाम और मॉडर्न वर्ल्ड में मुस्लिम महिलाएं’ मुद्दे पर खुतबा पढ़ा।कोपेनहेगन के सिटी सेंटर स्ट्रीट के फास्ट फूड आउटलेट के ऊपर बनी मरियम मस्जिद जो फरवरी में ही खुल गयी थी। इसमें शुक्रवार को 26 अगस्त को पहली बार महिला इमाम ने अजान दी। अजान के बाद मस्जिद में 60 महिलाएं पहुंची। आधी से ज्यादा महिलाएं दूसरे मजहब से तालुल्क रखती थीं।मस्जिद के उद्घाटन समारोह को लेकर इसे बेहद ही खास तरीके से सजाया गया था। मस्जिद में बारीक कढ़ाई की क्रीम कलर के पर्दे टांगे गये थे। आयतें भी डिस्प्ले में लगाई गयी थी। मस्जिद को फूलों से सजाया गया था।Image via Sherin Khankan/Facebookमस्जिद सभी के लिए खुली रहेगी, जिसमें महिलाएं और पुरूष दोनों शिरकत कर सकते हैं। लेकिन शुक्रवार की जुमे की नमाज सिर्फ महिलाइमाम ही अदा करवाएंगी। इस मस्जिद में शादी और तलाक दोनों कराया जाएगा। शुक्रवार को इस मस्जिद में एक तलाक कराया गया।इमाम शेरिन खानकन ने बताया कि मस्जिद का मुख्य उद्देश्य रिलिजियस इंस्टीट्यूशन में मेल डॉमिनेटिंग सिस्टम को चैलेंज करना है। इमाम बनने के लेकर मेरे परिवार ने बहुत सपोर्ट किया।Facebook पर हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करेंखानकम के पिता सीरियाई रिफ्यूजी हैं, वहीं मां क्रिश्चियन है। जो कोपेनहेगन में नर्स का काम करती है।
R.S.S ने किया सर्वे,चुनाव अभी होने पर शिवराज सरकार को कहानी पड़ेगी मुह की:R.S.S
मध्य प्रदेश: भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारियों, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और अनुषांगिक संगठन की दो दिन चली बैठक में ‘पार्टी की छवि’की चिंता छाई रहीएक सर्वे में ये सामने आया है कि प्रदेश में सरकार के खिलाफ एंटी इंकमबेंसी बढ़ रही है, जिसे बैठक में समय रहते रोकने की हिदायत दी गई आरएसएस ने खुद प्रदेश में एक सर्वे करवाया था, जिसमें ये पाया गया कि अब रुख भाजपा के खिलाफ होने लगा है इस मुद्दे पर बैठक में पार्टी के विरुद्ध बनते माहौल को समय रहते रोकने की बात कही गईFacebook पर हमारे पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करेंभाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा किअंत्योदय और सामाजिक समरसता पर जोर दिया जाएगा। पार्टी, संघ और सामाजिक संगठन मिलकर पं. दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. अंबेडकर, गोविंद सिंह व नानाजी देशमुख की जयंती मनाई जाएगी साथ ही दो अक्टूबर को गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन मनाया जाएगासूत्रों का कहना है कि संघ ने भाजपा से गरीबों और दलितों के लिए अभियान चलाने को कहा है ये ऐसे दो बड़े वर्ग हैं, जो जनाधार बढ़ाने में सहायक हैं इस अभियान में अनुषांगिक संगठन भी भाजपा का साथ देंगे संघ को लगता है कि इसी रास्ते से चौथी बार सत्ता में आया जा सकता है।Source: Headline24
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